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जन्म से नहीं थी एक आंख, हादसे ने दूसरी ले ली! मेहनत कर बने बैंक में डिप्टी मैनेजर, फिर इस जर्मन खेल के महारथी

Admin by Admin
January 17, 2026
in खेल
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जन्म से नहीं थी एक आंख, हादसे ने दूसरी ले ली! मेहनत कर बने बैंक में डिप्टी मैनेजर, फिर इस जर्मन खेल के महारथी
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Last Updated:January 17, 2026, 12:32 IST

Sonu Singh Captain Bihar Goalball Team: साल 2023 में आयोजित पहले खेलो इंडिया पैरा गेम्स में सोनू सिंह ने डिस्कस थ्रो में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर बिहार का नाम रोशन किया. इसके अलावा कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में वे गोल्ड मेडल भी जीत चुके हैं.

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मोतिहारी के सोनू सिंह की कहानी जज़्बे, मेहनत और कभी न हार मानने वाले हौसले की मिसाल है. जन्म से ही उनकी एक आंख की रोशनी नहीं थी. वहीं 2004 में हाथ वाले पंखे से लगे झटके ने दूसरी आंख की रोशनी भी छीन ली. कई जगह इलाज कराया गया, दिल्ली एम्स में ऑपरेशन के बाद कुछ समय के लिए रोशनी लौटी, लेकिन गरीबी और खेतों में काम करने के दौरान लगी चोट के कारण वह रोशनी भी हमेशा के लिए चली गई.
दृष्टिबाधित होने के बावजूद सोनू सिंह ने हार नहीं मानी.

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पढ़ाई को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया और मोतिहारी से निकलकर दिल्ली पहुंचे. उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने के साथ ही हिंदी और संस्कृत में डबल एमए की डिग्री हासिल की. इसके बाद बीएड की पढ़ाई भी पूरी की और अपने लिए एक मजबूत करियर की नींव रखी. आज सोनू सिंह नोएडा स्थित पंजाब नेशनल बैंक में डिप्टी मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं. बैंकिंग के काम में वे मोबाइल और कंप्यूटर पर स्क्रीन रीडिंग सॉफ्टवेयर की मदद लेते हैं और अपना काम करते हैं.

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नौकरी के साथ-साथ सोनू अंतरराष्ट्रीय स्तर के पैरा एथलीट भी हैं. ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने शॉट पुट खेलना शुरू किया और अब तक चार बार इंटरनेशनल चैंपियन रह चुके हैं. वे सात अलग-अलग देशों में मुकाबले खेल चुके हैं और दो बार वर्ल्ड चैंपियनशिप और तीन बार पारा एशियन गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं.

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साल 2023 में आयोजित पहले खेलो इंडिया पैरा गेम्स में सोनू सिंह ने डिस्कस थ्रो में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर बिहार का नाम रोशन किया. इसके अलावा कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में वे गोल्ड मेडल भी जीत चुके हैं. एथलेटिक्स के साथ-साथ सोनू सिंह गोलबॉल के भी मंजे हुए खिलाड़ी हैं. बिहार में पहली बार आयोजित नेशनल गोलबॉल चैंपियनशिप में बिहार टीम के वे कप्तान रह चुके हैं. पिछले साल से वे टीम की कमान संभाल रहे हैं. बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर उनका चयन नेशनल कैंप के लिए भी हुआ था, लेकिन इंजरी के कारण वे उसमें शामिल नहीं हो सके. अब उनकी नजर 2026 में टोक्यो में होने वाले एशियन गेम्स पर है.

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सोनू अबतक दुबई, साउथ कोरिया, इंडोनेशिया सहित कई देशों में मुकाबला खेलते हुए जीत दर्ज कर चुके हैं. इनके परिवार में पिता जी, बड़ा भाई और बहनें हैं. भाई और पिताजी गांव में ही रहते हैं जबकि सोनू अपने परिवार के साथ नोएडा में रहते हैं. सोनू की शादी 2020 में हुई. इनका पत्नी प्रियंका सिंह भी दृष्टिबाधित हैं और वहीं स्टेट बैंक में कार्यरत हैं. इनका एक बेटा भी है.

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नौकरी और खेल दोनों को संतुलित करना सोनू के लिए आसान नहीं है, लेकिन वे रोज सुबह और ड्यूटी के बाद शाम में और फिर शनिवार और रविवार को रेगुलर अभ्यास करते हैं. लोकल 18 से बातचीत में उन्होंने कहा कि अब बिहार सरकार खेल के क्षेत्र में काफी काम कर रही है. नई पीढ़ी को पहले जैसी कठिनाइयों का सामना न करना पड़े. इसके लिए जागरूकता की विशेष जरूरत है साथ है और अधिक काम करने की जरूरत है.

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गोलबॉल खेल के इतिहास पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि इसकी शुरुआत दूसरे विश्वयुद्ध के बाद जर्मनी में घायल और दृष्टिबाधित सैनिकों को सक्रिय रखने के लिए हुई थी. आज यह खेल पैरालिंपिक और पैरा एशियन गेम्स का हिस्सा है. बिहार में पिछले तीन साल से गोलबॉल खेला जा रहा है. इसमें घंटी लगी गेंद के जरिए गोल किए जाते हैं और खिलाड़ियों के आंखों पर पट्टी लगी रहती है. खिलाड़ी पूरी तरह आवाज और एकाग्रता के सहारे गोल करते हैं.

First Published :

January 17, 2026, 11:36 IST

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दोनों आंखों से नेत्रहीन, फिर भी नहीं मानी हार, बने इस जर्मन खेल के महारथी



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