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UP Chunav 2027: सरधना विधानसभा सीट से बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के संभावित उम्मीदवार विनीत भराला सुर्खियों में हैं. 18 अक्टूबर की जनसभा में विनीत भराला मंच पर ही फूट-फूटकर रोने लगे. उन्होंने रंधे हुए गले से ही लोगों से 2027 के विधानसभा चुनाव में समर्थन देने की अपील की. विनीत भराला का रोते हुए समर्थन मांगने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है.
सरधना से बीएसपी के घोषित प्रत्याशी विनीत भराला ने मंच से आंसू बहाते हुए कहा, ‘सारे जाट एक हो जाओ’
यूपी चुनाव 2027 की गहमागहमी के बीच बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के एक नेता सुर्खियों में हैं. बीएसपी नेता मंच पर फूट-फूटकर रोते दिखे. उन्होंने रोते हुए ही 2027 के चुनाव में अपने लिए वोट मांगा. दरअसल, समाजवादी पार्टी छोड़कर कुछ दिन पहले ही बीएसपी में आए विनीत भराला को बीएसपी ने मेरठ जिले की चर्चित विधानसभा सीट सरधना से प्रत्याशी बनाए जाने की बात कही है. इसी वजह से विनीत भराला इन दिनों अपने लिए जनसंपर्क अभियान में जुटे हैं.
विनीत भराला ने मेरठ के दौराला में 18 अक्टूबर को जनसभा की. यहां वह मंच पर भाषण देते हुए भावुक हो गए. रुंधे गले से विनीत भराला ने कहा- ‘मेरा सबकुछ दांव पर लग गया. मुझे आप लोगों का साथ चाहिए. अगर आप लोगों ने साथ दिया तो मैं अपने पिताजी काम करूंगा. मैं अपनी तरह से कोई ऐसा काम नहीं करूंगा कि आपकी शर्म से गर्दन झुक जाए. वादा कर रहा हूं आपसे.’
इससे पहले उन्होंने कहा कि हमारे पिताजी ने सरधना में 36 बिरादरी का परिवार बनाया था, जिसके हर सुख दुख में वो आज तक खड़े हैं. विनीत भराला ने साफ तौर से कहा कि कुछ लोग यह झूठी अफवाह (नैरेटिव) फैला रहे हैं कि बीजेपी के संगीत सोम उन्हें चुनाव लड़ा रहे हैं. उन्होंने साफ किया कि भराला परिवार का जमीर कोई नहीं खरीद सकता और वे किसी के पैसों से नहीं, बल्कि जनता के भरोसे चुनाव लड़ रहे हैं.
कौन हैं विनीत भराला?
विनीत भराला के पिता सत्यप्रकाश भराला ने समाजवादी पार्टी से अपनी राजनीतिक पारी शुरू की थी. 2002 में मुलायम सिंह यादव ने सत्यप्रकाश भराला को सरधना से चुनाव लड़ाया था, लेकिन वह बीजेपी उम्मीदवार प्रोफेसर रविंद्र पुंडीर के हाथों बुरी तरह हारे थे. 2007 में मुलायम सिंह यादव ने सत्यप्रकाश भराला को सपा का विधानसभा टिकट नहीं दिया तो वह निर्दलीय ही मैदान में उतर गए, जिसमें उन्हें महज करीब 9000 वोट मिले थे. जहां तक विनीत भराला की राजनीतिक पारी की बात है तो 2005 में उन्होंने ग्राम प्रधान का चुनाव जीता था. विनीत भराला भी कभी सपा तो कभी बसपा में आते जाते रहे हैं. अभी कुछ दिन पहले ही वह सपा से बसपा में लौटे हैं.
विनीत भराला के परिवार में लंबे समय से आपसी रंजिश रही है. माना जाता है कि इसी रंजिश में उनके पिता सत्यप्रकाश भराला की हत्या हुई थी. विनीत ने 18 अक्टूबर की जनसभा के लिए गांव-गांव घूमकर लोगों से आने की अपील की थी. बताया जा रहा है कि वह करीब 10 दिन से क्षेत्र में घूम रहे थे. इतने प्रयास के बाद भी उनकी जनसभा में महज 4 से 5 हजार लोगों के पहुंचने का अंदाजा लगाया जा रहा है.
सरधना विधानसभा सीट का जातीय समीकरण क्या है?
सरधना विधानसभा सीट का जातीय समीकरण मिला जुला हुआ है. यहां सबसे ज्यादा एक लाख से ज्यादा मुस्लिम वोटर हैं. इसी वजह से यहां हालिया चुनावों में वोटों का ध्रुवीकरण होता रहा है. मुसलमानों के खिलाफ राजपूत (करीब 55000), जाट (करीब 40000), गुर्जर (करीब 40000), दलित (50000) एकजुट होकर जिस उम्मीदवार को वोट दे देते हैं उसी की जीत होती रही है. बीजेपी के संगीत सोम इसी समीकरण से चुनाव जीतते रहे हैं. बीएसपी के विनीत भराला जाट, मुस्लिम और दलित वोटों को अपने साथ जोड़कर नया कॉम्बिनेशन बनाने के प्रयास में हैं.
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अभिषेक कुमार News18 की डिजिटल टीम में बतौर एसोसिएट एडिटर (सहयोगी संपादक) पद पर कार्यरत हैं. वे यहां बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तसीगढ़, उत्तराखंड की राजनीति, क्राइम समेत तमाम समसामयिक…
