Koneru Humpy Exclusive Interview: भारत की दिग्गज ग्रैंडमास्टर कोनेरू हम्पी ने खुलासा किया है कि वो कुछ साल पहले चेस से संन्यास लेने का फैसला कर चुकी थीं. लगातार हार, खराब फॉर्म और पारिवारिक दूरियों ने उन्हें तोड़ दिया था. लेकिन न्यूयॉर्क में वर्ल्ड रैपिड चैंपियनशिप जीतने के उस एक पल ने सब कुछ बदल दिया, उनके करियर से लेकर जिंदगी तक.
फर्स्टपोस्ट को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में हम्पी ने बताया कि कैसे उस खिताब ने उन्हें “फिर से जीने” की वजह दी. वह कहती हैं, “मैं तो छोड़ने वाली थी, लेकिन वो जीत मेरे लिए पुनर्जन्म जैसी थी. उस पल ने मुझे साबित करने का मौका दिया कि मैं अब भी बेहतर कर सकती हूं.”
संन्यास का बना लिया था मन, लेकिन…
हम्पी ने बताया कि 2023-24 के खराब दौर ने उन्हें गहरी निराशा में डाल दिया था. उन्होंने कहा, “मैं कई टूर्नामेंट में बुरी तरह हार रही थी- नॉर्वे, टाटा स्टील, सब जगह नतीजे खराब थे. मैं बेटी और घर से दूर थी और मुझे लग रहा था कि अब वक्त खत्म हो गया है.” लेकिन तभी उन्होंने खुद से कहा, “अगर छोड़ना भी है, तो आखिरी बार खुद को साबित करूं.” उसी ‘आग’ ने उन्हें वर्ल्ड रैपिड टाइटल तक पहुंचा दिया और यही पल उनकी वापसी की शुरुआत बना.

हम्पी कहती हैं कि अब वो नतीजों के बजाय यात्रा का मज़ा लेना सीख चुकी हैं. (फोटो FIDE)
रैपिड वर्ल्ड टाइटल ने फिर जगा दी उम्मीद
हम्पी की न्यूयॉर्क में ऐतिहासिक जीत ने न सिर्फ उन्हें दुनिया की दूसरी महिला खिलाड़ी बनाया, जिसने यह खिताब एक से अधिक बार जीता, बल्कि उनके करियर को नई दिशा भी दी. उन्होंने मुस्कराते हुए कहा, “अगर वो जीत नहीं होती, तो शायद आज मैं प्रोफेशनल चेस में नहीं होती.” वो बताती हैं, “उस जीत ने मुझे भरोसा दिया कि अभी बहुत कुछ बाकी है. मैं सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी के लिए भी खेल रही हूं.”
भारतीय महिला चेस का ‘गोल्डन ईयर’
‘अनुभव और जोश दोनों जरूरी’

हम्पी ने बताया कि 2023-24 के खराब दौर ने उन्हें गहरी निराशा में डाल दिया था. (फोटो FIDE)
अब नजर GCL और वर्ल्ड ब्लिट्ज पर
‘अब मैं सिर्फ खेल का आनंद लेना चाहती हूं’
हम्पी कहती हैं कि अब वो नतीजों के बजाय यात्रा का मज़ा लेना सीख चुकी हैं. उन्होंने कहा, “अब मैं टारगेट नहीं बनाती. बस हर मूव में बेहतर होने की कोशिश करती हूं. अगर जीत मिली तो अच्छा, नहीं तो सीख मिलती है.” उनके मुताबिक, “रैपिड टाइटल ने मुझे सिखाया कि असली जीत तब होती है जब आप हार मानने से इंकार कर देते हैं.”
