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Kanpur News: कानपुर के बिठूर नगर पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में भाजपा ने उपचुनाव में बंपर जीत हासिल की है. दरअसल इस सीट की अध्यक्ष डॉ. निर्मला सिंह थी. मगर उनके निधन के बाद सीट खाली हो गई थी, जिसके कारण यहां उपचुनाव कराया गया और पूर्व अध्यक्ष डॉ. निर्मला सिंह के बड़े बेटे और भाजपा प्रत्याशी समरेंद्र सिंह राणा ने धमाकेदार जीत हासिल की.
बिठूर उपचुनाव समरेंद्र सिंह राणा
Kanpur: कानपुर में पूर्व अध्यक्ष डॉ. निर्मला सिंह के निधन के बाद खाली हुई बिठूर नगर पंचायत अध्यक्ष पद की सीट पर 13 अक्टूबर को उपचुनाव संपन्न कराया गया था, जिसका परिणाम 15 अक्टूबर को घोषित हो गया है. इस चुनाव में पूर्व अध्यक्ष डॉ. निर्मला सिंह के बड़े बेटे और भाजपा प्रत्याशी समरेंद्र सिंह राणा ने धमाकेदार जीत हासिल की है. उन्होंने कहा कि बिठूर की जनता के आशीर्वाद से मां की विरासत को संभालेंगे और जिस तरह से बिठूर के लिए उनके परिवार ने हमेशा कार्य किया है, इसी तरह वह बिठूर का विकास करेंगे.
साल 2000 में हुए बिठूर नगर पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में डॉक्टर निर्मला सिंह ने अपनी ही देवरानी आशा सिंह को 2100 वोटों से हराकर इस सीट पर जीत हासिल की थी और यह जीत का सिलसिला कभी नहीं थमा. वह जब तक जीवित रहीं, इस पद पर चुनाव जीतकर जिम्मेदारी संभालती रहीं. इस दौरान उन्होंने बिठूर नगर पंचायत अध्यक्ष पद के साथ ही मां होने का भी फर्ज बखूबी निभाया और अपने बच्चों को काबिल बनाया.
13 महीने बचा था डॉ. निर्मला का कार्यकाल
डॉक्टर निर्मला सिंह के छोटे बेटे अभिजीत सिंह सांगा भारतीय जनता पार्टी से बिठूर विधानसभा सीट से ही विधायक हैं, लेकिन जिस तरह डॉक्टर निर्मला सिंह ने अपनी जिम्मेदारी निभाई थी, उसकी प्रशंसा आज भी बिठूर के लोग करते हैं. उनके निधन के बाद उनका कार्यकाल 13 महीने का बचा हुआ था, जिसके चलते इस सीट पर उपचुनाव कराया गया. भारतीय जनता पार्टी ने डॉक्टर निर्मला सिंह की परंपरागत सीट पर उनके बड़े बेटे राणा समरेंद्र सिंह को भाजपा के टिकट पर चुनाव मैदान में उतारा.
बिठूर की जनता ने अन्य पार्टियों को नकारा
हालांकि राणा समरेंद्र सिंह के सामने 6 अन्य प्रत्याशी भी मैदान में थे, जिनमें कांग्रेस ही एक ऐसी पार्टी थी, जिसने अपना प्रत्याशी मैदान में उतारा था. समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी पहले से ही बैकफुट पर थी और दोनों ही पार्टियों ने इस चुनाव में अपना प्रत्याशी नहीं उतारा था. हालांकि एक निर्दलीय प्रत्याशी आदर्श द्विवेदी विभु को पूर्व सपा विधायक मुनींद्र शुक्ला का समर्थन प्राप्त था और वह खुलकर उसके लिए वोट मांग रहे थे. लेकिन फिर भी बिठूर की जनता ने सभी को नकार दिया और इस पूरे मुकाबले में राणा समरेंद्र सिंह ने एकतरफा जीत हासिल करते हुए निर्दलीय प्रत्याशी आदर्श द्विवेदी विभु को चुनाव में धूल चटा दी . अपनी मां की परंपरागत सीट पर विरासत संभालने के लिए वो जनता के बीच निर्वाचित होकर आ गए.
विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल
साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पूर्व बिठूर नगर पंचायत अध्यक्ष के उपचुनाव को बिठूर विधानसभा सीट का सेमीफाइनल कहा जा रहा था, क्योंकि जहां एक ओर भाजपा प्रत्याशी राणा समरेंद्र सिंह भाजपा विधायक अभिजीत सिंह सांगा के बड़े भाई हैं, तो वहीं दूसरी ओर निर्दलीय प्रत्याशी आदर्श द्विवेदी विभु पूर्व सपा विधायक जो बिठूर विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के प्रबल दावेदार भी हैं, मुनेंद्र शुक्ला का भतीजा है. ऐसे में मुनींद्र शुक्ला ने आदर्श द्विवेदी विभु को लड़ाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक रखी थी.
जनता ने सेमीफाइनल में भाजपा को पहनाया जीत का सेहरा
वहीं विधायक भी अपनी साख बरकरार रखना चाह रहे थे, क्योंकि यह सीट उनकी मां की परंपरागत सीट थी. उनकी मां लगातार 25 वर्ष इस सीट पर नगर पंचायत अध्यक्ष रही थी. ऐसे जनता ने सेमीफाइनल में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी राणा समरेंद्र सिंह के सिर जीत का सेहरा बांधकर आगामी विधानसभा चुनाव के परिणाम की ओर भी इशारा कर दिया है.
राणा समरेंद्र सिंह इस चुनाव में एक तरफा जीत हासिल करते हुए निकटतम प्रतिद्वंदी निर्दलीय प्रत्याशी आदर्श द्विवेदी उर्फ विभु को 2483 मतों के भारी अंतर से हराकर जीत हासिल की. इस चुनाव में कांग्रेस समेत अन्य पांचो प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई. इस शानदार जीत के बाद भाजपा समर्थकों ने जमकर जश्न मनाया और आतिशबाजी की.

