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माता की भेंटों से घर-घर में मशहूर हुए नरेंद्र चंचल ने अपनी आवाज से हिंदी फिल्मों में भी खूब धमाल मचाया था. ‘चलो बुलावा आया है’ और ‘तूने मुझे बुलाया शेरावालिए’ जैसे भजनों को लोकप्रिय बनाने वाले नरेंद्र चंचल को फिल्म ‘बॉबी’ के गाने ‘बेशक मंदिर-मस्जिद तोड़ो’ से बड़ी पहचान मिली थी. उनके जन्मदिन पर जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ दिलचस्प किस्से, कैसे एक धार्मिक माहौल में पले-बढ़े लड़के ने अपनी आवाज के दम पर संगीत की दुनिया में खास मुकाम हासिल किया.
भजन सम्राट बनकर जीता था दिल
नई दिल्ली. ‘चलो बुलावा आया है’ और ‘तूने मुझे बुलाया शेरावालिए’ जैसे भजन आज भी माता के जागरण में खूब सुनाई देते हैं. इन भजनों को अपनी दमदार आवाज से खास बनाने वाले नरेंद्र चंचल की पहचान सिर्फ धार्मिक गीतों तक सीमित नहीं थी. उन्होंने हिंदी फिल्मों में भी अपनी आवाज का जादू बिखेरा था. फिल्म ‘बॉबी’ के एक गाने ने उन्हें ऐसी पहचान दिलाई कि वह रातोंरात मशहूर हो गए. इस गाने के लिए उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला था.
माता की भेंटों से घर-घर में मशहूर हुए नरेंद्र चंचल ने अपनी आवाज से हिंदी फिल्मों में भी खूब धमाल मचाया था. ‘चलो बुलावा आया है’ और ‘तूने मुझे बुलाया शेरावालिए’ जैसे भजनों को लोकप्रिय बनाने वाले नरेंद्र चंचल को फिल्म ‘बॉबी’ के गाने ‘बेशक मंदिर-मस्जिद तोड़ो’ से बड़ी पहचान मिली थी. आज नरेंद्र चंचल के जन्मदिन पर आइए जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ दिलचस्प किस्से, कैसे एक धार्मिक माहौल में पले-बढ़े लड़के ने अपनी आवाज के दम पर संगीत की दुनिया में खास मुकाम हासिल किया.
अमृतसर में हुआ था नरेंद्र चंचल का जन्म
नरेंद्र चंचल का जन्म 16 अक्टूबर 1940 को पंजाब के अमृतसर में हुआ था. उनका असली नाम नरेंद्र खरबंदा बताया जाता है. उनका परिवार धार्मिक माहौल वाला था और उनकी मां कैलाशवती भजन गाया करती थीं. घर में भजन और आरती का माहौल होने के कारण नरेंद्र का झुकाव भी बचपन से ही संगीत की ओर हो गया. छोटी उम्र में ही उन्होंने गाना शुरू कर दिया था. उस वक्त उन्हें अंदाजा नहीं था कि संगीत का यही शौक आगे चलकर उनकी पहचान बन जाएगा.
रिकॉर्ड की दुकानों के बाहर बैठकर सुनते थे गाने
बचपन में नरेंद्र चंचल को फिल्मी गाने सुनने का भी काफी शौक था. उस दौर में उनके घर में रेडियो या ग्रामोफोन नहीं था. ऐसे में वह रिकॉर्ड की दुकानों के बाहर बैठकर गाने सुनते और फिर उन्हें याद करके गाने की कोशिश करते थे. उन्हें मोहम्मद रफी और मन्ना डे जैसे दिग्गज गायकों के गाने पसंद थे. वह मोहल्ले के छोटे कार्यक्रमों और पारिवारिक आयोजनों में भी गाया करते थे. धीरे-धीरे उनकी आवाज लोगों को पसंद आने लगी. नरेंद्र चंचल के नाम के पीछे भी एक दिलचस्प कहानी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्कूल में उनके शरारती और चंचल स्वभाव को देखकर एक शिक्षक ने उन्हें ‘चंचल’ नाम दिया था. आगे चलकर यही नाम उनकी पहचान बन गया.
राज कपूर ने पहचानी आवाज, ‘बॉबी’ में मिला गाने का मौका
उनके करियर में बड़ा मोड़ तब आया, जब फिल्मकार राज कपूर ने उनकी आवाज सुनी. एक कार्यक्रम में नरेंद्र चंचल बुल्ले शाह की सूफी रचना गा रहे थे. वहां मौजूद राज कपूर उनकी आवाज से काफी प्रभावित हुए. इसके बाद उन्हें फिल्म ‘बॉबी’ में गाने का मौका मिला. साल 1973 में रिलीज हुई इस फिल्म में ऋषि कपूर और डिंपल कपाड़िया मुख्य भूमिकाओं में थे.फिल्म का गाना ‘बेशक मंदिर-मस्जिद तोड़ो, पर प्यार भरा दिल कभी न तोड़ो’ लोगों को खूब पसंद आया. इस गीत में प्यार और इंसानियत का संदेश था. नरेंद्र चंचल की दमदार आवाज ने इसे और खास बना दिया. फिल्म की सफलता के साथ ही उनकी आवाज भी घर-घर तक पहुंच गई. साल 1974 में उन्हें इस गाने के लिए फिल्मफेयर का सर्वश्रेष्ठ पुरुष पार्श्व गायक पुरस्कार मिला.
फिल्मों में भी गाए कई गाने, लेकिन भजनों से मिली खास पहचान
‘बॉबी’ के बाद नरेंद्र चंचल ने ‘बेनाम’, ‘रोटी कपड़ा और मकान’ समेत कई फिल्मों में गाने गाए. उन्होंने पंजाबी सहित दूसरी भाषाओं के संगीत में भी काम किया. हालांकि, उन्हें सबसे ज्यादा लोकप्रियता माता की भेंटों और जागरण के गीतों से मिली. फिल्म ‘आशा’ का ‘तूने मुझे बुलाया शेरावालिए’ और फिल्म ‘अवतार’ का ‘चलो बुलावा आया है, माता ने बुलाया है’ उनके सबसे लोकप्रिय गीतों में शामिल हो गए.नरेंद्र चंचल का निधन 22 जनवरी 2021 को दिल्ली के अपोलो अस्पताल में हुआ था. वह 80 साल के थे. रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहे थे.
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न्यूज 18 हिंदी में एंटरटेनमेंट सेक्शन में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे मुनीष कुमार दिल्ली के रहने वाले हैं. डिजिटल मीडिया में उन्हें 10 साल का अनुभव है.राजधानी कॉलेज (DU) से पॉलिटिकल साइंस (ऑनर्स) की पढ…

