नई दिल्ली. भारतीय पैरा खेलों के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ चुका है. देश के पैरा खिलाड़ियों ने अपनी असाधारण मेहनत, अटूट संकल्प और खेल के प्रति समर्पण के दम पर एशियाई पैरा खेलों में अब तक का सबसे बेहतरीन और ऐतिहासिक प्रदर्शन करके दिखाया है. इन खेलों का समापन भारत के लिए बेहद गौरवशाली रहा, जहां भारतीय दल ने उम्मीदों से कहीं बढ़कर प्रदर्शन करते हुए कुल 114 पदक अपने नाम किए. इन पदकों में 30 स्वर्ण, 35 रजत और 49 कांस्य पदक शामिल हैं, जिन्होंने देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है.
इस बार भारत की तरफ से एशियाई पैरा खेलों में कुल 168 खिलाड़ियों का एक मजबूत दल भेजा गया था। गौर करने वाली बात यह है कि यह दल 2023 में हांगझोउ में हुए पिछले एशियाई पैरा खेलों के मुकाबले लगभग आधा था. इसके बावजूद, खिलाड़ियों के हौसले और जज्बे में कोई कमी नहीं आई. पिछले चरण यानी हांगझोउ में भारतीय खिलाड़ियों ने 27 स्वर्ण सहित कुल 108 पदक जीते थे, जो उस समय देश का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन माना गया था. लेकिन इस बार खिलाड़ियों ने अपने ही पिछले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए पदकों की संख्या और गुणवत्ता, दोनों मामलों में नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया है. अंतिम दिन के मुकाबलों के बाद पदक तालिका में भारत फिलहाल चौथे स्थान पर मजबूती से काबिज है. हालांकि, शनिवार को कुछ अन्य स्पर्धाओं के फाइनल मुकाबले होने बाकी हैं, लेकिन उन अंतिम स्पर्धाओं में भारत का कोई भी खिलाड़ी मैदान में नहीं उतर रहा है.
अभियान के आखिरी दिन ऐतिहासिक प्रदर्शन
भारतीय अभियान का समापन बेहद धमाकेदार अंदाज में हुआ. प्रतियोगिता के आखिरी दिन भारतीय खिलाड़ियों ने कुल 9 स्वर्ण पदक अपने नाम किए, जो इस पूरे चरण में किसी एक दिन आया भारत का सबसे बेहतरीन और सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है. ये स्वर्ण पदक तीरंदाजी, निशानेबाजी, बैडमिंटन और एथलेटिक्स जैसे प्रमुख खेलों में आए, जिन्होंने देश की झोली खुशियों से भर दी.
एथलेटिक्स का दबदबा और विश्व रिकॉर्ड की झड़ी
हमेशा की तरह एथलेटिक्स ने भारत की पदक तालिका को बढ़ाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई. इस स्पर्धा में भारतीय एथलीटों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 65 पदक जीते, जो 2023 के पिछले संस्करण के मुकाबले 12 पदक अधिक हैं. एथलेटिक्स के मैदान पर कई खिलाड़ियों ने अपनी अद्भुत प्रतिभा का लोहा मनवाया. संदीप और हनेई ने अपनी-अपनी स्पर्धाओं में विश्व रिकॉर्ड अपने नाम करते हुए देश के लिए स्वर्ण पदक जीते. संदीप ने पुरुषों की 400 मीटर टी64 स्पर्धा के फाइनल में महज 52.28 सेकंड का समय लेकर विश्व रिकॉर्ड बनाया और स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया. इसी स्पर्धा में उनके देश के साथी अजय कुमार ने 53.61 सेकंड का शानदार समय निकालकर खेलों के रिकॉर्ड के साथ कांस्य पदक हासिल किया.
दूसरी ओर, भाला फेंक (जैवलिन थ्रो) एफ37/38 के फाइनल मुकाबले में हनेई ने 60.49 मीटर का बेहतरीन और ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए विश्व रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता. मौजूदा पैरालंपिक और विश्व चैंपियन सुमित अंतिल ने भी अपनी बादशाहत बरकरार रखी. उन्होंने पुरुषों की भाला फेंक एफ42-44/61-64 संयुक्त स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए 72.46 मीटर का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया और देश के लिए एक और स्वर्ण पदक जीत लिया. इसी संयुक्त स्पर्धा में एफ42 वर्ग के खिलाड़ी महेंद्र गुर्जर ने 59.03 मीटर का थ्रो करते हुए रजत पदक अपने नाम किया, जबकि एफ44 वर्ग के संदीप संजय सरगर ने 64.48 मीटर दूर भाला फेंककर कांस्य पदक देश की झोली में डाला.
