ग्रेटर नोएडा: भारतीय हस्तशिल्प और पारंपरिक कला की पहचान अब देश की सीमाओं से निकलकर विदेशी बाजारों तक पहुंच रही है. ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो मार्ट में भारतीय हस्तकला से तैयार उत्पादों की खास झलक देखने को मिली. यहां पारंपरिक भारतीय कला को आधुनिक फैशन और डिजाइन के साथ जोड़कर तैयार किए गए उत्पाद लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं.
हैंडमेड पेंटिंग, एंब्रॉयडरी और पर्यावरण के अनुकूल सामग्री से तैयार इन उत्पादों की विदेशों में भी मांग बढ़ रही है. नेशनल हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट्स के प्रतिनिधि अजय जैन ने बताया कि कंपनी भारतीय संस्कृति और पारंपरिक कला को आधुनिक डिजाइन के साथ जोड़कर अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने का काम कर रही है.
पारंपरिक कला को आधुनिक डिजाइन से जोड़ने की पहल
अजय जैन ने बताया कि भारत में पारंपरिक कला की कई ऐसी विधाएं हैं, जिनकी अपनी अलग पहचान है. हैंडमेड पेंटिंग और एंब्रॉयडरी जैसी कलाओं को एक साथ मिलाकर नए डिजाइन तैयार किए जाते हैं. इन डिजाइनों को आधुनिक फैशन और लोगों की पसंद के अनुसार विकसित किया जाता है. इससे पारंपरिक कला को नया रूप मिलता है और उससे तैयार उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार के अनुरूप बन पाते हैं.
उन्होंने बताया कि कंपनी का उद्देश्य भारतीय संस्कृति और विदेशी बाजारों की पसंद के बीच बेहतर तालमेल बनाना है. इसके लिए उत्पादों के डिजाइन और उनकी बनावट पर विशेष ध्यान दिया जाता है. पारंपरिक कारीगरी को आधुनिक जरूरतों के साथ जोड़कर ऐसे उत्पाद तैयार किए जाते हैं, जो उपयोगी होने के साथ-साथ देखने में भी आकर्षक हों.
एंब्रॉयडरी वाली डायरी बनी आकर्षण का केंद्र
कंपनी के उत्पादों में एंब्रॉयडरी से सजी डायरी खास हैं. देखने में यह सामान्य डायरी जैसी लगती है, लेकिन इसके कवर पर कपड़े के ऊपर की गई बारीक कढ़ाई इसे अलग पहचान देती है. अजय जैन ने बताया कि इस डायरी के डिजाइन में दक्षिण भारत की पारंपरिक एंब्रॉयडरी कला का इस्तेमाल किया गया है. कढ़ाई के कारण डायरी का कवर आकर्षक और अनोखा दिखाई देता है.
उन्होंने बताया कि इस तरह के उत्पादों को विदेशों में भी पसंद किया जा रहा है. डायरी की कीमत लगभग चार यूरो, यानी करीब 450 रुपये बताई गई. कंपनी पारंपरिक कारीगरी के जरिए सामान्य उपयोग की वस्तुओं को भी विशेष और आकर्षक बनाने का प्रयास कर रही है.
लेमन डिजाइन भी ट्रेंड में शामिल
अजय जैन ने बताया कि कंपनी समय के साथ बदलते फैशन और डिजाइन के रुझानों पर भी ध्यान देती है. इसी क्रम में लेमन डिजाइन से तैयार उत्पाद भी आकर्षण का केंद्र हैं. इसमें कपड़े पर कढ़ाई के माध्यम से नींबू का डिजाइन बनाया जाता है, जबकि चारों ओर की एंब्रॉयडरी इसे अलग रूप देती है. इस तरह के डिजाइन पारंपरिक कारीगरी को आधुनिक पसंद से जोड़ने का उदाहरण हैं.
उन्होंने कहा कि कंपनी का प्रयास है कि भारतीय हस्तकला केवल सजावटी वस्तुओं तक सीमित न रहे, बल्कि उसे रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले उत्पादों में भी शामिल किया जाए. इससे पारंपरिक कला को नए अवसर मिलते हैं और ग्राहकों को भी अलग तरह के उत्पाद मिलते हैं.
15 देशों तक पहुंच रहे उत्पाद
उन्होंने कहा कि कंपनी के उत्पाद करीब 15 देशों में पहुंच रहे हैं. विदेशी बाजारों में बड़े ब्रांड भी कंपनी के साथ जुड़ते हैं. कंपनी भारतीय संस्कृति और विदेशी ग्राहकों की पसंद को ध्यान में रखते हुए उत्पाद तैयार करती है. इसके लिए रंगों, डिजाइन और कारीगरी में अलग-अलग प्रयोग किए जाते हैं. उन्होंने बताया कि भारतीय कला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए पारंपरिक डिजाइन को आधुनिक जरूरतों के अनुसार विकसित करना जरूरी है. इससे उत्पादों की उपयोगिता और आकर्षण दोनों बढ़ते हैं.
पर्यावरण के अनुकूल उत्पादों पर भी जोर
नेशनल हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट्स स्टेशनरी और लाइफस्टाइल से जुड़े उत्पाद भी तैयार करती है. कंपनी की विशेषता पर्यावरण के अनुकूल सामग्री का इस्तेमाल करना है. इसके उत्पादों में पुनर्चक्रित सूती कपड़े के अवशेषों से तैयार सामग्री का उपयोग किया जाता है. इससे पारंपरिक कारीगरी के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी महत्व मिलता है.

