Prayagraj Metro News: अब यूपी के पांचवें जिले के लोगों को मेट्रो की सवारी करने का आनंद जल्द ही मिलने वाला है. दरअसल, लखनऊ, नोएडा, कानपुर और आगरा के बाद अब प्रयागराज में मेट्रो चलाने की तैयारी चल रही है. यहां जल्द ही सड़कों पर नहीं बल्कि पटरियों पर मेट्रो फर्राटे भरती नजर आएगी. लंबे समय से चल रही अटकलों को विराम देते हुए रेल इंडिया टेक्निकल एंड इकोनॉमिक सर्विस (RITES) ने उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (UPMRC) को प्रयागराज मेट्रो के लिए DPR रिपोर्ट सौंप दी है.
अधिकारियों के मुताबिक, इस पूरी महापरियोजना की अनुमानित लागत करीब 12,000 करोड़ रुपये से अधिक है, जो शहर के बुनियादी ढांचे को पूरी तरह बदल देगी. इस प्रोजेक्ट के जरिए न केवल आधुनिक परिवहन सुविधा मिलेगी, बल्कि प्रयागराज की यातायात व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय स्तर की हो जाएगी.
दो मेन कॉरिडोर
संशोधित डीपीआर के अनुसार, प्रयागराज शहर को दो बड़े और रणनीतिक मेट्रो कॉरिडोर से जोड़ा जाएगा, जिनकी कुल लंबाई लगभग 60 किलोमीटर होगी. पहला रूट 39 किलोमीटर लंबा ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर होगा, जो बमरौली से शुरू होकर झूंसी सिटी तक जाएगा. इस महत्वपूर्ण रूट के बनने से एयरपोर्ट, एयरोसिटी, प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों और शहर के मुख्य रिहायशी इलाकों के बीच सफर बेहद आसान हो जाएगा. वहीं, दूसरा रूट 21 किलोमीटर लंबा नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर होगा, जो शांतिपुरम (फाफामऊ) के पास से शुरू होकर नैनी के छिवकी रेलवे स्टेशन तक का सफर तय करेगा.
प्रयागराज में इन रूट्स पर दौड़ेगी मेट्रो
मल्टी-मॉडल इंटरचेंज स्टेशन
इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत शहर के परेड ग्राउंड पर बनने वाला भव्य मल्टी-मॉडल इंटरचेंज स्टेशन होगा. यह इंटरचेंज न केवल दोनों मेट्रो लाइनों को आपस में जोड़ेगा, बल्कि इसे त्रिवेणी संगम के लिए प्रस्तावित महत्वपूर्ण रोपवे प्रोजेक्ट से भी सीधे कनेक्ट किया जाएगा. इस हाई-टेक कनेक्टिविटी से भविष्य में कुंभ, महाकुंभ और माघ मेले के दौरान आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बिना किसी ट्रैफिक बाधा के सीधे संगम तट तक पहुंचने की सुविधा मिल सकेगी.
सरकार के पास पहुंची रिपोर्ट
वर्तमान स्थिति यह है कि RITES द्वारा तैयार की गई यह संशोधित डीपीआर उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के जरिए राज्य सरकार को भेज दी गई है. अब जैसे ही राज्य कैबिनेट और मुख्यमंत्री स्तर से इस प्रोजेक्ट को हरी झंडी मिलेगी, इसे अंतिम स्वीकृति और वित्तीय बजट आवंटन के लिए केंद्रीय कैबिनेट के पास भेजा जाएगा. प्रयागराज विकास प्राधिकरण (PDA) और UPMRC का मानना है कि ‘मेट्रो-लाइट’ की तुलना में यह हेवी मेट्रो सिस्टम शहर की भविष्य की आबादी और महाकुंभ जैसी विशाल भीड़ को संभालने में ज्यादा सक्षम होगा.
मेट्रो सिटी होगा प्रयागराज
हालांकि, अभी मेट्रो निर्माण का कार्य धरातल पर उतरने से पहले कुछ प्रशासनिक प्रक्रियाओं को पूरा किया जाना बाकी है. राज्य सरकार और केंद्र सरकार की अंतिम औपचारिक मंजूरी मिलने के साथ ही परियोजना के लिए फंडिंग के तौर-तरीके भी पूरी तरह तय किए जाएंगे. सभी स्वीकृतियां मिलने के बाद जब यह महापरियोजना पूरी होगी, तो लखनऊ, कानपुर, नोएडा और आगरा के बाद प्रयागराज भी उत्तर प्रदेश का एक ऐसा हाई-टेक शहर बन जाएगा.

