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Ashutosh Brahmachari vs Swami Avimukteshwaranand: माघ मेला 2026 में 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से मारपीट मामले पर कोर्ट ने अपना रुख साफ किया है. एडीजे जयेंद्र कुमार ने आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज की अर्जी पर सुनवाई करते हुए घटना से जुड़े सभी सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं. इस मामले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्यों पर यात्रा बाधित करने और मारपीट के आरोप लगे हैं. पुलिस द्वारा एफआईआर न दर्ज करने के बाद यह मामला अब कोर्ट के जरिए आगे बढ़ रहा है.
अमावस्या के दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से मारपीट मामले में कोर्ट का आदेश आया है.
Ashutosh Brahmachari vs Swami Avimukteshwaranand Dispute: प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ और माघ मेलों की परंपरा हमेशा से धार्मिक आस्था का केंद्र रही है. मगर इस साल मौनी अमावस्या पर पर निकाली जा रही श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति यात्रा के दौरान विवादों में आ गया. दरअसल, इसमें शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से मारपीट और उनके शिष्यों द्वारा सड़क मार्ग जाम करने के आरोप लगे हैं. हालांकि, पुलिस ने इस मामले में कोई कार्यवाई नहीं की. इस मामले पर कोर्ट के जरिए सुनवाई हो रही है. प्रयागराज के स्थानीय अदालत ने इस मामले में सभी सीसीटीवी फुटेज और वीडियो को सुरक्षित रखने के आदेश दिए हैं.
श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट मथुरा के अध्यक्ष आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज द्वारा दाखिल की गई क्रिमिनल रिवीजन अर्जी पर सुनवाई करते हुए एडीजे जयेंद्र कुमार ने घटना से जुड़े सभी सीसीटीवी फुटेज को पूरी तरह सुरक्षित रखने के आदेश दिए हैं. अदालत ने कहा कि उनके द्वारा मांगे जाने पर उन्हें तुरंत पेश करना होगा. हालांकि सुनवाई के दौरान विपक्षी पक्षों की तरफ से इस अर्जी का पुरजोर विरोध किया गया था लेकिन कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायहित में साक्ष्यों को संरक्षित रखने का यह आदेश दिया.
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर लगे गंभीर आरोप
शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज के मुताबिक 18 जनवरी 2026 को मौनी अमावस्या के दिन जब संगम क्षेत्र में करोड़ों श्रद्धालुओं की भीड़ थी तब वह अपने सेवादारों के साथ यात्रा निकाल रहे थे. इस दौरान ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्यों पर यात्रा बाधित करने सार्वजनिक मार्ग पर जाम लगाने और उनके साथ मारपीट करने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं. इस मामले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद उनके शिष्य मुकुंदनंद ब्रह्मचारी अरविंद मिश्रा और अन्य अज्ञात सहयोगियों को पक्षकार बनाया गया है.
झूंसी थाने में नहीं हुई सुनवाई तो कोर्ट की शरण ली
घटना के तुरंत बाद आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने प्रयागराज के झूंसी थाने में इस संबंध में तहरीर दी थी. पुलिस ने पीड़ितों का मेडिकल परीक्षण तो करवा दिया लेकिन मामले में एफआईआर दर्ज नहीं की. इसके बाद न्याय की आस में एसीजेएम पंचम के न्यायालय में अर्जी दी गई जहां कोर्ट ने इसे परिवाद के रूप में दर्ज करने का निर्देश दिया. इसी आदेश के खिलाफ जिला जज की अदालत में क्रिमिनल रिवीजन अर्जी दाखिल की गई जिसकी सुनवाई वर्तमान में एडीजे कोर्ट में चल रही है.
घटनास्थल के आसपास के कैमरों की मांगी गई थी रिकॉर्डिंग
सुनवाई के दौरान महाराज के अधिवक्ताओं की ओर से यह मांग की गई थी कि 18 जनवरी 2026 को दोपहर 12 बजे से रात 10 बजे तक के बीच पीपा पुल संख्या 2 त्रिवेणी मार्ग शंकराचार्य शिविर संगम सर्कुलेटिंग एरिया और संगम नोज के पास लगे तमाम सरकारी व गैर-सरकारी सीसीटीवी कैमरों के फुटेज सुरक्षित किए जाएं. उनका तर्क था कि ये डिजिटल साक्ष्य दूध का दूध और पानी का पानी कर देंगे जिससे यह साबित हो सके कि असल में वहां क्या हुआ था.
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सिविल सर्विसेज की तैयारी करते-करते कब 4 साल पहले पत्रकारिता की ओर झुकाव हो गया पता ही नहीं चला. नाम दीप राज दीपक है. वर्तमान में News18 हिंदी के साथ जुड़े हुए हैं. पद सब-एडिटर …

