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Explainer: फुटबॉल सुपरपॉवर इटली का क्यों हुआ बुरा हाल, लगातार तीसरी बार वर्ल्ड कप में नहीं पहुंच सके

Admin by Admin
April 2, 2026
in खेल
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Explainer: फुटबॉल सुपरपॉवर इटली का क्यों हुआ बुरा हाल, लगातार तीसरी बार वर्ल्ड कप में नहीं पहुंच सके


चार बार की विश्व चैंपियन इटली की फुटबॉल टीम लगातार तीसरी बार विश्व कप के लिए क्वालीफाई करने में असफल रही. कल बोस्निया-हर्जेगोविना के हाथों जब ये दिग्गज टीम वर्ल्ड कप क्वालिफाइंग मैंच में 1-1 की बराबरी के बाद पेनल्टी शूटआउट में जाकर हारी तो पूरा इटली सदमे में डूब गया. वर्ष 2018, फिर 2022 और अब 2026 में इटली को वर्ल्ड कप से पहले ही बाहर का रास्ता देखना पड़ा. पहली बार ऐसी किसी वर्ल्ड कप विजेता रह चुकी टीम के साथ हुआ है कि वो प्रतियोगिता के लगातार तीन संस्करणों में भाग लेने से चूकी हो.

इस हार ने जहां इटली को बाहर किया तो बोस्निया-हर्जेगोविना को वर्ल्ड कप के इतिहास में दूसरी बार दूसरी बार क्वालीफाई करा दिया. इटली के लोग मान रहे हैं कि उनकी फेमस फुटबॉल अब एक “गहरे संकट” में पहुंच गई है. किसी को यकीन नहीं हो रहा कि ये वही टीम है, जिसने 2006 के फाइनल में महान समझी जाने वाली फ्रांस टीम को हराया था.

हालांकि सभी दिग्गज फुटबॉल टीमें कभी ना कभी वर्ल्ड कप क्वालिफाई करने में नाकाम रही हैं लेकिन ऐसा किसी चैंपियन टीम के साथ पहली बार हुआ जबकि वो तीन बार क्वालिफाई नहीं कर पाई हो.

इटली की टीम लगातार तीसरी बार वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई क्यों नहीं कर सकी?

– इटली के बाहर होने की सबसे बड़ी वजह ‘मैदान पर फिनिशिंग’ की कमी रही. क्वालिफिकेशन राउंड के दौरान इटली ने दबदबा तो बनाया, लेकिन गोल करने के मौकों को भुना नहीं पाए.स्विट्जरलैंड के खिलाफ अहम मैचों में जोर्गिन्हो का पेनल्टी मिस करना इटली को बहुत भारी पड़ा. अगर वे मैच जीते होते, तो इटली सीधे क्वालिफाई कर जाता. जब टीम सीधे क्वालिफाई नहीं कर पाई, तो उसे ‘नॉकआउट’ प्ले-ऑफ खेलना पड़ा, जहां एक खराब दिन ने उनका सफर खत्म कर दिया.

इटली की टीम कहां कमजोर पड़ रही है?

– इटली की पारंपरिक ताकत उनका डिफेंस रही है, लेकिन अब समस्या ‘अटैक’ में है. इटली के पास वैसे स्ट्राइकर हैं नहीं जैसे कभी हुआ करते थे, जिससे वो मुश्किल अवसरों को भी गोल में तब्दील कर पाएं. टीम के पास ऐसा कोई खिलाड़ी नहीं है जो मुश्किल वक्त में अकेले दम पर गोल निकाल सके. 2021 में यूरो कप जीतने के बाद टीम में एक तरह का संतोष आ गया, जिससे वो जरूरी आक्रामकता खो बैठे.

क्या इटली में अब अच्छे खिलाड़ी नहीं आ रहे?

– खिलाड़ी आ रहे हैं, लेकिन उन्हें सिस्टम का साथ नहीं मिल रहा. इटली की लीग सीरी ए में विदेशी खिलाड़ियों का दबदबा हो चुका है. लीग के बड़े क्लब अब विदेशी स्टार्स पर ज्यादा भरोसा करते हैं. इससे इटली के युवा स्थानीय खिलाड़ियों को पर्याप्त ‘गेम टाइम’ नहीं मिल पाता. स्पेन, जर्मनी और इंग्लैंड के मुकाबले इटली के पास वैसी वर्ल्ड-क्लास ‘यूथ एकेडमी’ नहीं बची हैं जो 20 साल पहले हुआ करती थीं.

क्या इटली की फुटबॉल यूरोप के बाकी देशों की तरह तरक्की नहीं कर रही?

