संवाददाता@विशाल टंडन…..

कर्बला के शहीदों की याद में मनाए जाने वाले मुहर्रम पर्व की तैयारियां क्षेत्र में अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। ताजियादार अपने-अपने ताजियों को सजाने और संवारने में जुटे हैं, वहीं अखाड़ों के खिलाड़ी नए-नए करतबों की तैयारी कर रहे हैं। ढोल-ताशों को दुरुस्त किया जा रहा है तथा घरों में महिलाएं प्रसाद स्वरूप मलीदा, खीर-पूड़ी और जर्दा-पूड़ी बनाने के साथ नफिल नमाज और दुआओं में मशगूल हैं।
मुहर्रम की रात लगभग नौ बजे फातिहाख्वानी के बाद ताजिए अपने-अपने चौकों पर बैठाए गये। देर रात सभी ताजिए जुलूस के रूप में विभिन्न मार्गों से होते हुए मुख्य चौकों पर मिलान करेंगे और अंततः कुआं वाले पार्क पहुंचेंगे, जहां से अपने-अपने इमाम चौकों के लिए रवाना होंगे। रॉबर्ट्सगंज नगर के आरटीएस मैदान के पास इस वर्ष नव जवान वारसी कमेटी द्वारा तैयार की गईं साबूदाने की ताजिया विशेष आकर्षण का केंद्र है।

कमेटी अध्यक्ष रिजवान वारसी ने बताया कि ताजिया के निर्माण में दो माह से अधिक समय लगा है। इसे बनाने में 55 किलो साबूदाना, 15 किलो फेविकोल, चार बंडल थर्मोकोल तथा पेंट-पॉलिश सहित अन्य सामग्री का उपयोग किया गया है। कलात्मक ढंग से तैयार यह ताजिया 25 जून की रात आरटीएस क्लब के पीछे वारसी कटरा स्थित वारसी इमाम चौक पर स्थापित की गई।

ताजिया निर्माण में साजिद खान वारसी, फिरोज वारसी, रेहान वारसी, फिरोज बाबा, अनस अहमद, गुड्डा, अप्सार छोटू, हमजा वारसी, साद वारसी, हम्द वारसी, तम्मना, दरक्शा और नगमा सहित कई लोगों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। कमेटी ने क्षेत्रवासियों से मुहर्रम कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर सहभागिता की अपील की है।





