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जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शन से मेरा करियर खत्म हो गया, पहलवान दीपक पूनिया का छलका दर्द

Admin by Admin
May 12, 2026
in खेल
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जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शन से मेरा करियर खत्म हो गया, पहलवान दीपक पूनिया का छलका दर्द
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गोंडा (उत्तर प्रदेश): एशियाई खेलों के रजत पदक विजेता दीपक पूनिया का मानना ​​है कि जंतर-मंतर पर पहलवानों के विरोध प्रदर्शन से जो व्यवधान पैदा हुआ, उससे भारत के कई खिलाड़ियों का करियर प्रभावित हुआ जिसमें वह खुद भी शामिल हैं.

दीपक एक समय 86 किलोग्राम वर्ग में भारत की तरफ से निरंतर अच्छा प्रदर्शन करने वाले पहलवान थे. वह तोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक से चूकने के बाद अपनी पुरानी लय हासिल करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. तब से उनका एकमात्र अच्छा प्रदर्शन एशियाई खेल 2023 में रहा जहां उन्होंने रजत पदक जीता था.

इस 26 वर्षीय खिलाड़ी ने सोमवार को यहां राष्ट्रीय ओपन रैंकिंग टूर्नामेंट जीता था, लेकिन वह भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) की वर्तमान नीति के अनुसार एशियाई खेलों के लिए 31 मई को होने वाले चयन ट्रायल में भाग लेने की योग्यता नहीं रखते हैं. इस नीति में यहां चल रहे टूर्नामेंट के नतीजों पर गौर नहीं किया जाएगा.

विरोध प्रदर्शन और अन्य घटनाओं के कारण 2023 के बाद कई टूर्नामेंट रद्द कर दिए गए थे और हमें पहले की तरह विदेश में होने वाली प्रतियोगिताओं में भाग लेने के मौके भी नहीं मिले. जब आप हर दूसरे या तीसरे महीने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी प्रतियोगिता में भाग लेते हैं तो आपको अपनी कमजोरी का पता चलता है और आप उसमें सुधार करते हैं, लेकिन अगर आपको साल में केवल एक विश्व चैंपियनशिप या केवल एक एशियाई चैंपियनशिप में भाग लेने का मौका मिलता है तो प्रदर्शन में बहुत बड़ा अंतर आ जाता है.

भारत के प्रमुख पहलवान विनेश फोगाट, बजरंग पूनिया और साक्षी मलिक ने 2023 में डब्ल्यूएफआई के तत्कालीन अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह के खिलाफ लंबे समय तक चले विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया था, उन्होंने सिंह पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था.

खेल मंत्रालय ने तब डब्ल्यूएफआई को निलंबित कर दिया था और एक तदर्थ समिति ने लंबे समय तक इसका संचालन किया, इसके चलते भारत में टूर्नामेंट और कुश्ती गतिविधियों में व्यवधान पैदा हुआ. यह मामला अभी अदालत में है.

दीपक से जब पूछा गया कि वह भी विरोध प्रदर्शन स्थल पर आए थे तो उन्होंने कहा, ‘मैं अभी उन बातों पर चर्चा नहीं करना चाहता. रहने दीजिए,’ हरियाणा के इस पहलवान ने 2025 में विश्व चैंपियनशिप में अपने निराशाजनक प्रदर्शन का कारण पर्याप्त अभ्यास नहीं करना और अभ्यास के लिए साथियों की कमी को बताया. पदक राउंड से काफी पहले ही उनका प्रदर्शन फीका पड़ गया और वह 11वें स्थान पर रहे.

उन्होंने कहा, ‘मैं स्वीकार करता हूं कि मैंने अभ्यास में गलतियां कीं. विश्व चैंपियनशिप से पहले मुझे कोई अच्छा स्पैरिंग पार्टनर (अभ्यास के लिए साथी पहलवान) नहीं मिला. स्पैरिंग पार्टनर बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं.’

दीपक ने कहा कि उनका पूरा ध्यान अगले एशियाई खेलों में 86 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतने पर है. उन्होंने कहा, ‘मेरा लक्ष्य एशियाई खेलों में अपने पदक का रंग बदलना है. मैं एशियाई खेलों में मौका पाने के लिए ही इस प्रतियोगिता में भाग ले रहा हूं. मैं महासंघ से मुझे मौका देने पर विचार करने का अनुरोध करता हूं.’



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