– हां, यहां एक बड़ा अंतर तो ये भी दिख ही रहा है. इंग्लैंड और फ्रांस जैसी टीमें अब बहुत तेज और फिजिकल फुटबॉल खेलती हैं. इटली का स्टाइल आज भी थोड़ा धीमा है, जो आधुनिक काउंटर-अटैकिंग गेम के सामने पिछड़ जाता है. उन्हें अपनी ड्रिबलिंग पर ज्यादा भरोसा रहा है लेकिन आधुनिक फुटबॉल में इसकी जगह कम होने लगी है.
इटली के कई स्टेडियम और ट्रेनिंग सुविधाएं पुरानी हो चुकी हैं, जबकि प्रीमियर लीग या बुंडेसलीगा ने आधुनिक तकनीक और डेटा एनालिटिक्स में भारी निवेश किया है.

इटली में इस हार से लोग सदमे में क्यों हैं?

– यह सिर्फ खेल की हार नहीं, इटली के लिए सांस्कृतिक सदमा है, क्योंकि ये देश यूरोप के किसी भी देश की तुलना में फुटबॉल में सबसे ज्यादा डूबा हुआ है. जैसे भारत के लिए कहा जाता है कि हम क्रिकेट ओढ़ते – बिछाते और जीते रहते हैं वैसे इटली की फुटबॉल के साथ है. फुटबॉल इटली के डीएनए में है. इससे लोग बहुत इमोशनल तरीके से जुड़े हुए हैं. इसलिए टीम के वर्ल्ड कप में नहीं होने से पूरा देश ही गम में डूब गया है. साथ ही जब आप वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई नहीं होते हो तो ब्रॉडकास्टिंग, स्पॉन्सरशिप और मर्चेंडाइज के रूप में इटली के फुटबॉल संघ को करोड़ों यूरो का घाटा होता है.

क्या भविष्य में वापसी की उम्मीद है?

– इटली ने हमेशा गिरकर संभलना सीखा है. हालांकि, यह संकट गहरा है. उन्हें अपने जमीनी स्तर पर काफी बदलाव करने होंगे. लीग में घरेलू खिलाड़ियों के लिए कोटा या विशेष नियम लाने होंगे, ताकि 2030 के वर्ल्ड कप तक वो फिर अपनी टीम को अजेय बना सकें.

इटली का पुराना गोल्डन इतिहास क्या रहा है

– इटली का फुटबॉल इतिहास बहुत शानदार रहा है. ब्राजील के बाद इटली ही वह टीम है जिसने फुटबॉल की दुनिया पर सबसे लंबे समय तक राज किया है.
इटली ने कुल 4 बार फीफा वर्ल्ड कप की ट्रॉफी अपने नाम की है. दुनिया में केवल ब्राजील (5) ही उनसे आगे है, जबकि जर्मनी (4) उनके बराबर है.
वो 6 बार वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंचे हैं तो 18 बार वर्ल्ड कप टूर्नामेंट में हिस्सा लिया है.

इटली में फुटबॉल की संरचना क्या है. कितने खिलाड़ी. कितनी लीग, कितना पैसा

– इटली में फुटबॉल सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि एक विशाल आर्थिक और सामाजिक ढांचा है. वहां 14 लाख फुटबॉलर रजिस्टर्ड हैं. अगर शौकिया तौर पर खेलने वालों को भी जोड़ लिया जाए, तो यह संख्या 46 लाख के पार पहुंच जाती हैइटली में फुटबॉल को 9 स्तरों में बांटा गया है. इसे ‘इटालियन फुटबॉल पिरामिड’ कहते हैं. कई स्तर की सीरी सीरीज लीग हैं. शौकिया लीग हैं. अलग अलग स्तर की लीग में टीमों की संख्या अलग होती है औऱ वो ऊपर के पायदान के लिए क्वालिफाई करती हैं. इटली का फुटबॉल संघ दुनिया के सबसे बड़े संगठनों में एक है:
पूरे इटली में करीब 12,000 से 13,000 फुटबॉल क्लब और कंपनियां रजिस्टर्ड हैं. 5 से 16 साल की उम्र के हर 5 में से 1 इटालियन बच्चा फुटबॉल के किसी न किसी आधिकारिक ढांचे से जुड़ा होता है.
कह सकते हैं कि इटली के पास संरचना और पैसा तो बहुत है, लेकिन उसका सही प्रबंधन और युवाओं को मौका न मिल पाना ही उनके ‘बुरा हाल’ की मुख्य वजह है.



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