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मऊ जनपद की उन्नति सिंह ने संघर्षों को पार करते हुए अंडर-19 बास्केटबॉल में राजस्थान टीम को लीड कर नेशनल चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया. 14 साल की उम्र में पिता को खोने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और कड़ी मेहनत से अपने सपने को साकार किया. अब उनका लक्ष्य भारत के लिए खेलकर देश का नाम रोशन करना है.
मऊ. कहते हैं हर संघर्ष की एक अलग कहानी होती है, इस संघर्ष की भी एक कहानी है. मऊ जनपद के मुहम्मदाबाद गोहना ब्लॉक क्षेत्र के देवासी पूर्व ग्राम सभा के निवासी उन्नति सिंह की, जो की बास्केटबॉल में राजस्थान टीम को लीड करते हुए नेशनल चैंपियन बनी है. लोकल 18 से बात करते हुए नेशनल बास्केटबॉल चैंपियन उन्नति सिंह बताती है कि जब टीम साथ देने वाली हो तो कोई भी ट्रॉफी अपने नाम किया जा सकता है. अब वह नेशनल बास्केट बाल चैंपियन बनी है. हालांकि वह इसके पहले ताइक्वांडो की ब्लैक स्टेट चैंपियन रही हैं. बास्केटबॉल में वह कोई स्टेट चैंपियन नहीं जीत सकी क्योंकि उनकी टीम कमजोर रही, लेकिन जब टीम मजबूत मिली तो वह अब नेशनल बास्केटबॉल की चैंपियन बनी है. अब आगे उनका सपना है कि वह देश के लिए बास्केटबॉल खेले और अपने माता-पिता के साथ पूरे प्रदेश और देश का नाम रोशन करें.
सनबीम स्कूल को इस नेशनल चैंपियन का बनने का दिया श्रेय
उन्नति सिंह बताती है कि 27 अक्टूबर 2008 में मुहम्मदाबाद गोहना के देवसीपुर ग्राम सभा में ज्येष्ठ ब्लॉक प्रमुख स्वर्गीय अजीत सिंह के घर उनका जन्म हुआ. शुरुआती पढ़ाई-लिखाई उनकी मुहम्मदाबाद गोहना के ही सनबीम सीनियर सेकेंडरी स्कूल में हुई. हालांकि उन्होंने इस स्कूल का जिक्र करते हुए कहा कि किसी इमारत को बनाने के लिए यदि बेस मजबूत हो तो इमारत मजबूत खड़ा होता है. उन्होंने सनबीम स्कूल को इस नेशनल चैंपियन का श्रेय देते हुए बताया कि जो कुछ उन्होंने सीखा उन्होंने इसी स्कूल से सीखा, क्योंकि शुरुआती पढ़ाई में ही उन्होंने बहुत कुछ सीख लिया और यह सोच लिया कि उन्हें आगे चलकर देश का नाम रोशन करना है.
14 साल की उम्र में पिता का सर से उठ गया साया
उन्नति सिंह बताती है कि 14 साल की उम्र में उनके पिता का उनके सर से साया उठ गया, लेकिन उनके पिता का सपना था कि उनकी बेटी आगे चलकर उनका नाम रोशन करें इसलिए उन्होंने हार नहीं मानी और अपना संघर्ष जारी रखा. शुरुआती पढ़ाई सनबीम सीनियर सेकेंडरी स्कूल से करने के बाद वह लखनऊ पढ़ाई करने चली गई. इसके बाद अपने खेल प्रतिभा को निखारने के लिए अपना रुख करियर प्वाइंट गुरुकुल कोटा राजस्थान के तरफ कर लिया. वहीं से उन्होंने कोच के माध्यम से तैयारी शुरू की और आज नेशनल चैंपियन बनकर वापस अपने घर लौटी है.
पिता के पुण्यतिथि पर किया उनके सपनो को पूरा
उन्नति सिंह ने बताया कि जिस दिन उनके पिता की पुण्यतिथि थी उसी दिन उन्होंने यह नेशनल अवार्ड जीता और अपने पिता का सपना साकार किया. हालांकि, उनके पिता और माता दोनों राजनीति से जुड़े हुए हैं लेकिन उन्होंने राजनीति न चुनकर खेल को चुना है और आज बास्केटबॉल खेलकर नेशनल चैंपियन बनकर आई हैं. आगे उनका सपना है कि वह भारत के लिए खेल कर देश का नाम रोशन करें.
बास्केट बाल को नई पहचान दिलाने का है सपना
शुरू में उन्होंने यह कभी नहीं सोचा कि वह यहां तक पहुंच पाएंगी, लेकिन उनकी मुलाकात बास्केटबॉल कोच नासिर अली से हुई. कोच नासिर अली से मिलने के बाद उन्नति के हौसलों के उड़ान मिल गई. सही कोच और सही टीम मिलने के वजह से आज वह इस मुकाम पर पहुंची है और अंडर-19 बास्केटबॉल में उन्होंने नेशनल ट्रॉफी अपने नाम की है. बास्केटबॉल ट्रॉफी अपने नाम करने के बाद जब वह सनबीम सीनियर सेकेंडरी स्कूल में पहुंची तो वहां के छात्राओं और अध्यापकों ने इनका फूल मालाओं और ढोल नगाड़ों के साथ भव्य स्वागत किया है.
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नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें
