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Meerut Blue Drum Murder Case: मेरठ की जिला अदालत द्वारा ने नीले ड्रम केस में मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा सुनाया है. दोनों आरोपियों को पवन जल्लाद फांसी देंगे. कोर्ट के इस फैसले पर उन्होंने खुशी जताई है. उन्होंने कहा कि फांसी की सजा से अपराधियों की रूह कांप जाती है. ऐसे जघन्य मामलों में सजा जल्द मिलनी चाहिए. उन्होंने निर्भया केस के दोषियों को फांसी देने के अपने अनुभव को भी साझा किया.
मुस्कान-साहिल को फांसी देंगे जल्लाद पवन.
Meerut Drum Murder Case Punishment: उत्तर प्रदेश के मेरठ में चर्चित ‘नीले ड्रम वाले सौरभ हत्याकांड’ मामले में जिला कोर्ट फांसी की सजा सुनाई है. इस फैसले के आने के बाद देश के गिने-चुने और अनुभवी जल्लादों में शुमार पवन जल्लाद ने अपनी खुशी जाहिर की है. न्यूज18 से एक्सक्लूसिव बातचीत करते हुए पवन जल्लाद ने कहा कि ऐसी जघन्य वारदातों को अंजाम देने वाले दरिंदों को ऐसी ही सख्त सजा मिलनी चाहिए, ताकि समाज में एक कड़ा संदेश जाए और अपराधियों के दिलों में कानून का खौफ पैदा हो.
पवन जल्लाद ने फांसी की प्रक्रिया और इसके खौफ का जिक्र किया है, उन्होंने कहा कि फांसी की सजा से हमेशा मुजरिम डरेगा. उन्होंने कहा कि फांसी के फंदे में दर्द और तड़प दोनों होती है. इसका नाम सुनते ही कोई भी व्यक्ति आधा मर जाता है. जब अदालत से इस तरह के जघन्य अपराधियों को मौत की सजा मिलती है, तो उनकी रूह कांप जाती है. पवन का मानना है कि ऐसे मामलों में न्याय की प्रक्रिया को लंबा नहीं खींचना चाहिए, बल्कि दोषियों को जल्द से जल्द उनके अंजाम तक पहुंचाया जाना चाहिए ताकि पीड़ितों के परिजनों को मानसिक शांति मिल सके.
पवन जल्लाद ने बताई फांसी देने की पूरी प्रक्रिया
इंटरव्यू के दौरान पवन जल्लाद ने यह भी विस्तार से बताया कि किस तरह से एक मुजरिम को फंदे पर लटकाया जाता है. उन्होंने कहा कि फांसी देने से दो-तीन दिन पहले ही रस्से का ट्रायल कर लिया जाता है. तय दिन पर मुजरिम के चेहरे पर काला कपड़ा डाला जाता है, उसके हाथ-पैर बांधे जाते हैं और जेल अधीक्षक (सुपरिंटेंडेंट) के इशारा करते ही लीवर खींच दिया जाता है. लीवर खींचने के मात्र पंद्रह मिनट के भीतर ही व्यक्ति की सांसें थम जाती हैं और करीब तीस मिनट बाद जेल के डॉक्टर जाकर उसकी नब्ज़ चेक करते हैं और मौत की पुष्टि करते हैं.
निर्भया के दोषियों को फांसी देने का अनुभव
आपको बता दें कि पवन जल्लाद वही शख्स हैं जिन्होंने देश को झकझोर देने वाले बहुचर्चित निर्भया रेप केस के चारों दोषियों को 20 मार्च 2020 को तिहाड़ जेल में फांसी के फंदे पर लटकाया था. उस ऐतिहासिक पल को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उन अपराधियों को उनके अंजाम तक पहुंचाने के बाद उन्हें भारी संतुष्टि मिली थी. अपने करियर में अकेले चार फांसी देने के अलावा वह अपने दादा के साथ पांच अन्य फांसियों में भी शामिल रह चुके हैं. आज भी वह मेरठ जिला कारागार अक्सर जाते हैं और वहां के फांसीघर का नियमित निरीक्षण करते हैं, जिसे लेकर जेल प्रशासन द्वारा उन्हें उचित मानदेय भी दिया जाता है.
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सिविल सर्विसेज की तैयारी करते-करते कब 4 साल पहले पत्रकारिता की ओर झुकाव हो गया पता ही नहीं चला. नाम दीप राज दीपक है. वर्तमान में News18 हिंदी के साथ जुड़े हुए हैं. पद सब-एडिटर …

