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Ekta Bishnoi clinches three gold: पावरलिफ्टर एकता बिश्नोई ने अमेरिका में आयोजित विश्व मास्टर्स क्लासिक पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप के ‘मास्टर्स-2’ वर्ग में तीन गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है. वह इस मुकाम पर पहुंचने वाली देश की पहली महिला पावरलिफ्टर बन गई हैं. कोच सुनील कुमार के वैज्ञानिक मार्गदर्शन और वीडियो कॉल के जरिए बनी रणनीतिक तैयारी के दम पर एकता ने कुल 362.5 किलोग्राम वजन उठाकर जापान और कनाडा की खिलाड़ियों को पीछे छोड़ा है.
पावरलिफ्टर एकता बिश्नोई ने अमेरिका में तीन गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है.
नई दिल्ली. भारतीय खेलों के इतिहास में दिल्ली की माटी और मजबूत इच्छाशक्ति ने एक और स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया है. भारतीय राजस्व सेवा की अधिकारी और पावरलिफ्टर एकता बिश्नोई ने अमेरिका में आयोजित विश्व मास्टर्स क्लासिक पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए तीन गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है. इस ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ ही वह इस प्रतिष्ठित चैंपियनशिप के ‘मास्टर्स-2’ वर्ग में गोल्ड जीतने वाली देश की पहली महिला पावरलिफ्टर बन गई हैं. उनकी इस सफलता ने न सिर्फ देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है, बल्कि यह साबित कर दिया है कि अगर हौसले बुलंद हों, तो जिम्मेदारियों और सपनों के बीच की दीवारें खुद-ब-खुद ढह जाती हैं.
सरकारी सेवा की जटिल जिम्मेदारियों और प्रशासनिक दायित्वों के बीच खेल के मैदान में पसीना बहाना किसी लोहे के चने चबाने से कम नहीं होता. एकता बिश्नोई (Ekta Bishnoi) ने इस कठिन रास्ते को चुना और अपनी कड़ी मेहनत, अनुशासन तथा अटूट दृढ़ संकल्प के बल पर अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगा फहरा दिया. उनकी यह यात्रा इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि प्रशासनिक सेवा के कड़े दबाव के बीच भी यदि अनुशासन और जूनून साथ हो, तो विश्व स्तर पर लोहा मनवाया जा सकता है.
वीजा नहीं मिला, पर तकनीक बनी सहारा
प्रतियोगिता की यह राह इतनी आसान नहीं थी. एकता के कोच सुनील कुमार (Sunil Kumar) को अमेरिका का वीजा नहीं मिल सका, जिससे उनकी शारीरिक मौजूदगी अमेरिका में मुमकिन नहीं हो पाई. लेकिन आधुनिक तकनीक और अटूट विश्वास ने इस दूरी को पाट दिया. एकता ने अमेरिका से ही वीडियो कॉल और टीम अधिकारी बिनु इब्राहिम के जरिए अपने कोच से लगातार संपर्क बनाए रखा. कोच सुनील के वैज्ञानिक और परिणाम-केंद्रित मार्गदर्शन पर अमल करते हुए एकता ने अपनी रणनीति को पूरी सटीकता से जमीन पर उतारा.
स्क्वाट से लेकर डेडलिफ्ट तक रणनीतिक दबदबा
कोच सुनील कुमार ने बताया कि उनकी योजना बेहद स्पष्ट और सटीक थी. उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता के स्क्वाट इवेंट के समापन तक ही एकता ने अपनी निकटतम प्रतिद्वंद्वी पर 20 किलोग्राम की निर्णायक बढ़त बना ली थी. इस शुरुआती बढ़त ने भारतीय खेमे का मनोबल सातवें आसमान पर पहुंचा दिया था. इसके बाद एकता ने बेंच प्रेस इवेंट में भी इस बेहद अहम बढ़त को पूरी सावधानी और मजबूती के साथ बनाए रखा. अंत में, 150 किलोग्राम के अपने पहले ही सफल डेडलिफ्ट प्रयास के साथ एकता ने भारत के लिए ऐतिहासिक स्वर्ण पदक पूरी तरह से पक्का कर लिया. उन्होंने कुल 362.5 किलोग्राम वजन उठाकर जापान और कनाडा जैसी दिग्गज खिलाड़ियों को पीछे छोड़ दिया.
नेताजी जिम में तपी सफलता की भट्टी
नई दिल्ली के नेताजी जिम में पसीना बहाने वाली एकता की इस सफलता के पीछे एक लंबी और समर्पित तैयारी रही है. नई दिल्ली के इसी जिम में कोच सुनील कुमार की कड़ी निगरानी में उन्होंने अपनी ताकत को तराशा है. एकता की इस ऐतिहासिक जीत पर उनके साथी अजय तोमर (आचार्यजी) ने बेहद गर्व के साथ साझा किया कि विश्व चैंपियनशिप से पहले उनकी तैयारी बेहद व्यापक और पूर्ण थी. उन्होंने बताया कि उन सबका केवल एक ही उद्देश्य था और वह था अपनी मातृभूमि भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन करना.
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कमलेश कुमार राय नेटवर्क18 ग्रुप में बतौर चीफ सब एडिटर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. वह बीते 15 सालों से खेल पत्रकारिता की पिच पर डटे हुए हैं. हिंदी स्पोर्ट्स सेक्शन में वह खेल कंटेंट की गहरी समझ, सटीक विश्लेषण और ब…
