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Sonbhadra । चोपन ब्लॉक के ग्राम पंचायत कोटा में संचालित कोटेदार मेराज अहमद की ऑफलाइन राशन दुकान अब ग्रामीणों के लिए बड़ी समस्या बनती जा रही है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि नेटवर्क उपलब्ध होने के बावजूद दुकान को जानबूझकर ऑनलाइन नहीं किया जा रहा, जिससे कोटेदार की मनमानी और भ्रष्टाचार चरम पर पहुंच गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि कई बार विभागीय स्तर पर दुकान को ऑनलाइन करने की कवायद हुई, लेकिन अधिकारियों की मिलीभगत और उदासीनता के चलते आज तक व्यवस्था जस की तस बनी हुई है। जबकि जहां दुकान संचालित है वहां नेटवर्क की सुविधा मौजूद है। इतना ही नहीं, गुरमुरा सामुदायिक भवन को भी पहले ऑनलाइन वितरण केंद्र के रूप में चिन्हित किया गया था, लेकिन बाद में मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
गौरही निवासी इंद्रजीत ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि करीब दो माह पहले उनके राशन कार्ड पर कोटेदार द्वारा “निरस्त” लिख दिया गया और राशन देने से साफ इनकार कर दिया गया। कोटेदार की ओर से उन्हें जिला स्तर पर राशन कार्ड संशोधित कराने की बात कही गई। लेकिन 7 मई 2026 को ओबरा पूर्ति कार्यालय में जांच कराने पर अधिकारियों ने स्पष्ट बताया कि राशन कार्ड पूरी तरह सही है और उसमें कोई त्रुटि नहीं है।
मामला यहीं नहीं रुका। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि अंत्योदय कार्डधारक कमोदा देवी की लगभग तीन वर्ष पूर्व मृत्यु हो चुकी है। उनके कार्ड में पति राम स्वरूप का नाम दर्ज होने के बावजूद करीब दो वर्षों तक 35 किलो राशन का उठान दिखाकर राशन की कालाबाजारी की गई। बाद में केवाईसी प्रक्रिया के दौरान भी राम स्वरूप का सत्यापन नहीं कराया गया। वर्तमान में 80 वर्षीय राम स्वरूप लकवा से पीड़ित हैं और उन्हें किसी प्रकार की सरकारी सुविधा नहीं मिल पा रही है।
मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने बताया कि किसी को दो माह तो किसी को तीन माह से राशन नहीं दिया गया है। शिकायत करने पर कोटेदार की पत्नी द्वारा डांटकर भगा दिया जाता है। ग्रामीणों ने कहा कि गरीब और आदिवासी परिवार आखिर अपनी फरियाद लेकर कहां जाएं।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराते हुए कोटेदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई, दुकान निरस्त करने तथा राशन दुकान को गुरमुरा में स्थानांतरित कर ऑनलाइन व्यवस्था लागू करने की मांग की है, ताकि गरीबों के राशन की लूट बंद हो सके।