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DNA से 200 साल बाद खुला नेपोलियन की सेना का राज! सैनिकों को ठंड नहीं, बीमारियों ने मारा

Admin by Admin
October 27, 2025
in खेल
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DNA से 200 साल बाद खुला नेपोलियन की सेना का राज! सैनिकों को ठंड नहीं, बीमारियों ने मारा
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साल था 1812. यूरोप का सबसे ताकतवर आदमी, नेपोलियन बोनापार्ट. रूस फतह करने निकला था. उसके साथ थी लगभग 5 लाख सैनिकों की विशाल सेना, जिसे ग्रांदे आर्मी कहा जाता था. लेकिन जब यह सेना रूस से वापस लौटी, तो करीब 3 लाख सैनिक रास्ते में ही मारे गए. इतिहास की किताबों में लिखा गया कि ये सब ठंड, भूख और थकान से मरे.

अब, 200 साल बाद वैज्ञानिकों ने उन मौतों के पीछे की एक नई सच्चाई खोज निकाली है. लिथुआनिया की राजधानी विलनियस में मिली एक सामूहिक कब्र से निकले DNA ने उस वक्त की तबाही की असली वजह बताई है.

पुरानी कब्र से निकला नया सबूत
विलनियस में 2001 में एक जगह खुदाई के दौरान नेपोलियन की सेना के 2000 से 3000 सैनिकों के अवशेष मिले थे. इन्हीं में से 13 सैनिकों के दांतों से DNA निकाला गया. और जो सामने आया, उसने वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया.

पेरिस के इंस्टिट्यूट पास्चर के वैज्ञानिक निकोलस रास्कोवान की टीम ने पाया कि इन सैनिकों में दो ऐसी बीमारियों के बैक्टीरिया थे, जिनका अब तक इस घटना से कोई ज़िक्र नहीं था– पैराटायफॉयड फीवर. यानि सैनिक सिर्फ ठंड और भूख से नहीं, बल्कि बीमारियों के हमले से भी मरे थे.

कैसी थीं ये बीमारियां?
पैराटायफॉयड फीवर आमतौर पर गंदे पानी या खराब खाने से फैलती है. इसमें तेज बुखार, सिरदर्द, पेट दर्द, दस्त या कब्ज और शरीर में कमजोरी जैसे लक्षण होते हैं.

वहीं रिलैप्सिंग फीवर जुओं से फैलती है. इसमें बुखार बार-बार आता है, साथ में सिर और बदन दर्द भी होता है. उस वक्त सैनिक ठंड में महीनों तक एक ही कपड़ों में रहते थे, इसलिए जुएं और संक्रमण फैलने का खतरा और बढ़ गया. 13 सैनिकों में से 4 के शरीर में पैराटायफॉयड के और 2 में रिलैप्सिंग फीवर के बैक्टीरिया मिले.

पहले भी मिली थीं बीमारियों के सबूत
इससे पहले 2006 में इसी कब्रिस्तान से निकले 35 सैनिकों के DNA की जांच में टायफस (Typhus) और ट्रेंच फीवर (Trench Fever) जैसी बीमारियों के निशान मिले थे.

अब, इन नई खोजों से पता चलता है कि नेपोलियन की सेना किसी एक बीमारी से नहीं, बल्कि कई संक्रामक बीमारियों के घेरे में थी. ये बीमारियां भूख, ठंड और थकावट से कमजोर हुए सैनिकों को और भी असहाय बना रही थीं.

रूस से वापसी बनी मौत की यात्रा
नेपोलियन की सेना ने 1812 में रूस पर हमला किया था. वे मास्को तक पहुंच गए थे, लेकिन रूसी सेना के पलटवार, सर्दी और सप्लाई खत्म हो जाने से हालात बिगड़ गए.

सैनिकों के पास खाने को कुछ नहीं था, ठंड इतनी कि लोग जमकर गिर पड़ते थे. ऊपर से बीमारियों ने उनका बचा-खुचा दम निकाल दिया. नेपोलियन को पीछे हटना पड़ा, और ये अभियान उसके पतन की शुरुआत बन गया.

DNA टेक्नॉलजी से इतिहास की नई परतें खुलीं
वैज्ञानिक निकोलस रास्कोवान कहते हैं, “पुराना DNA हमें वो बातें बताता है, जो सिर्फ इतिहास की किताबों से नहीं समझी जा सकतीं. इससे हमें पता चलता है कि कौन सी बीमारियां थीं, कैसे फैलीं और उन्होंने इतिहास की दिशा कैसे बदली.”

इस रिसर्च से ये साफ हुआ कि 1812 की वो हार सिर्फ ठंड या भूख की नहीं थी, बल्कि बीमारियों की जंग भी थी. नेपोलियन की सेना बंदूकों से नहीं, बैक्टीरिया से हार गई थी.



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