रेणुकूट/सोनभद्र.@अमिताभ मिश्रा…….

दुद्धी को जिला बनाए जाने तथा अनपरा व पिपरी को तहसील का दर्जा देने की मांग को लेकर शुक्रवार को स्थानीय स्तर पर आंदोलन तेज होता नजर आया। मोर्चा के अध्यक्ष व वरिष्ठ भाजपा नेता पारसनाथ गुप्त के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने उप जिलाधिकारी निखिल यादव को ज्ञापन सौंपकर क्षेत्र की लंबे समय से लंबित मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की अपील की।ज्ञापन के माध्यम से पारसनाथ गुप्त ने बताया कि दुद्धी को जिला बनाने की मांग कोई नई नहीं है, बल्कि वर्ष 1999 से लगातार इस मुद्दे को उठाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 1989 में जब सोनभद्र को जिला बनाया गया था, तभी से दक्षिणांचल क्षेत्र में जिला मुख्यालय स्थापित करने की मांग जोर पकड़ने लगी थी। बावजूद इसके तीन दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।उन्होंने क्षेत्र की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए बताया कि दक्षिणांचल का बड़ा हिस्सा आदिवासी बहुल है, जहां आज भी शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, रोजगार और प्रशासनिक सुविधाओं का अभाव बना हुआ है।
दूर-दराज के गांवों से लोगों को छोटे-छोटे कार्यों के लिए जिला मुख्यालय तक लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे समय और संसाधनों की भारी बर्बादी होती है। पारसनाथ गुप्त ने कहा कि यदि दुद्धी को जिला घोषित किया जाता है, तो इससे न केवल प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी, बल्कि क्षेत्र के समग्र विकास को भी नई दिशा मिलेगी।
आदिवासी समाज को सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिल सकेगा और उनकी जीवन स्तर में सुधार होगा। उन्होंने यह भी बताया कि शिक्षा, स्वास्थ्य, जनसंख्या, भौगोलिक क्षेत्रफल और प्रशासनिक दृष्टि से दुद्धी जिला बनने के सभी मानकों पर खरा उतरता है, इसके बावजूद सरकार द्वारा अब तक इस पर कोई निर्णय न लेना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
ज्ञापन में अनपरा और पिपरी को तहसील का दर्जा देने की भी प्रमुख मांग उठाई गई। प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि इन क्षेत्रों में तेजी से जनसंख्या वृद्धि और औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के चलते प्रशासनिक इकाइयों का विस्तार अत्यंत आवश्यक हो गया है। तहसील का दर्जा मिलने से स्थानीय स्तर पर राजस्व एवं अन्य प्रशासनिक कार्यों का निस्तारण सुगमता से हो सकेगा। इस दौरान मौजूद अनिल कुशवाहा, अरविंद यादव, संजय तिवारी, शुभम थापा सहित अन्य लोगों ने एक स्वर में कहा कि दुद्धी को जिला तथा अनपरा-पिपरी को तहसील बनाने से पूरे दक्षिणांचल क्षेत्र में विकास की नई संभावनाएं खुलेंगी।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही इस दिशा में सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
स्थानीय लोगों का मानना है कि क्षेत्रीय जनसमस्याओं का स्थायी समाधान तभी संभव है, जब प्रशासनिक ढांचे का विस्तार कर उसे स्थानीय स्तर तक सशक्त बनाया जाए।