घोरावल/सोनभद्र. @विजय अग्रहरी….

उत्तर प्रदेश खेत एवं ग्रामीण मजदूर यूनियन की ओर से राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन उपजिलाधिकारी घोरावल आशीष त्रिपाठी को सौंपा गया। यूनियन के पदाधिकारियों का कहना है कि महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी क़ानून की ओर खींचना चाहते हैं। ग्रामीण मजदूरों के हित में मनरेगा ही फिट बैठता है क्योंकि मनरेगा में रोजगार की गारंटी है और मनरेगा रोजगार हेतु मांग आधारित क़ानून है।
मनरेगा में साल में 200 दिन रोजगार और मजदूरी की दर 700 रुपये घोषित किए जाने की जरुरत है तथा समय से मजदूरी का भुगतान किया जाना चाहिए। वी बी जी राम जी क़ानून में 125 दिन रोजगार देने की घोषणा जुमला लगती है क्योंकि इसमें कुल बजट का 40 फीसदी राज्यों पर डाल दिया गया है। राज्य पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।
ऐसी हालात में ग्रामीण मजदूरों के बीच रोजगार संकट और बढ़ जायेगा तथा उनका पलायन भी बढ़ जायेगा। काम करते समय किसी प्रकार की दुर्घटना होने पर उनको मुआवजा की भी कोई गारंटी नहीं रहेगी। संसद में वित्त मंत्री की ओर से पेश बजट में परमानेंट रोजगार की कोई व्यवस्था नहीं है। ग्रामीण विकास हेतु बजट में बढ़ोतरी की जरुरत है। शिक्षा, स्वास्थ्य पर भी बजट बढ़ाया जाना चाहिए।
यूनियन की मांग है कि मनरेगा को तुरंत बहाल किया जाए। ग्रामीण मजदूरों को रोजगार देने हेतु बजट आवंटन बढ़ा कर तीन लाख करोड़ रुपये किया जाए। ग्रामीण मजदूरों को साल में 200 दिन रोजगार तथा मनरेगा में बकाया मजदूरी का भुगतान तुरंत कराया जाए। वी बी जी राम जी क़ानून पर तत्काल रोक लगाई जाए।
केंद्र सरकार के बजट में कृषि, ग्रामीण विकास, दलित विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य व वी बी जी राम जी आदि हेतु बजट आवंटन बढाकर कम से कम दो गुना किया जाए। परमानेंट रोजगार दिया जाए, ठेका प्रथा पर रोक लगाई जाए। ज्ञापन सौंपने वालो मे जिला सचिव बच्चा लाल, रामचंद्र, महेंद्र सिंह, भरत लाल, सतीश कुमार आदि लोग रहे।