मुख्यालय संवाददाता@विशाल टंडन…
..सीता हरण, जटायु का बलिदान और राम-हनुमान मिलन के मंचन ने दर्शकों को किया भावविभोर

रॉबर्ट्सगंज नगर में श्री रामलीला समिति के तत्वावधान में आयोजित ऐतिहासिक रामलीला मे शुक्रवार को प्रभु श्रीराम के वनवास से जुड़े प्रमुख प्रसंगों का भावपूर्ण और जीवंत मंचन किया गया।

आदर्श श्री रामलीला मंडल पिपलेश्वर धाम, सिंगरौली के कलाकारों ने अपने अभिनय से रामकथा के दृश्यों को सजीव कर दिया। सायं सात बजे शुरू हुई लीला के दौरान रामलीला मैदान में भक्तिमय माहौल बना रहा और दर्शक देर तक मंचन में भाव-विभोर रहे।

लीला की शुरुआत वन में प्रभु श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के प्रसंग से हुई। रावण के कहने पर मारीच स्वर्ण मृग का रूप धारण कर पंचवटी पहुंचता है। सुनहरे हिरण को देखकर माता सीता उसे पाने की इच्छा जताती हैं। उनकी इच्छा पूरी करने के लिए श्रीराम हिरण के पीछे जाते हैं।

काफी देर तक उनके वापस नहीं लौटने पर माता सीता चिंतित हो जाती हैं और लक्ष्मण को उनकी सहायता के लिए भेजती हैं। जाने से पहले लक्ष्मण कुटिया के बाहर रेखा खींचकर माता सीता को उससे बाहर न निकलने की हिदायत देते हैं।

इसके बाद साधु का वेश धारण कर पहुंचे रावण का भिक्षा मांगने का दृश्य मंचित हुआ। माता सीता के लक्ष्मण रेखा पार करते ही रावण उनका हरण कर लेता है। इस दृश्य ने दर्शकों को भावुक कर दिया। इसके बाद सीता की खोज में वन-वन भटकते राम-लक्ष्मण की मुलाकात घायल जटायु से होती है।

जटायु रावण से युद्ध कर माता सीता को बचाने के अपने प्रयास का वर्णन करते हैं और प्राण त्याग देते हैं। जटायु के बलिदान का दृश्य देखकर दर्शक भावुक हो उठे।

आगे किष्किंधा पर्वत के निकट राम-हनुमान मिलन का मंचन हुआ। हनुमान प्रभु श्रीराम को सुग्रीव से मिलाते हैं। सुग्रीव अपने भाई बाली द्वारा किए गए छल की व्यथा सुनाते हैं। इसके बाद श्रीराम बाली का वध कर सुग्रीव को किष्किंधा का राजा बनाते हैं। इन सभी प्रसंगों को कलाकारों ने संवाद, भाव-भंगिमा और प्रभावशाली अभिनय के माध्यम से जीवंत कर दिया।

इस अवसर पर समिति के संरक्षक जितेंद्र सिंह, अध्यक्ष पवन जैन, कोषाध्यक्ष राकेश गुप्ता, उपाध्यक्ष प्रमोद गुप्ता, आनंद मिश्रा, प्रशांत जैन, राजेश सोनी, राम प्रसाद यादव, विनोद कनोडिया, विनय जायसवाल, कीर्तन जी, विमल जैन, गोल्डी, चंदू केजरीवाल सहित समिति के अन्य सदस्य और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
