नई दिल्ली. आजादी का अमृत महोत्सव और सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती वर्षगांठ के अवसर पर युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के MY भारत प्लेटफ़ॉर्म की ओर से नेशनल पदयात्रा Sardar@150 Unity March की शुरुआत 26 नवंबर को गुजरात के वल्लभ विद्यानगर के शास्त्री मैदान से होगी. यह दिन पूरे देश में संविधान दिवस के रूप में मनाया जाता है, जिससे कार्यक्रम का महत्व और बढ़ जाता है.
इस राष्ट्रीय पदयात्रा को युवा एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा, केंद्रीय और राज्य मंत्रियों, वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों, सामाजिक क्षेत्र की जानी-मानी हस्तियों, पूर्व खिलाड़ियों तथा पैरालंपिक पदक विजेताओं की मौजूदगी में झंडी दिखाकर रवाना किया जाएगा.बड़ी संख्या में MY भारत के स्वयंसेवक और युवा पदयात्रा में हिस्सा लेंगे.
यह पदयात्रा 26 नवंबर से 6 दिसंबर तक कुल 11 दिनों में लगभग 180 किलोमीटर की दूरी तय करेगी. यात्रा वल्लभ विद्यानगर से शुरू होकर स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, केवड़िया पर राष्ट्रव्यापी समारोह के साथ संपन्न होगी, जहां प्रतिभागी लौह पुरुष सरदार पटेल को सामूहिक श्रद्धांजलि देंगे.
पहले दिन का रूट सरदार पटेल विश्वविद्यालय, शहीद चौक, भाईकाका सर्कल, टाउन हॉल सर्कल होते हुए नवली तक रहेगा. शाम को स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुतियाँ और युवाओं के साथ संवाद का कार्यक्रम होगा.
देशभर में पहले से बना माहौल,जनभागीदारी प्रभावशाली
इस पदयात्रा को लेकर पूरे देश में पिछले कई हफ्तों से माहौल तैयार हो रहा है. मंत्रालय के अनुसार 780 में से 613 जिलों में अब तक अभियान
431 लोकसभा क्षेत्रों में गतिविधियां
1,422 पदयात्राएं पहले ही आयोजित
कुल 7,200 किमी की यात्रा
14 लाख 30 हजार से अधिक नागरिकों की भागीदारी
इतनी बड़ी संख्या यह संकेत देती है कि युवाओं में राष्ट्रीय एकता और राष्ट्रनिर्माण को लेकर मजबूत उत्साह है.
150 थीमैटिक स्टॉप्स – इतिहास से सीख, आज पर फोकस
यात्रा मार्ग पर 150 थीमैटिक पड़ाव बनाए गए हैं.यहां सरकारी योजनाओं की प्रदर्शनी
स्वच्छता अभियान
ग्राम सभाएं
‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान
स्थानीय कला और शिल्प का प्रदर्शन
महिला स्वयं सहायता समूहों के स्टॉल
हर शाम सरदार गाथा के जरिए युवाओं को सरदार पटेल के संघर्ष और नेतृत्व की प्रेरक कहानियां सुनाई जाएंगी, ताकि उनकी सोच में नागरिक दायित्वों के प्रति जागरूकता बढ़े.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर प्रतिभागियों को:
खादी पहनने के लिए प्रेरित किया जाएगा.
स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को समर्थन मिलेगा.
आत्मनिर्भर भारत और एक भारत श्रेष्ठ भारत का विचार मजबूत किया जाएगा.
इससे न सिर्फ ऐतिहासिक विरासत को सम्मान मिलेगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा.

