नई दिल्ली. दो बार की ओलंपिक चैंपियन और दिग्गज एथलीट शौने मिलर-उइबो ने अपने शानदार करियर में एक नया और बेहद रोमांचक अध्याय जोड़ने का मन बना लिया है. वह महिलाओं की 400 मीटर रेस का विश्व रिकॉर्ड तोड़ना चाहती हैं. वेदांता दिल्ली हाफ मैराथन 2026 की इंटरनेशनल इवेंट एंबेसडर के रूप में भारत आई मिलर-उइबो ने इन इरादों खुलकर जाहिर किया है. वह आगामी रविवार को आयोजित होने वाले दिल्ली हाफ मैराथन के 21वें एडिशन में धावकों का उत्साह बढ़ाने के लिए विशेष रूप से मौजूद रहेंगी.
वेदांता दिल्ली हाफ मैराथन 2026 के लिए दिल्ली पहुंचीं शौने मिलर-उइबो (Shaunae Miller-Uibo) ने अपने करियर के अब तक के सफर पर बात करते हुए बताया कि उन्होंने 400 मीटर स्पर्धा में वह हर बड़ा खिताब और मुकाम हासिल कर लिया है, जिसे एक एथलीट जीत सकता है. इसी वजह से अब उनके सामने नए और बड़े लक्ष्य तय करने का समय आ गया है. उन्होंने कहा कि वह विश्व रिकॉर्ड तोड़ने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक देना चाहती हैं. पिछले कुछ वर्षों में महिला एथलीटों ने जिस तरह का प्रदर्शन किया है और 400 मीटर की दौड़ को 48 सेकंड से भी कम समय में पूरा किया है, उससे उनका आत्मविश्वास काफी बढ़ा है. उन्हें पूरा यकीन है कि वह भी इस जादुई आंकड़े को पार करने की पूरी क्षमता रखती हैं. उनका मानना है कि जब दुनिया की बेहतरीन धावक एक-दूसरे के खिलाफ ट्रैक पर उतरती हैं, तो यह प्रतिस्पर्धा सभी को अपनी सीमाओं से आगे निकलने के लिए प्रेरित करती है.
वेदांता दिल्ली हाफ मैराथन और भारत यात्रा को लेकर उत्साह
भारत की अपनी पहली यात्रा को लेकर यह दिग्गज एथलीट काफी उत्साहित नजर आईं. उन्होंने वेदांता दिल्ली हाफ मैराथन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह केवल दौड़ने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह एक बहुत बड़ा सामुदायिक आयोजन है. इस तरह के आयोजन समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों को एक मंच पर लाते हैं, जहां वे अलग-अलग सामाजिक कार्यों और उद्देश्यों के समर्थन में एकजुट होकर अपनी भागीदारी दर्ज कराते हैं. यह आयोजन लोगों को अपनी दैनिक भागदौड़ भरी जिंदगी से बाहर निकालकर एक-दूसरे के साथ जुड़ने का सुनहरा मौका देता है. उन्होंने इस बात पर भी बेहद खुशी जताई कि इस साल इस मैराथन में हिस्सा लेने वाले प्रतिभागियों की संख्या में भारी इजाफा हो रहा है, जिसमें महिलाओं की बढ़ती भागीदारी एक सकारात्मक संकेत है. उन्हें पूरी उम्मीद है कि इस साल की दौड़ आने वाले समय में और अधिक महिलाओं को अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित करेगी.
दो बच्चों की मां बनने के बाद ट्रैक पर वापसी का कठिन सफर
मिलर-उइबो का यह सफर और भी ज्यादा प्रेरणादायक इसलिए बन जाता है क्योंकि उन्होंने मातृत्व के बाद ट्रैक पर शानदार वापसी की है. उन्होंने साल 2023 में अपने बेटे और 2025 में अपनी बेटी को जन्म दिया. बच्चों के जन्म के बाद उन्होंने अपनी खोई हुई गति और फिटनेस को दोबारा हासिल करने के लिए बेहद कड़ी मेहनत की. बहामास की राजधानी नासाउ में अपने पिता के मार्गदर्शन में अभ्यास करते हुए उन्होंने अपनी फिटनेस पर पूरा ध्यान दिया. मां बनने के बाद खेल में वापसी करने के शुरुआती दिनों को याद करते हुए उन्होंने बताया कि उन्हें खुद को काफी समय और धैर्य देना पड़ा. वह चाहती थीं कि बच्चे के जन्म के तुरंत बाद वह वहीं से शुरुआत करें जहां उन्होंने छोड़ा था, लेकिन शारीरिक क्षमता को दोबारा विकसित करने के लिए उन्हें भारी मशक्कत करनी पड़ी. हालांकि, इस सत्र ने साबित कर दिया है कि उनकी रफ्तार पूरी तरह से वापस आ गई है और वह मैदान पर उतरने के लिए बेकरार हैं.
