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लखनऊ की रात होगी खास, आज आसमान में दिखेगा खून जैसा लाल चांद, इस समय कर सकेंगे दीदार

Admin by Admin
September 7, 2025
in उत्तर प्रदेश
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लखनऊ की रात होगी खास, आज आसमान में दिखेगा खून जैसा लाल चांद, इस समय कर सकेंगे दीदार
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Chandra Grahan Timing in Lucknow: इस साल का सबसे बड़ा खगोलीय नजारा यानी पूर्ण चंद्र ग्रहण (Blood Moon) आज 7 सितंबर को दिखाई देने वाला है. आइये जानते हैं यूपी में पूर्ण चंद्र ग्रहण का ये नजारा लखनऊ में दिखाई देगा या नहीं और शहर में सूतक कितने से कितने समय तक रहेगा.

चंद्र ग्रहण का यह दृश्य भारत के लगभग हर बड़े शहर में देखने को मिलेगा. उत्तर भारत में ये दिल्ली, लखनऊ,चंडीगढ़, जयपुर, में दिखेगा तो पश्चिम भारत में मुंबई, पुणे, अहमदाबाद, और दक्षिण भारत में चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद, कोच्चि में दिखेगा. इसके अलावा पूर्वी भारत में कोलकाता, भुवनेश्वर, गुवाहटी और मध्य भारत में भोपाल, नागपुर, रायपुर में दिखाई देगा.

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बताया जा रहा है कि लखनऊ में चंद्र ग्रहण 7 सितंबर 2025 की रात 9 बजकर 58 मिनट पर लगना शुरू होगा और इसकी समाप्ति देर रात 1 बजकर 26 मिनट पर होगी. ग्रहण से 9 घंटे पहले शुरू हुए सूतक काल की वजह से लखनऊ में स्थित मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए हैं. चंद्रमा का धरती की उपच्छाया में पहला स्पर्श रात 8 बजकर 59 मिनट पर होगा और प्रच्छाया में पहला स्पर्श रात 9 बजकर 58 मिनट पर होगा. तो वहीं उपच्छाया में अंतिम स्पर्श देर रात 2 बजकर 24 मिनट पर होगा. चंद्र ग्रहण का सूतक दोपहर 12 बजकर 10 मिनट पर लग गया है.

Chandra Grahan Timing: भोपाल, इंदौर, रायपुर में इस समय दिखेगा चंद्र ग्रहण, मंदिरों पट हो जाएंगे बंद

चंद्रग्रहण के दौरान मंदिरों के कपाट क्यों बंद होते हैं?
हिंदू धर्म में ग्रहण के समय को अशुद्ध काल माना जाता है, जिसे सूतक काल कहा जाता है. मान्यता है कि इस दौरान राहु और केतु जैसे छाया ग्रह चंद्रमा (या सूर्य) पर प्रभाव डालते हैं, जिससे नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है. इसी कारण मंदिरों के कपाट ग्रहण की अवधि में बंद कर दिए जाते हैं ताकि इस अशुद्ध ऊर्जा का प्रभाव मंदिर की पवित्रता और भगवान की मूर्तियों पर न पड़े. ग्रहण के दौरान भगवान को न तो छुआ जाता है, न भोग लगाया जाता है और न ही आरती की जाती है. इसलिए परंपरागत रूप से मंदिरों के कपाट ग्रहण शुरू होने से पहले बंद कर दिए जाते हैं और ग्रहण समाप्ति के बाद शुद्धिकरण (स्नान, मंत्रोच्चार, जल से शुद्धि) के बाद ही खोले जाते हैं.

कब बनता है ब्लड मून
वैज्ञानिकों के अनुसार, ब्लड मून तब बनता है जब सूर्य की रोशनी पृथ्वी के वायुमंडल से होकर गुजरती है और चंद्रमा तक पहुंचती है. इस दौरान नीली रोशनी बिखर जाती है और लालिमा चांद पर पड़ती है. यही कारण है कि ग्रहण के दौरान चंद्रमा लाल, नारंगी और तांबे जैसा दिखता है. यह पूरी तरह सुरक्षित खगोलीय घटना है और इसे बिना किसी उपकरण के भी देखा जा सकता है, बशर्ते आसमान साफ हो.



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