बीजपुर/सोनभद्र (रामबली मिश्रा)……

बाजार के सब्जी मंडी में शानिवार को मध्यप्रदेश से आए रामलीला मण्डल नीलकंठ धाम मैहार के संचालक अश्वनी प्रसाद पाठक जी ने बताया की रावण का जन्म त्रेतायुग में ऋषि विश्रवा और राक्षस राजकुमारी कैकसी के यहां हुआ कैकसी के पिता सुमाली के कहने पर उसने विश्र्वा से विवाह किया था पौराणिक कथाओं के अनुसार रावण और कुंभकरण जय विजय के दूसरे जन्म थे जब भगवान विष्णु के दो द्वारपाल थे और जिन्हें भगवान विष्णु के क्रोध के कारण पृथ्वी पर जन्म लेना पड़ा था नामकरण और शिव भक्ति जब कैकसी ने ऋषि विशेषर्व से विवाह किया तो बिशरवा ने कहा था कि उनका पहला बच्चा क्रूर और राक्षसी प्रवृत्ति वाला होगा इसके बाद कैकसी के पहले पुत्र रावण ने असहनीय पीड़ा में भी शिव तांडव स्त्रोत का पाठ किया और अपने भक्ति से साबित करके शिव को प्रसन्न किया। विभिन्न कलाकारो ने रामलीला का अभिनव कर मौजूद दर्शको को मंत्रमुग्ध कर दिया।