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UP Panchayati Election: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराने का निर्देश दिया है. एक तरफ विधानसभा चुनाव दूसरी ओर पंचायती इलेक्शन इसे देखते हुए राजनीतिक सियासत गरमा गई है. समाजवादी पार्टी ने कोर्ट के आदेश का स्वागत किया है. वहीं, पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा है कि आदेश का अध्ययन करने के बाद ही अगला कदम उठाया जाएगा.
तीन महीने में पंचायत चुनाव कराने का इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश. (फाइल फोटो)
Allahabad High Court: उत्तर प्रदेश में सारी पार्टियां अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी हुईं हैं. इसी बीच 15 अक्टूबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले से राजनीतिक हलचल मच गई है. दरअसल, हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग को अगले तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराने का निर्देश दिया है. यह फैसला वकील इम्तियाज हुसैन, दशरथ यादव और अन्य की ओर से दाखिल की गई याचिकाओं पर सुनवाई के बाद आया है. अदालत के इस निर्देश के बाद प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां शुरू हो गई हैं. दूसरी ओर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं.
हाईकोर्ट के इस फैसले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है. समाजवादी पार्टी ने अदालत के इस आदेश का स्वागत करते हुए सरकार से अपील की है कि चुनाव प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की देरी न की जाए. साथ ही, सपा नेताओं ने आशंका जताई है कि यदि चुनाव में हार का डर हुआ तो सरकार इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती भी दे सकती है. वहीं, दूसरी ओर पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि अदालत के आदेश की पूरी कॉपी का अध्ययन करने के बाद ही सरकार अपनी आगे की रणनीति तय करेगी.
प्रधान संघ ने समयसीमा को बताया चुनौतीपूर्ण
एक तरफ जहां राजनीतिक दल अपनी-अपनी तैयारियों में जुट गए हैं, वहीं राष्ट्रीय पंचायती राज प्रधान संघ ने तीन महीने की समयसीमा के भीतर चुनाव संपन्न कराने की व्यावहारिकता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश सिंह का मानना है कि इतनी कम अवधि में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की प्रशासनिक और जमीनी तैयारियां पूरी करना सरकार और निर्वाचन आयोग दोनों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होगा. मौसम, मतदाता सूचकांक और सुरक्षा व्यवस्था जैसी व्यावहारिक अड़चनों को देखते हुए यह देखना अहम होगा कि जिला प्रशासन इस समयावधि में कैसे तालमेल बिठाता है.
अब टिकी हैं सबकी निगाहें सरकार के अगले कदम पर
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब हर किसी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राज्य सरकार अदालत के आदेश का पालन करते हुए तीन महीने में चुनाव करवाती है या फिर कानूनी विकल्पों का सहारा लेती है. पंचायत चुनाव ग्रामीण भारत की राजनीति की धुरी माने जाते हैं, ऐसे में गांव की सरकार चुनने को लेकर चल रही यह खींचतान आने वाले दिनों में और अधिक रंग दिखा सकती है. सरकार के रुख साफ होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि तय समयसीमा में चुनावी रण का बिगुल बजेगा या मामला कानूनी दांवपेंच में उलझेगा.
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सिविल सर्विसेज की तैयारी करते-करते कब 4 साल पहले पत्रकारिता की ओर झुकाव हो गया पता ही नहीं चला. नाम दीप राज दीपक है. वर्तमान में News18 हिंदी के साथ जुड़े हुए हैं. पद सब-एडिटर …

