मुख्यालय संवाददाता@विशाल टंडन…
..जैन साधना भवन में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, रक्तदाताओं को मिले प्रशस्ति पत्र

रॉबर्ट्सगंज नगर के दीपनगर स्थित जैन साधना भवन में आठ सितंबर से चल रहे पर्युषण पर्व का अंतिम दिन क्षमा याचना दिवस के रूप में मनाया गया। इस दौरान जैन समाज के लोगों ने वर्षभर में जाने-अनजाने हुई गलतियों के लिए एक-दूसरे से क्षमा मांगी और आत्मचिंतन का संदेश दिया।

कार्यक्रम में वक्ता रामेश्वर जैन ने कहा कि जैन धर्म में पर्युषण पर्व बाहरी प्रकाश के बजाय आंतरिक प्रकाश का पर्व है। यह आत्मशुद्धि, संयम और अपने कर्मों की समीक्षा करने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने वर्षभर में स्वयं से हुई भूलों के लिए सभी से क्षमा याचना की और पर्युषण पर्व के महत्व पर प्रकाश डाला।

हर्ष अग्रवाल ने कहा कि पर्युषण पर्व वर्षभर के कार्यों की समीक्षा करने का पर्व है। उन्होंने कहा कि भारत में अनेक पर्व मनाए जाते हैं, लेकिन पर्युषण को जैन समाज महापर्व के रूप में मनाता है। उन्होंने बताया कि जैन धर्म में प्राचीन काल से अपनाई जा रही कई जीवनशैलियों को आज आधुनिक समाज स्वास्थ्य और पर्यावरण की दृष्टि से स्वीकार कर रहा है।

दिल्ली से आए नरेश जैन ने कहा कि जैन धर्म केवल धर्म नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक विचारधारा और शैली है। उन्होंने कहा कि संयम और तप के मार्ग पर चलकर व्यक्ति आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ सकता है। मोक्ष की प्राप्ति मानव जीवन से ही संभव मानी गई है।
इस अवसर पर पर्युषण पर्व के दौरान आयोजित रक्तदान शिविर में रक्तदान करने वाले रक्तदाताओं को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित मिडियाकर्मियों को भी सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में जोगीराम जैन, रामेश्वर जैन, धर्मराज जैन, पवन जैन, मनोज जैन, आनंद जैन, उदित जैन, विजय जैन, सोनू जैन, प्रशांत जैन सहित सैकड़ों की संख्या में माताएं, बहनें और समाज के लोग मौजूद रहे। अंत में मंगल पाठ के बाद प्रसाद वितरण किया गया।

