सलखन संवाददाता@बद्रीप्रसाद…

वाराणसी-शक्तिनगर मुख्य राजमार्ग पर मारकुंडी घाटी से इंको प्वाइंट टोल प्लाजा तक भारी वाहनों की लंबी कतारें आमजन के लिए मुसीबत बन गई हैं। मध्यरात्रि से लगने वाले जाम के चलते छोटे वाहन, रोडवेज बसें, निजी बसें सहित एंबुलेंस के आवागमन में भी गंभीर परेशानी उत्पन्न हो रही है। आए दिन लगने वाले जाम से राहगीरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में ठोस पहल होती नजर नहीं आ रही है।

नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर वाहन स्वामियों ने आरोप लगाया कि खनन विभाग के संबंधित अधिकारी ओवरलोडिंग की जांच के नाम पर वाहनों का चालान कर रहे हैं, जबकि क्रेशर प्लांटों और बालू खदानों पर लोडिंग का निर्धारित मानक तय करने की मांग लंबे समय से अनसुनी की जा रही है। वाहन स्वामियों का कहना है कि जब लोडिंग की सीमा स्पष्ट रूप से निर्धारित नहीं है, तो ओवरलोडिंग के नाम पर कार्रवाई और चालान का पूरा दबाव वाहन मालिकों पर क्यों डाला जा रहा है?

उनका आरोप है कि खनन विभाग की इस कथित दोहरी नीति से वाहन स्वामी परेशान हैं। एक तरफ ओवरलोडिंग के नाम पर कार्रवाई का भय बना रहता है, तो दूसरी तरफ लोडिंग के स्पष्ट मानक के अभाव में विवाद और अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न होती है।

इसका खामियाजा अंततः सड़क पर सफर करने वाले आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है। भारी वाहनों की कतारों से राजमार्ग पर आवागमन प्रभावित होने के कारण यात्रियों का समय बर्बाद हो रहा है और जरूरी कार्यों से निकलने वाले लोगों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है।

सबसे गंभीर स्थिति तब बनती है, जब जाम के बीच एंबुलेंस जैसे आपातकालीन वाहनों के आवागमन में बाधा उत्पन्न होती है। ऐसे में संबंधित विभाग की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। वाहन स्वामियों ने मांग की है कि क्रेशर प्लांटों और बालू खदानों पर लोडिंग की स्पष्ट सीमा निर्धारित की जाए तथा नियमों का समान रूप से पालन सुनिश्चित कराया जाए।

अब सवाल यह है कि खनन विभाग केवल सड़क पर वाहनों की जांच और चालान तक अपनी कार्रवाई सीमित रखेगा या लोडिंग के मानकों को निर्धारित कर समस्या की जड़ पर भी कार्रवाई करेगा? संबंधित अधिकारियों को मामले का संज्ञान लेकर जाम की समस्या दूर करने, निष्पक्ष जांच व्यवस्था लागू करने और आम जनता को राहत दिलाने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है।