मुख्यालय/सोनभद्र. @विशाल टंडन……

आज के तेज़-तर्रार जीवन और अस्वास्थ्यकर खान-पान की आदतों के कारण पेट की समस्याएँ आम हो गई हैं। कब्ज, गैस, अपच, एसिडिटी और दस्त जैसी बीमारियाँ रोज़मर्रा की जिंदगी पर असर डालती हैं। इस समस्या का प्राकृतिक और प्रभावी इलाज आयुर्वेद में संभव है। रॉबर्ट्सगंज के लोढ़ी स्थित 50 शैय्या एकीकृत आयुष चिकित्सालय इस दिशा में मरीजों को विशेषज्ञ आयुर्वेदिक उपचार प्रदान कर रहा है।
आयुष अस्पताल में चिकित्साधिकारी आयुर्वेद डॉ जितेंद्र पाल त्रिपाठी मरीजों का निरीक्षण कर उनकी पाचन क्रिया और स्वास्थ्य के अनुसार दवाइयाँ, आहार और जीवनशैली संबंधी सुझाव देते हैं। उन्होंने बताया की आयुर्वेद में पेट की समस्याओं का इलाज केवल दवा तक सीमित नहीं है, बल्कि रोग के कारणों को समझकर त्रिफला, अजवाइन, पिप्पली और हिंग जैसी जड़ी-बूटियों का उपयोग किया जाता है।
इसके अलावा, भोजन समय, जल का सेवन, पाचन अग्नि (अग्नि) को संतुलित करना और हल्के व्यायाम को भी जरूरी माना जाता है।डॉ जितेंद्र पाल ने कहा की सरकारी आयुष अस्पताल में मरीजों को न सिर्फ दवाइयाँ दी जाती हैं, बल्कि उन्हें पंचकर्म जैसी विशेष शोधन प्रक्रियाओं की भी सुविधा मिलती है, जिससे शरीर के दोष संतुलित होते हैं और पाचन तंत्र मजबूत बनता है। इससे न केवल पेट की समस्याओं से राहत मिलती है, बल्कि दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभ भी प्राप्त होता है।
आयुष अस्पताल में इलाज लेने वाले मरीज लाजवंती, सुनीता, रमा विश्वकर्मा, आलोक सिंह ने अपने अनुभव बताया कि आयुर्वेदिक उपचार से पेट संबंधी समस्याओं में प्राकृतिक और स्थायी सुधार आता है। सरकार की पहल से यह सुनिश्चित किया गया है कि हर आयुष अस्पताल में मरीज को गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित आयुर्वेदिक देखभाल मिल सके। इस तरह, पेट की समस्याओं के लिए आयुर्वेद आज भी एक भरोसेमंद और प्रभावी विकल्प साबित हो रहा है, और सरकारी आयुष अस्पताल इसे आम जनता तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।