मधुपुर/सोनभद्र (मुकेश द्विवेदी)…….

__वशिष्ठ इंटरप्राइजेज की खदान में पेटीदार अनूप केसरी की मौत, आदिशक्ति फर्म पर भी उठे सवाल
सुकृत क्षेत्र के वशिष्ठ इंटरप्राइजेज खदान में बीते 12 सितंबर को खदान में लापरवाही में ब्लास्टिंग के दौरान दो लोग घायल हुए थे जिनमें घायल एक पेटीदार का इलाज वाराणसी ट्रामा सेंटर में चल रहा था, आज सुबह इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
घायल हुए पेटीदार अनूप केसरी पुत्र मोहन केसरी, निवासी सुकृत ने आज सुबह करीब 10 बजे इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। उनकी मौत से परिजनों में कोहराम मच गया है और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है।

हादसा और मौत:
कुछ दिन पहले वशिष्ठ इंटरप्राइजेज की खदान में ब्लास्टिंग के दौरान दो लोग घायल हुए थे। अनूप केसरी की हालत गंभीर थी और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। लगातार इलाज के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
आदिशक्ति फर्म पर आरोप:
ग्रामीणों का आरोप है कि हादसे के पीछे केवल खदान संचालक ही नहीं बल्कि आदिशक्ति फर्म भी जिम्मेदार है, जो बिना मानक और गैर-कानूनी तरीके से बारूद की सप्लाई करती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मानकविहीन और असुरक्षित विस्फोटक सामग्री के चलते अक्सर ब्लास्टिंग अनियंत्रित हो जाती है, और इसी वजह से मजदूर व पेटीदार हादसों का शिकार होते हैं।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी:
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि ब्लास्टिंग के समय न तो प्रशिक्षित ब्लास्टर मौजूद था और न ही मजदूरों को कोई सुरक्षा उपकरण दिए गए थे। आरोप है कि बारूद सप्लाई करने वाले लोग ही मजदूरों और पेटीदारों व मजदूरों से जबरन ब्लास्टिंग करवा देते हैं, जिससे आए दिन जानलेवा घटनाएँ सामने आती हैं।
ग्रामीणों और परिजनों का आक्रोश :
अनूप केसरी की मौत के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। परिजनों ने शासन से पीड़ित परिवार को मुआवज़ा देने और वशिष्ठ इंटरप्राइजेज खदान संचालक व आदिशक्ति फर्म दोनों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर जिम्मेदारों पर कठोर कदम नहीं उठाए गए तो वे आंदोलन करेंगे।
प्रशासन पर सवाल :
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन और पुलिस की मिलीभगत के कारण खदानों में बिना मानक विस्फोटक का इस्तेमाल हो रहा है। हर हादसे के बाद जांच की बात कही जाती है लेकिन आज तक किसी बड़े संचालक या सप्लायर पर कार्रवाई नहीं हुई। इस बार भी केवल खानापूर्ति होने की आशंका जताई जा रही है।
फिलहाल प्रशासन ने मामले की जांच शुरू करने का दावा किया है, लेकिन मजदूरों और ग्रामीणों में गुस्सा और डर दोनों ही साफ झलक रहा है।