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Spiorts Ministry NSDF Fund: खेल मंत्रालय के अंतर्गत खिलाड़ियों को बेहतर ट्रेनिंग और स्पोर्ट्स इंफास्ट्रक्चर देने के लिए बने NSDF Fund का पैसा अफसरों की कॉलोनियों और क्लबों पर खर्च होने का मामला सामने आया है. RTI और सरकारी रिकॉर्ड्स के मुताबिक 2021 से 2025 के बीच करोड़ों रुपये न्यू मोती बाग और दूसरे सिविल सर्विसेज ऑफिसर्स क्लब को दे दिए गए. इन पैसों से लक्जरी स्पोर्ट्स फैसिलिटी बनाई गई, जिसमें सिर्फ VIP ही एंट्री कर सकते हैं.
नेशनल स्पोर्ट्स डेवलपमेंट फंड का इस्तेमाल सरकारी अधिकारी कर रहे
नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली और दिल्ली का लुटियंस जोन. जहां देश के सबसे ‘क्रीम कैटेगरी’ के लोग रहते हैं. वो लोग जिनपर हिंदुस्तान को आगे ले जाने की जिम्मेदारी है. संसद, पीएमओ, सुप्रीम कोर्ट, मंत्रालय वाला इलाका. इसी लुटियंस जोन का न्यू मोती बाग, जिसके आलीशान रिहायशी कॉम्प्लेक्स की चमचमाती स्पोर्ट्स फैसिलिटी पहली नजर में किसी इंटरनेशनल स्पोर्ट्स सेंटर जैसी लगती है.
खिलाड़ी नहीं अधिकारियों की एंट्री
पारदर्शी छत के नीचे हाईटेक स्विमिंग पूल, जिससे तापमान नियंत्रित होता है. वुडन फ्लोरिंग वाले बैडमिंटन और टेबल टेनिस कोर्ट. स्क्वैश एरीना और जिम, लेकिन इन सुविधाओं के गेट पर खड़े गार्ड तय करते हैं कि अंदर कौन जाएगा और कौन नहीं!
प्लेयर्स को सजा, अधिकारियों का मजा
द इंडियन एक्सप्रेस में आज एक ऐसी रिपोर्ट छपी है, जिससे साबित होता है कि खिलाड़ियों को तैयार करने के लिए बने नेशनल स्पोर्ट्स डेवलपमेंट फंड (NSDF) का पैसा किस तरह अफसरों की कॉलोनियों और क्लबों तक पहुंच रहा है. इस सुविधा से कोई खिलाड़ी तो नहीं बन रहा, लेकिन अफसर और उनके बीवी-बच्चे-रिश्तेदार जमकर मौज काट रहे हैं. अय्याशी कर रहे हैं!
खिलाड़ियों का फंड. ऑफिसर्स के क्लब
नेशनल स्पोर्ट्स डेवलपमेंट फंड यानी NSDF का गठन 1998 में इस मकसद के साथ किया गया था कि इससे खिलाड़ियों को वर्ल्ड क्लास फैसिलिटी मिलेगी.अंतरराष्ट्रीय स्तर की ट्रेनिंग मिलेगी. इंफ्रास्ट्रक्चर और सपोर्ट मिलेगा. इसी फंड से TOPS जैसी योजनाएं चलती हैं, जिसने कई ओलिंपिक खिलाड़ियों को तैयार किया, लेकिन इस घपलेबाजी को उजागर करने के लिए RTI के जरिए सरकारी रिकॉर्ड्स निकाले गए.
न्यू मोती बाग की कहानी
जांच में सामने आया कि 2021 से 2025 के बीच 6.7 करोड़ रुपये से ज्यादा की मंजूरी अफसरों से जुड़े संस्थानों को दी गई, जिसमें से 6.2 करोड़ रुपये जारी भी कर दिए गए. इसमें सिविल सर्विसेज ऑफिसर्स इंस्टीट्यूट (CSOI), सेंट्रल सिविल सर्विसेज कल्चरल एंड स्पोर्ट्स बोर्ड (CCSCSB) और न्यू मोती बाग रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स शामिल हैं. 2019 में पहले ही खेलो इंडिया योजना से न्यू मोती बाग स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 2.8 करोड़ रुपये दिए गए थे. जबकि उसी दौरान NSDF को मिलने वाला चंदा 85.26 करोड़ से घटकर सिर्फ 37.02 करोड़ रुपये रह गया. RWA अध्यक्ष सुधांशु पांडे की माने तो:
ये सुविधाएं सिर्फ अफसरों के लिए नहीं बल्कि ‘सही तरह से स्क्रीन किए गए’ निजी नागरिकों के लिए भी खुली हैं. खेल और फिटनेस सरकारी कॉलोनियों की ‘वेलफेयर एक्टिविटी’ का हिस्सा हैं. अगर इनमें पैसे खर्च नहीं होंगे तो इतनी बड़ी सरकारी कॉलोनी का विकास कैसे होगा. इसका मकसद खेलों के प्रति सजगता बढ़ाने और स्वास्थ्य के लिए लोगों को जागरुक करना है.
संसदीय कमिटी ने भी जताई चिंता
अगस्त 2025 में लोकसभा में पेश संसदीय समिति की रिपोर्ट ने साफ कहा कि NSDF का पैसा रिहायशी कॉलोनियों और सिविल सर्विस एसोसिएशनों को देने की परंपरा बंद होनी चाहिए. समिति ने सिफारिश की कि यह फंड ‘सख्ती से खिलाड़ियों, कोच और खेल इंफ्रास्ट्रक्चर’ पर ही खर्च हो.’
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अंशुल तलमले फरवरी 2025 से नेटवर्क18 ग्रुप में डिप्टी न्यूज एडिटर की जर्सी पहनकर स्पोर्ट्स डेस्क की कप्तानी कर रहे हैं. यहां स्पोर्ट्स कंटेंट प्लानिंग, एडिटोरियल डायरेक्शन एंड स्ट्रेटजी मेकिंग का रोल संभाल रहे अ…और पढ़ें