यहां यह जानना दिलचस्प है कि कम दूरी का थ्रो होने के बावजूद महेंद्र गुर्जर को रजत पदक मिला. दरअसल, ऐसी संयुक्त स्पर्धाओं में खिलाड़ियों की सही और निष्पक्ष रैंकिंग तय करने के लिए ‘आरएजेडए’ (RAZA) अंकों का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें महेंद्र को बढ़त हासिल हुई और इसी आधार पर उन्हें संदीप से ऊपर स्थान दिया गया. मैदान पर होने वाली भाला फेंक और चक्का फेंक जैसी स्पर्धाओं में खिलाड़ियों की भागीदारी बढ़ाने और मुकाबलों को और अधिक रोमांचक तथा प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए अक्सर एफ42, एफ44, एफ62 और एफ64 जैसे विभिन्न वर्गों को एक संयुक्त स्पर्धा में शामिल कर लिया जाता है. एफ42 और एफ44 वर्ग में वे खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं जिनके निचले अंगों में शारीरिक अक्षमता होती है और वे भाला फेंकने या दौड़ने के दौरान किसी कृत्रिम पैर का इस्तेमाल नहीं करते हैं. इसके विपरीत, एफ62 और एफ64 वर्ग में निचले अंगों की अक्षमता वाले वे खिलाड़ी प्रतिस्पर्धा करते हैं जो कृत्रिम पैर या पैरों के सहारे खड़े होकर मैदान पर खेलते हैं.
एथलेटिक्स के अन्य मुकाबलों में व्हीलचेयर का इस्तेमाल करने वाले प्रणव सूरमा ने पुरुषों की क्लब थ्रो स्पर्धा में 32.87 मीटर का शानदार प्रदर्शन करते हुए खेलों का नया रिकॉर्ड बनाया और भारत को दिन का आखिरी स्वर्ण पदक दिलाया. इसके अलावा, महिलाओं की लंबी कूद टी47 स्पर्धा में निमिषा चक्कुंगलपरम्बिल और पुरुषों की 1500 मीटर टी46 स्पर्धा में परमोद बिजारनिया ने बेहतरीन दौड़ लगाते हुए रजत पदक अपने नाम किए. परमोद ने 1500 मीटर की दौड़ को 4 मिनट 9.65 सेकंड के समय में पूरा किया.
बैडमिंटन खिलाड़ियों का स्वर्णिम दबदबा
शुक्रवार के दिन का एक और बड़ा आकर्षण पैरा बैडमिंटन रहा, जहां भारतीय खिलाड़ियों ने अपनी चमक बिखेरते हुए कुल तीन स्वर्ण पदक अपने नाम किए और खूब सुर्खियां बटोरीं. इन मुकाबलों में पेरिस पैरालंपिक के चैंपियन नितेश कुमार और प्रतियोगिता में पदार्पण कर रहे नवीन शिवकुमार के व्यक्तिगत वर्गों के स्वर्ण पदक विशेष रूप से उल्लेखनीय रहे. अनुभवी और प्रतिभावान 31 वर्षीय नितेश कुमार ने पुरुष एकल एसएल3 वर्ग के फाइनल में अपने ही देश के हमवतन और तोक्यो पैरालंपिक के स्वर्ण पदक विजेता प्रमोद भगत को 21-18, 21-16 से हराकर एकतरफा और शानदार जीत दर्ज की. इसके बाद नितेश ने तुलसीमति मुरुगेसन के साथ मिलकर मिश्रित युगल एसएल3-एसयू5 स्पर्धा में भी बेहतरीन खेल दिखाते हुए रजत पदक जीता.
