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‘रामायण’ और ‘जेलर 2’ जैसी बड़ी फिल्मों के विजुअल्स और वीएफएक्स को लेकर सोशल मीडिया पर जारी बहस के बीच नेशनल अवॉर्ड विनर सीबी अरुण कुमार का बड़ा बयान सामने आया है . उन्होंने बताया है कि आखिर क्यों आज के दर्शक हर एक सीन पर सवाल उठा रहे हैं और हर खराब दिखने वाले विजुअल पर सीधा एआई का टैग लगा देना कितना सही है . नीचे पढ़ें पूरी खबर-
VFX पर उठे सवाल तो भड़के नेशनल अवॉर्ड विनर (फोटो साभार-IMDB)
नई दिल्ली: इंडियन सिनेमा में इन दिनों फिल्मों के वीएफएक्स और विजुअल इफेक्ट्स को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है . बड़ी-बड़ी मेगा बजट फिल्मों के टीजर या ट्रेलर आते ही सोशल मीडिया पर उनके एक-एक फ्रेम को लेकर ट्रोलिंग शुरू हो जाती है . एनिमेशन इंडस्ट्री में 30 सालों का अनुभव रखने वाले नेशनल अवॉर्ड विनर एक्सपर्ट सीबी अरुण कुमार ने इस ट्रेंड पर अपनी चिंता जाहिर की है .
उन्होंने खुलकर बताया है कि आखिर क्यों आज के दर्शक ‘रामायण’, ‘जेलर 2’ जैसी बड़ी फिल्मों के विजुअल्स पर तुरंत सवाल उठाने लगते हैं .
सीबी अरुण कुमार ने ट्रोलिंग पर क्या कहा
सीबी अरुण कुमार ने हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में बताया कि 1980 के दशक में जब उन्होंने काम शुरू किया था, तब कंटेंट देखने के साधन बहुत सीमित थे . लोग या तो सिनेमाघरों में फिल्में देखते थे या फिर सिर्फ एक सरकारी टीवी चैनल होता था . उस दौर में फिल्मों का रिव्यू करने वाले लोग भी बहुत कम थे . लेकिन इंटरनेट, डीवीडी और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के आने के बाद अब हर इंसान के हाथ में कंटेंट है . आज के समय में हर एक दर्शक खुद एक फिल्म क्रिटिक बन चुका है और हर छोटे सीन को बारीकी से नोटिस करता है .
हर खराब विजुअल पर एआई का टैग
आजकल किसी फिल्म का कोई सीन खराब दिखता है, तो लोग तुरंत कह देते हैं कि यह एआई से बनाया गया है . एनिमेशन एक्सपर्ट के मुताबिक यह सोच बिल्कुल सही नहीं है . अगर कोई विजुअल अच्छा नहीं लग रहा है, तो उस पर सीधा एआई का ठप्पा लगा देना पारंपरिक वीएफएक्स आर्टिस्ट्स की मेहनत के साथ अन्याय है . उन्होंने मेकर्स को सलाह दी है कि वह दर्शकों को पर्दे के पीछे का काम दिखाएं, ताकि लोग उनकी असली मेहनत को समझ सकें और मेकर्स पर भरोसा कर सकें .
क्रिस्टोफर नोलन को भी देनी पड़ती है सफाई
दर्शकों का अविश्वास इस कदर बढ़ गया है कि हॉलीवुड के दिग्गज डायरेक्टर क्रिस्टोफर नोलन को भी एक्स्ट्रा मेहनत करनी पड़ती है. उन्हें यह साबित करना पड़ता है कि उनकी फिल्मों में दिखाए गए सीन वीएफएक्स से नहीं, बल्कि असल में शूट किए गए हैं.अरुण कुमार के मुताबिक, एआई पुराने वीएफएक्स शॉट्स की नकल करके खुद को ट्रेन कर रहा है. ऐसे में आम दर्शकों के लिए असली वीएफएक्स और एआई से बने शॉट्स के बीच अंतर पहचानना मुश्किल होता जा रहा है.
गंभीर हो सकती है चुनौती
आने वाले समय को लेकर उन्होंने चेतावनी दी है कि जैसे-जैसे एआई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बढ़ेगा, यह समस्या और ज्यादा गहरी होती जाएगी . एआई इंसानों के बनाए किसी भी विजुअल को आसानी से कॉपी कर सकता है . ऐसे में फिल्म मेकर्स के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वह कैसे दर्शकों को कुछ नया और एंगेजिंग कंटेंट दे पाते हैं, जिससे दर्शकों का भरोसा सिनेमा पर बना रहे .
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