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Barmer Sushila Success Stoty: राजस्थान के रेगिस्तान से निकली एक बेटी ने अपने संघर्ष और मेहनत से वो कर दिखाया है जिसकी कल्पना करना भी आसान नहीं होता है. साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाली सुशीला ने कभी बकरियां ब…और पढ़ें
साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाली सुशीला ने कभी बकरियां बेचकर अपनी पहली रग्बी किट खरीदी थी. आज वही सुशीला चीन में होने वाले एशिया कप में भारत का प्रतिनिधित्व कर रही है. सुशीला 9 सितंबर को टीम के साथ कोलकता से एशिया कप के लिए रवाना हुई है.
चीन के हुतहुत में 13-14 सितंबर को अंडर -18 गर्ल्स रग्बी टूर्नामेंट आयोजित किया जाएगा. सुशीला की माता बाली देवी गृहणी हैं जबकि पिता गणेश कुमार खेती बाड़ी करते हैं.रग्बी जैसे खेल में शारीरिक फिटनेस और लगातार अभ्यास बेहद जरूरी होता है. सुशीला ने धोरों और रेतीले मैदानों में घंटों पसीना बहाकर खुद को तैयार किया है. सुशीला के परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है. खेल के लिए जरूरी किट और ट्रेनिंग का खर्च उठाना आसान नहीं था, लेकिन हार मानने के बजाय उसने हौसले को चुना. सुशीला बताती हैं कि बकरियां बेचकर जुटाए पैसों से उसने रग्बी किट खरीदी और मैदान पर उतरने का सपना पूरा किया है. अब चीन में होने वाले एशिया कप में भारतीय टीम से अपना दमखम दिखाएगी.
रग्बी टीम में होते हैं 12 खिलाड़ी
रग्बी फुटबॉल एक अंडाकार गेंद से खेला जाने वाला टीम खेल है, जहां दो टीमें प्रतिद्वंद्वी की गोल लाइन पर गेंद को पहुंचाकर अंक अर्जित करते हैं. इसमें खिलाड़ी गेंद को हाथों से पकड़ कर पास कर या आगे दौड़ कर आगे बढ़ाते हैं. इस खेल में कुल 12 खिलाड़ी होते हैं. इसमें 5 रिजर्व खिलाड़ी रहते हैं. 7 खिलाड़ी ही मैदान में खेलते हैं.

