रेणुकूट/सोनभद्र. @अमिताभ मिश्रा……
— गांधी मैदान में उमड़ा जनसैलाब, वीर नायकों के गौरवशाली इतिहास को सामने लाने पर जोर

स्थानीय गांधी मैदान में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन में इतिहास, राष्ट्रबोध और सामाजिक एकता को लेकर ओजस्वी विचार रखे गए। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री अम्बरीश जी ने कहा कि देश के इतिहास को जिस तरह पढ़ाया गया, उसमें बार-बार पराजय का भाव दिखाया गया, जबकि हमारे वीर राजाओं और योद्धाओं के शौर्य, त्याग और बलिदान को अपेक्षित स्थान नहीं मिला।
उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज, महाराणा प्रताप, बंदा बैरागी जैसे महान योद्धाओं के संघर्ष और विजय गाथाएं नई पीढ़ी तक पहुंचना आवश्यक हैं, ताकि आत्मगौरव और आत्मविश्वास का निर्माण हो सके।
अम्बरीश जी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत के इतिहास को समझने के लिए हिंदू समाज के योगदान और उसके मूल्यों को जानना जरूरी है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि यदि देश को विश्व के सर्वोच्च शिखर पर पहुंचाना है, तो समाज को एकजुट होकर सर्वोच्च मूल्यों को अपनाना होगा।

उन्होंने यह भी कहा कि केवल गणनाएं करने वाले इतिहास नहीं बनाते, बल्कि स्थापित धारणाओं के विपरीत चलने वाले ही इतिहास रचते हैं। भारत की प्रत्येक जाति और समाज में योद्धा पैदा हुए हैं, जिन्होंने देश की रक्षा और सम्मान के लिए संघर्ष किया है।
अपने वक्तव्य में उन्होंने विभाजन का संदर्भ देते हुए कहा कि पाकिस्तान उन लोगों के लिए बना था, जिन्होंने ‘वंदे मातरम्’ कहने से इनकार किया, लेकिन आज भी कुछ लोग भारत में रहते हुए राष्ट्रीय भावनाओं से दूरी बनाए रखते हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत में रहकर बाबर और राम को एक ही तराजू पर तौलने की मानसिकता स्वीकार्य नहीं हो सकती।
कार्यक्रम की शुरुआत दुद्धी स्थित मां सरस्वती शिक्षा निकेतन से आई दो छात्राओं द्वारा संक्षिप्त एवं सुंदर रामकथा के प्रस्तुतीकरण से हुई, जिसने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम में संत मनीषानंद शनि महाराज, विभाग संघचालक पुनीत लाल जी, गोपाल सिंह, राम मंदिर पाटी के पुजारी द्वारिका प्रसाद, जिला प्रचारक योगेश जी, शिक्षिका शालिनी गुप्ता, नंदलाल गुप्ता, चाँदप्रकाश जैन, राकेश पाण्डेय, दिग्विजय सिंह, हरिराम शाह, आशुतोष पाण्डेय सहित बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी और आम नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत वातावरण रहा और लोगों ने एकजुट होकर सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा का संकल्प लिया।
विराट हिंदू सम्मेलन के माध्यम से वक्ताओं ने यह संदेश दिया कि इतिहास के गौरवशाली अध्यायों को सामने लाकर ही समाज में आत्मसम्मान और एकता को मजबूत किया जा सकता है।