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UP Political News. उत्तर प्रदेश की सियासत में कानून-व्यवस्था और धार्मिक त्योहारों को लेकर सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव के बयान पर नया विवाद खड़ा हो गया है. बरेली के मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने…और पढ़ें
मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी बरेली मुस्लिमधर्मगुरुमौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने अपना एक वीडियो जारी कर अखिलेश यादव को सीधा निशाने पर लिया. उन्होंने कहा कि अखिलेश सरकार में हालात इतने खराब थे कि शाम 7 बजे के बाद महिलाएं सड़क पर अकेले निकलने से डरती थीं. उस दौर में गुंडागर्दी, जमीनों पर कब्जे और महिलाओं से छेड़छाड़ जैसी घटनाएं आम थीं.
मौलाना ने दावा किया कि मौजूदा सरकार में हालात पूरी तरह बदल गए हैं. अब महिलाएं रात 1 बजे तक भी बिना किसी डर के सड़कों पर निकल सकती हैं. उन्होंने कहा कि अब कोई ताकतवर व्यक्ति गरीब पर अत्याचार नहीं कर सकता और न ही किसी की जमीन पर कब्जा करने की हिम्मत करता है.
अब कानून सबके लिए बराबर
त्योहारों में अमन-शांति की मिसाल
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने अखिलेश सरकार और मौजूदा सरकार की तुलना करते हुए कहा कि पिछले 8 वर्षों में प्रदेश में हर धर्म के त्योहार शांतिपूर्ण माहौल में सम्पन्न हुए हैं. चाहे कांवड़ यात्रा हो, मोहर्रम के जुलूस हों या ईद-मिलाद-उन-नबी, हर आयोजन शांति और आपसी भाईचारे के साथ पूरा हुआ है. उन्होंने कहा कि अखिलेश के दौर में हर महीने कहीं न कहीं साम्प्रदायिक दंगा होता था और हालात काबू में करने के लिए कर्फ्यू लगाना पड़ता था. इसकी सबसे बड़ी मिसाल मुजफ्फरनगर दंगे हैं. जबकि मौजूदा सरकार में बीते 8 सालों में किसी भी शहर में कर्फ्यू लगाने की नौबत नहीं आई.
अखिलेश अपने शासनकाल पर झांकें
मौलाना ने अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए कहा कि वे आठ साल से कानून-व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि उन्हें पहले अपने शासनकाल के हालात पर गौर करना चाहिए. उनके मुताबिक, सपा सरकार में एक नहीं बल्कि पर्दे के पीछे तीन-तीन मुख्यमंत्री राज्य चलाते थे, जिनके आदेशों पर पूरा तंत्र काम करता था. उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार में हालात बिल्कुल उलट हैं. कहीं भी कोई घटना होती है तो पुलिस और प्रशासन तुरंत सक्रिय हो जाते हैं, जिसकी वजह से प्रदेश में कानून-व्यवस्था कायम है. मौलाना शहाबुद्दीन रजवी के इस बयान ने उत्तर प्रदेश की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है. जहां अखिलेश यादव लगातार सरकार पर कानून-व्यवस्था के नाम पर हमला बोलते रहे हैं, वहीं मौलाना ने उनके ही शासनकाल को अराजकता का प्रतीक बताते हुए मौजूदा सरकार को बेहतर करार दिया है.

