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नवरात्रि के दौरान आजमगढ़ के प्रसिद्ध देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. दक्षिणेश्वरी माता मंदिर अपने दक्षिणमुखी स्वरूप, निजामाबाद का शीतला माता मंदिर धार्मिक मान्यताओं और पल्हनेश्वरी माता मंदिर अपनी पौराणिक विरासत के लिए प्रसिद्ध है. जानिए इन तीनों मंदिरों की खासियत और धार्मिक महत्व.
नवरात्रि के पावन दिनों में आजमगढ़ की पावन धरती पूरी तरह से देवी मां की भक्ति में डूबी नजर आ रही है. जनपद के सभी ऐतिहासिक और पौराणिक देवी मंदिरों में सुबह तड़के से ही श्रद्धालुओं की भारी कतारें लगी रहती है, भक्तजन दूर-दूर से अपनी मनोकामनाएं लेकर मंदिरों में हाजिरी लगाने पहुंच रहे हैं.
आजमगढ़ शहर के सबसे नजदीक स्थित दक्षिणेश्वरी माता का मंदिर आजमगढ़ में श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है, यह मंदिर जनपद के सबसे पुराने और ऐतिहासिक देवस्थलों में से एक है, इस पावन धाम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह एशिया का दूसरा दक्षिण मुखी माता का मंदिर माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता रानी का यह दक्षिण मुखी स्वरूप पूरे देश में केवल बंगाल और आजमगढ़ में ही देखने को मिलता है.
नवरात्रि के पावन अवसर पर दक्षिणेश्वरी मंदिर परिसर में भक्तों का भारी जमावड़ा देखने को मिलता है, सुबह से ही श्रद्धालु हाथों में पूजा की थाली और नारियल-चुनरी लेकर कतारों में खड़े नजर आते हैं. दक्षिण दिशा की ओर मुख करके विराजमान माता रानी के इस अलौकिक विग्रह के दर्शन मात्र से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी मानी जाती हैं.
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जिले के ऐतिहासिक निजामाबाद क्षेत्र में स्थित शीतला माता मंदिर भी श्रद्धालुओं के लिए आस्था का बड़ा केंद्र है. यह स्थान जनपद के बेहद प्राचीन मंदिरों और शक्तिपीठों के रूप में प्रसिद्ध है, इस मंदिर की सबसे बड़ी धार्मिक मान्यता यह है कि यहां सच्चे मन से दर्शन और पूजन करने पर भक्तों की सभी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं दूर हो जाती हैं.
रोगों और शारीरिक कष्टों से मुक्ति पाने के लिए लोग नवरात्रि में यहां माथा टेकते हैं, आजमगढ़ शहर मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह धार्मिक स्थान भी आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है, यह पावन धाम केवल आजमगढ़ जिले ही नहीं, बल्कि आसपास के अन्य जनपदों के लिए भी श्रद्धा का बड़ा केंद्र है, नवरात्रि के दौरान यहां भक्तों की अपार भीड़ देखने को मिलती है.
आजमगढ़ के पल्हना क्षेत्र में स्थित पल्हमेंश्वरी माता मंदिर का ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व भी बेहद खास माना जाता है, यहां पर देवी मां साक्षात शक्तिपीठ के रूप में विराजमान हैं. धार्मिक मान्यताओं और इतिहास के अनुसार इस पवित्र मंदिर का संबंध राजा दक्ष और उनके यज्ञ से जुड़ा हुआ है.
इस पौराणिक विरासत के कारण पल्हमेंश्वरी धाम पर नवरात्रि में आजमगढ़ के अलावा कई अन्य क्षेत्रों से लोग माथा टेकने और दर्शन करने आते हैं. पल्हनेश्वरी माता मंदिर प्रांगण और उसके आसपास के विस्तृत इलाके में नवरात्रि के अवसर पर विशाल मेले का आयोजन किया जाता है.