बच्चों की मौजूदगी ने दिया खेल को नया आयाम
मां बनने के बाद उनके जीवन और खेल के नजरिए में भी काफी बदलाव आया है. उनके बच्चों की मौजूदगी ने उनके खेल के उद्देश्यों को एक नया और गहरा अर्थ दिया है. अब उन्हें अपने बच्चों को यह दिखाने का अवसर मिलता है कि उनकी मां मैदान पर क्या कमाल करती हैं और उन्हें उम्मीद है कि उनका यह संघर्ष उनके बच्चों के लिए भी एक बड़ी प्रेरणा बनेगा.
लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 की रणनीति
भविष्य की योजनाओं पर बात करते हुए उन्होंने लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 की तैयारियों का भी जिक्र किया. उन्होंने स्पष्ट किया कि अगले ओलंपिक में वह केवल एक ही स्पर्धा में हिस्सा लेंगी, हालांकि अभी यह तय नहीं हुआ है कि वह 200 मीटर होगी या 400 मीटर. उन्होंने कहा कि उनका सपना हमेशा से 200 मीटर में ओलंपिक पदक जीतने का रहा है, लेकिन दूसरी तरफ 400 मीटर में लगातार तीन ओलंपिक स्वर्ण पदक जीतने का ऐतिहासिक कारनामा अब तक किसी भी महिला एथलीट ने नहीं किया है. वह अपने कोच और टीम के साथ मिलकर इन दोनों विकल्पों पर विचार करेंगी और फिर कोई अंतिम फैसला लेंगी.
41 हजार से अधिक धावकों का बढ़ाएंगी हौसला
वेदांता दिल्ली हाफ मैराथन में 41 हजार से अधिक धावकों के हिस्सा लेने की उम्मीदों पर बात करते हुए उन्होंने लंबी दूरी के इन धावकों के अदम्य साहस, उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति और मानसिक मजबूती की खुलकर तारीफ की. उन्होंने कहा कि हाफ मैराथन जैसी कठिन चुनौती को स्वीकार करने के लिए बहुत मजबूत मानसिकता की जरूरत होती है. ऐसा हर धावक केवल अपनी रफ्तार को ही चुनौती नहीं दे रहा होता, बल्कि अपनी शारीरिक क्षमताओं की सीमाओं को लांघने की कोशिश कर रहा होता है. उन्होंने यह भी साझा किया कि एथलेटिक्स को अलविदा कहने के बाद भविष्य में मैराथन दौड़ना उनकी इच्छाओं में शामिल है.
युवा और भारतीय एथलीटों के लिए सफलता का मंत्र
अंत में भारतीय खिलाड़ियों के नाम अपने संदेश में मिलर-उइबो ने कहा कि किसी भी खेल में सफलता हासिल करने के लिए समय और धैर्य सबसे बड़े हथियार हैं. चोट और असफलताएं हर खिलाड़ी के करियर का हिस्सा होती हैं, लेकिन यही मुश्किलें इंसान को अंदर से मजबूत बनाती हैं और एक शानदार वापसी की इबारत लिखती हैं. उन्होंने खिलाड़ियों को सलाह दी कि वे कड़ी मेहनत करते रहें, खेल का पूरा आनंद लें और अपने प्रशिक्षण तथा खुद पर अटूट विश्वास बनाए रखें.
उपलब्धियों से भरा रहा है अब तक का करियर
बता दें कि शौने मिलर-उइबो ने रियो ओलंपिक 2016 और टोक्यो ओलंपिक 2020 में महिलाओं की 400 मीटर दौड़ का स्वर्ण पदक अपने नाम किया था. फ्रांस की दिग्गज मैरी-जोस पेरेक के बाद वह लगातार दो ओलंपिक में 400 मीटर का गोल्ड मेडल जीतने वाली इतिहास की केवल दूसरी महिला हैं. इसके अलावा उन्होंने साल 2022 में यूजीन में आयोजित विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी विश्व चैंपियन का ताज अपने सिर पर सजाया था. प्रोकैम इंटरनेशनल के बैनर तले आयोजित होने वाली इस प्रतिष्ठित वेदांता दिल्ली हाफ मैराथन का 21वां संस्करण रविवार, 18 अक्टूबर 2026 को जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम से पूरी भव्यता के साथ शुरू होगा.

