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— रॉबर्ट्सगंज में रामा हॉस्पिटल फैक्चर एंड सर्जिकल सेंटर अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई की मांग, नोडल बोले- जांच के बाद होगी कार्रवाई

Sonbhadra। राबर्ट्सगंज में प्रसव के बाद 29 वर्षीय विवाहिता की मौत ने निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली के साथ स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों ने ऑपरेशन के दौरान लापरवाही का आरोप लगाते हुए संबंधित अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
मामला सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि अस्पताल का पंजीकरण पूरा नहीं हुआ था, तो वहां प्रसव जैसे संवेदनशील मामले में इलाज कैसे किया जा रहा था? क्या स्वास्थ्य विभाग को इसकी जानकारी नहीं थी, या निगरानी व्यवस्था में कहीं चूक हुई?

मृतका कंचन मौर्या चोपन थाना क्षेत्र के भभाइच गांव की निवासी थी। परिजनों के अनुसार, 14 अक्टूबर को उसे प्रसव के लिए रॉबर्ट्सगंज स्थित रामा हॉस्पिटल फ्रैक्चर एंड सर्जिकल सेंटर में भर्ती कराया गया था। ऑपरेशन के बाद उसने बच्ची को जन्म दिया, लेकिन बाद में उसकी हालत बिगड़ गई। सांस लेने में परेशानी होने पर उसे वाराणसी ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। परिजनों ने चिकित्सकीय लापरवाही का आरोप लगाया है। हालांकि, इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
स्वास्थ्य विभाग के नोडल अधिकारी एवं एसीएमओ गुलाब शंकर के अनुसार, अस्पताल का पंजीकरण नहीं था, इसका मामला हाईकोर्ट में विचाराधीर है, ऐसे में सीजेयर करना पूरी तरह से गलत है, महिला की मौत के कारणों और अस्पताल के पंजीकरण की स्थिति की जांच की जाएगी। उन्होंने बताया कि पंजीकरण संबंधी मामला हाईकोर्ट में लंबित होने के कारण प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी थी। परिजनों की शिकायत पर एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई की बात भी कही गई है।

अब स्वास्थ्य विभाग से सवाल है कि पंजीकरण पूरा न होने के बावजूद अस्पताल में इलाज की अनुमति किस आधार पर थी? यदि नियमों का उल्लंघन हो रहा था, तो समय रहते निरीक्षण और कार्रवाई क्यों नहीं हुई?क्या जिले के अन्य निजी अस्पतालों की भी नियमित जांच की जाती है? इन सवालों का जवाब विभाग को देना चाहिए।
फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के निष्कर्ष आने बाकी हैं। ऐसे में किसी को दोषी ठहराना जल्दबाजी होगी। लेकिन मामले की निष्पक्ष जांच, अस्पताल के दस्तावेजों की पड़ताल और जिम्मेदारी तय करना जरूरी है, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिले और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
