संवाददाता@संदीप अग्रहरी….

सोनभद्र के म्योरपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत कुंडाडीह में रविवार को आदिवासी समाज की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक मंगला प्रसाद के आवास पर हुई, जिसकी अध्यक्षता बबई सिंह मरकाम ने की। बैठक में आदिवासी समाज के अधिकार, शिक्षा, जमीन संरक्षण, रोजगार, पंचायत चुनाव में आरक्षण और आदिवासी धर्म कोड समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई।
जल, जंगल और जमीन को लेकर उठी आवाज
बैठक में सलखन से पहुंचे दुर्गा प्रसाद पठारी ने कहा कि जल, जंगल और जमीन आदिवासी समाज के जीवन और अधिकार से जुड़ी है। उन्होंने समाज के लोगों से शिक्षा पर विशेष ध्यान देने और उच्च शिक्षा हासिल करने का आह्वान किया। साथ ही आदिवासी राष्ट्र घोषित करने की मांग को भी समाज के बीच रखा।
मंगला प्रसाद ने आदिवासी समाज के लोगों से अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने की अपील की। वहीं पनिका समाज के राधेश्याम पनिका ने आदिवासी समाज की जमीन को सुरक्षित और संरक्षित रखने का मुद्दा उठाया।

पंचायत चुनाव में 21 फीसदी आरक्षण की मांग
बैठक की अध्यक्षता कर रहे बबई सिंह मरकाम ने आगामी पंचायत चुनाव में 21 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की मांग रखी। उन्होंने आदिवासी धर्म कोड लागू करने के साथ पैसा एक्ट और पांचवीं, छठी व आठवीं अनुसूची को लागू किए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की खनिज संपदा पर आदिवासी समाज के अधिकार को सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
अडाणी कंपनी का विरोध, स्थानीय युवाओं के रोजगार का मुद्दा
बैठक का संचालन कर रहे अमर सिंह खरवार ने सोनभद्र जिले में स्थापित अडाणी कंपनी का कड़ा विरोध जताया। उन्होंने कहा कि सोनभद्र के आदिवासी समाज के लोग रोजगार की तलाश में पलायन कर दूसरे प्रदेशों में काम करने को मजबूर हैं। दूसरी ओर जिले में बड़े पैमाने पर औद्योगिक कंपनियां स्थापित हैं, जहां दूसरे प्रदेशों से आए लोग काम कर रहे हैं।
उन्होंने स्थानीय आदिवासी युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने और औद्योगिक इकाइयों में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता देने की जरूरत बताई।

कई पदाधिकारी और समाज के लोग रहे मौजूद
बैठक में बबई सिंह मरकाम, राधेश्याम पनिका, कृपाशंकर पनिका, रामरूप गोंड, मोहनलाल पनिका, अनुपम सिंह, रविन्द्र पनिका, तुलसी राम पनिका, देवशाह उरैती, रामलखन मरकाम और हरिप्रसाद सलवदी समेत खरवार महासभा के जिलाध्यक्ष अशोक खरवार मौजूद रहे। इसके अलावा विभिन्न आदिवासी संगठनों के पदाधिकारी और समाज के लोग भी बैठक में शामिल हुए।
बैठक के दौरान वक्ताओं ने आदिवासी समाज को संगठित होकर अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने, शिक्षा को बढ़ावा देने और जल, जंगल व जमीन के संरक्षण के लिए लगातार प्रयास करने पर जोर दिया।