संवाददाता@मिथिलेश जायसवाल….

विकासखंड कोन के बागेसोती (जऊंवाजोत) में आयोजित जनजातीय संस्कृति महोत्सव में करमा की थाप पर पूरा इलाका झूम उठा। पारंपरिक गीत-संगीत और नृत्य की प्रस्तुतियों ने जनजातीय संस्कृति की जीवंत तस्वीर पेश की। महोत्सव में बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी जुटे और देर तक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आनंद लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ करीब 15 बैगा पुजारियों ने करम डाड़ लाकर विधि-विधान और पारंपरिक रीति-रिवाज से पूजा-अर्चना कर किया। इसके बाद करीब 20 जनजातीय सांस्कृतिक टीमों ने करमा गीत एवं नृत्य की प्रस्तुतियां दीं। कलाकारों ने अपनी पारंपरिक वेशभूषा और लोक शैली के माध्यम से जनजातीय संस्कृति की मनोहारी छटा बिखेरी।

मुख्य अतिथि अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के राष्ट्रीय अध्यक्ष सत्येंद्र सिंह खरवार ने कहा कि अपनी संस्कृति और परंपराओं को बचाने की जिम्मेदारी समाज की नई पीढ़ी की भी है। बदलते दौर में पश्चिमी संस्कृति के प्रभाव के बीच लोक परंपराओं और पूजा-पद्धतियों को मजबूत करना जरूरी है। करमा पूजा केवल आयोजन बनकर न रह जाए, बल्कि इसकी सांस्कृतिक भावना घर-घर तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि बच्चों और युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़कर ही सांस्कृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाया जा सकता है।

कार्यक्रम को एससी-एसटी आयोग के प्रदेश उपाध्यक्ष जीत सिंह खरवार, वनवासी कल्याण आश्रम के क्षेत्र संगठन मंत्री आनंद तथा ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि शशांक मिश्र ने भी संबोधित किया। संचालन जयप्रकाश गोंड ने किया और अध्यक्षता नन्दलाल उरांव ने की। बीडीओ कोन दिनेश शुक्ला ने आभार जताया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जनजातीय समाज के लोग, क्षेत्रवासी और गणमान्यजन मौजूद रहे।