इन खेलों में पहली बार शिरकत कर रहे युवा नवीन शिवकुमार ने पुरुष एकल एसएल4 वर्ग के फाइनल में इंडोनेशिया के मजबूत खिलाड़ी फ्रेडी सेतियावान को 21-9, 21-17 के अंतर से मात देकर स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया. निशानेबाजी में मोना अग्रवाल का कमाल
पैरा शूटिंग (निशानेबाजी) में मोना अग्रवाल ने एक बार फिर अपने शानदार फॉर्म का परिचय दिया. उन्होंने महिलाओं की 50 मीटर राइफल थ्री पोजिशंस एसएच1 स्पर्धा में विश्व रिकॉर्ड को ध्वस्त करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया. मोना ने इस स्पर्धा में 357.5 अंक हासिल करके नया विश्व रिकॉर्ड कायम किया. इन एशियाई पैरा खेलों में मोना का यह दूसरा स्वर्ण पदक था. उन्होंने इस साल की शुरुआत में भारत के लिए 2028 के पैरालंपिक खेलों का पहला कोटा भी हासिल किया था.
पैरालंपिक निशानेबाजी का एसएच1 वर्ग मुख्य रूप से उन खिलाड़ियों के लिए निर्धारित है जिनके निचले या ऊपरी अंगों में शारीरिक दिव्यांगता होती है और जो अपने हाथों से बंदूक का पूरा भार आसानी से संभाल सकते हैं. इससे पहले मोना ने महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग एसएच1 स्पर्धा में भी 250.0 अंक का शानदार स्कोर बनाकर खेलों के रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता था, जबकि इसी स्पर्धा में देश की दिग्गज खिलाड़ी अवनि लेखरा ने 249.6 अंक के साथ रजत पदक हासिल किया था.
तीरंदाजी में दिखा भारत का सटीक निशाना
तीरंदाजी के मैदान पर भी भारतीय खिलाड़ियों ने अपनी उत्कृष्टता साबित की. पैरालंपिक खेलों के चैंपियन हरविंदर सिंह और इन खेलों में पहली बार हिस्सा ले रहे विजय सुंडी की जोड़ी ने पुरुषों की रिकर्व युगल स्पर्धा में बेहतरीन समन्वय का परिचय देते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया. फाइनल मुकाबले में इस भारतीय जोड़ी ने चीन के खिलाड़ियों युन डुओ और झाओ लिशुए को 5-1 के बड़े अंतर से करारी शिकस्त दी. हालांकि, महिला युगल वर्ग में भारतीय टीम को थोड़ी निराशा हाथ लगी और भावना चौधरी तथा पूजा जटिया की जोड़ी को महिला पैरा रिकर्व युगल के फाइनल में चीन की गाओ जिहान और वांग शूकियान के खिलाफ 0-6 से हार का सामना करना पड़ा, जिससे उन्हें रजत पदक से ही संतोष करना पड़ा.
तैराकी में हिमांशु नंदल की ऐतिहासिक हैट्रिक
भारतीय तैराकी दल ने भी इस बार उम्मीदों से कहीं बेहतर प्रदर्शन करते हुए खेलों में कुल 11 पदक अपने नाम किए, जिनमें 3 महत्वपूर्ण रजत पदक भी शामिल हैं. प्रतियोगिता के आखिरी दिन तैराक हिमांशु नंदल ने पुरुषों की 100 मीटर फ्रीस्टाइल एस11 स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर इन खेलों में अपने कांस्य पदकों की हैट्रिक पूरी की.
जन्म से ही ‘ऑप्टिक नर्व’ (दृष्टि तंत्रिका) में गंभीर खराबी के कारण दृष्टिहीन रहने वाले 22 वर्षीय हिमांशु ने पुरुषों की 100 मीटर फ्रीस्टाइल एस11 स्पर्धा को 1 मिनट 5.90 सेकंड के समय में पूरा किया और कांस्य पदक पर कब्जा जमाया. इससे पहले हिमांशु पुरुषों की 400 मीटर फ्रीस्टाइल और 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक एस11 स्पर्धाओं में भी कांस्य पदक जीत चुके थे. इन खेलों में कुल तीन पदक अपने नाम करने के साथ ही हिमांशु ने हमवतन तैराक रवि बुडिगिना की बराबरी कर ली है, जिन्होंने दो रजत और एक कांस्य सहित कुल तीन पदक जीते थे.
हिमांशु ने मंगलवार को पुरुषों की 400 मीटर फ्रीस्टाइल एस11 स्पर्धा में 5 मिनट 10.91 सेकंड का समय निकालकर अपने पदकों का खाता खोला था, जहां कुल चार तैराकों के बीच हुए कड़े मुकाबले में वह तीसरे स्थान पर रहे थे. इसके बाद उन्होंने 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक एस11 में भी कांस्य पदक जीता और शुक्रवार को तीसरा पदक हासिल कर अपनी शानदार हैट्रिक पूरी की.

