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Saharanpur Mosque Controversy: सहारनपुर कलेक्ट्रेट मस्जिद ध्वस्तीकरण मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई हुई है. कोर्ट ने सरकार का जवाब रिकॉर्ड पर लेते हुए मस्जिद पक्ष को प्रत्युत्तर दाखिल करने के लिए तीन हफ्ते का समय दिया है. साथ ही नगर मजिस्ट्रेट द्वारा लगाए गए 6.41 करोड़ रुपये के हर्जाने पर अगली सुनवाई तक अंतरिम रोक लगा दी गई है.
सहारनपुर के कलेक्ट्रेट मस्जिद पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई.
Saharanpur Mosque Controversy: सहारनपुर के जिला कलेक्ट्रेट परिसर में मस्जिद ध्वस्तीकरण से जुड़े विवाद पर गुरुवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. अदालत ने राज्य सरकार की ओर से 16 अक्टूबर को दाखिल किए गए काउंटर एफिडेविट को अपने रिकॉर्ड पर लेने का आदेश दिया है. याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट से रिजाइंडर एफिडेविट दाखिल करने के लिए समय की मांग की थी, जिस पर अदालत ने मस्जिद पक्ष को दस्तावेजों का अध्ययन करने और अपना पक्ष रखने के लिए तीन सप्ताह का समय प्रदान किया है. यानी कि अब मामले की अगली सुनवाई के दौरान मस्जिद पक्ष अपना जवाब पेश करेगा. साथ ही नगर मजिस्ट्रेट सहारनपुर द्वारा मस्जिद पर 6 करोड़ 41 लाख का हर्जाना लगाने पर अंतरिम रोक लगाई है.
यह सुनवाई जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की सिंगल बेंच में हुई.मस्जिद कमेटी की ओर से मोहम्मद तनवीर अहमद ने या याचिका दाखिल की है. याचिका में मस्जिद ध्वस्तीकरण मामले में आगे की कार्रवाई न किए जाने की मांग की गई है. इसके अलावा, मस्जिद ध्वस्तीकरण के बाद जांच कर रही एएसआई का सर्वे रोकने और मौके पर यथा स्थिति बनाए रखने की भी याचिका में मांग की गई है. याचिका में बिना कानूनी नोटिस और ध्वस्तीकरण आदेश के कार्रवाई का आरोप लगाया गया है.
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में प्लेसेज आफ वर्शिप एक्ट के उल्लंघन का भी आरोप लगाया गया है. मामले में जिला प्रशासन और राज्य सरकार के साथ वक्फ बोर्ड को भी पक्षकार बनाया गया है. मुख्य शिकायतकर्ता और बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी के मुताबिक, सरकार और प्रशासन की ओर से जवाब दाखिल किए जाने के बाद अदालत ने मस्जिद पक्ष को अपना पक्ष रखने के लिए अतिरिक्त समय दिया है. फिलहाल विवादित ढांचे को गिराने की कार्रवाई को लेकर अंतिम फैसला नहीं आया है.
क्या है पूरा मामला
पूरा विवाद सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में करीब 315 वर्ग मीटर सरकारी जमीन पर बने ढांचे को लेकर है. प्रशासन का दावा है कि संबंधित भूमि सरकारी रिकॉर्ड में कलेक्ट्रेट या कचहरी के नाम दर्ज है. इसी आधार पर बेदखली की कार्रवाई की गई थी. दूसरी ओर, मस्जिद पक्ष ने जमीन को याकूब खान और वाहिद खान की संपत्ति बताते हुए उसके वक्फ के तहत इस्तेमाल किए जाने का दावा किया है.
इस मामले में नगर मजिस्ट्रेट ने 16 जुलाई 2026 को बेदखली और क्षतिपूर्ति का आदेश जारी किया था. इसके खिलाफ मस्जिद पक्ष ने जिला अदालत का रुख किया, लेकिन 2 सितंबर को अपील खारिज कर दी गई. इसके बाद 5 सितंबर 2026 को पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में विवादित ढांचे को ध्वस्त कर दिया गया.
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सिविल सर्विसेज की तैयारी करते-करते कब 4 साल पहले पत्रकारिता की ओर झुकाव हो गया पता ही नहीं चला. नाम दीप राज दीपक है. वर्तमान में News18 हिंदी के साथ जुड़े हुए हैं. पद सब-एडिटर …

