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Napier Grass Farming: पशुओं के लिए बार-बार हरे चारे की बुवाई करने से परेशान किसानों के लिए नेपियर घास एक अच्छा विकल्प हो सकती है. इसकी खासियत है कि एक बार खेत में लगाने के बाद कई साल तक इसकी कटाई की जा सकती है. उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अमित कुमार वर्मा के मुताबिक, नेपियर घास की जड़ें तेजी से फैलती हैं और सही देखभाल के साथ इससे लंबे समय तक हरा चारा मिलता रहता है. इसे खेत के अलावा बाग के किनारे भी लगाया जा सकता है, बस जड़ों में पानी जमा नहीं होना चाहिए. खास बात यह है कि पशुपालन विभाग इसकी बुवाई के लिए किसानों को सहायता भी दे रहा है. जानिए इसकी जड़ कहां मिलेगी और इसे लगाने का सही तरीका क्या है.
Napier Grass Farming: अगर आप किसान हैं और पशुपालन भी करते हैं, तो पशुओं के लिए हरे चारे का इंतजाम करना आपके लिए भी कभी न कभी बड़ी चुनौती रही होगी. आमतौर पर किसानों को हर 2 से 3 महीने में हरे चारे की बुवाई करनी पड़ती है. लेकिन एक ऐसी घास भी है, जिसे खेत में लगाने के बाद बार-बार काटकर पशुओं के लिए हरा चारा मिल सकता है. इससे आपका काम काफी आसान हो सकता है. इस घास का नाम नेपियर है. इसकी खास बात यह है कि एक बार लगाने के बाद इसकी कई बार कटाई की जा सकती है. ऐसे में पशुपालकों को बार-बार चारे की बुवाई करने की जरूरत कम पड़ सकती है.
लोकल 18 से बातचीत में उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अमित कुमार वर्मा बताते हैं कि नेपियर घास पशुपालकों के लिए हरे चारे का अच्छा विकल्प है. इसकी जड़ें फैलती हैं और कटाई के बाद दोबारा बढ़ने लगती है. सही देखभाल की जाए, तो इससे 2 से 3 साल तक हरा चारा मिल सकता है. आइये जानते हैं कैसे आप इसे आसानी से उगाकर अपने पशुओं के लिए बिना मुश्किल के चारे का इस्तेमाल कर सकते हैं.
एक बार लगाएं नेपियर घास, बार-बार करें कटाई
डॉ. अमित कुमार वर्मा के मुताबिक, पशुपालकों को अक्सर हर 2 से 3 महीने में हरे चारे की बुवाई करनी पड़ती है. दूसरी ओर, नेपियर घास को एक बार लगाने के बाद कई बार काटा जा सकता है. इससे पशुओं के लिए हरे चारे का इंतजाम करना आसान हो जाता है. हालांकि, इसके लिए समय-समय पर घास की देखभाल करना और जरूरत के अनुसार पानी देना जरूरी है.
नेपियर घास लगाने के लिए मिल रही 4 हजार रुपये की मदद
डॉ. वर्मा बताते हैं कि पशुपालन विभाग नेपियर घास को बढ़ावा देने के लिए किसानों को 4 हजार रुपये की मदद दे रहा है. इसका मकसद किसानों को इस घास की खेती के लिए प्रोत्साहित करना है, ताकि पशुओं के लिए हरे चारे की कमी न हो. नेपियर घास की जड़ें पशुपालन विभाग से भी मिल सकती हैं. किसान वहां से जानकारी लेकर इन्हें अपने खेत में लगा सकते हैं. नेपियर घास को खेत में लगाने के साथ-साथ बाग के किनारे, सड़क के किनारे या नाले के पास भी उगाया जा सकता है. इसकी रोपाई करते समय एक बात का ध्यान रखना जरूरी है कि जड़ों के पास पानी जमा न हो. घास को बढ़ने के लिए समय-समय पर पानी मिलना चाहिए, लेकिन खेत में जलभराव नहीं होना चाहिए.
पशुओं को हरा चारा मिलने में होगी आसानी
डॉ. वर्मा के मुताबिक, नेपियर घास पशुओं के लिए हरे चारे का एक उपयोगी विकल्प है. इसमें विटामिन और मिनरल पाए जाते हैं. पशुओं को संतुलित आहार के साथ हरा चारा देने से उनके पोषण में मदद मिलती है. इससे दूध उत्पादन बनाए रखने में भी मदद मिल सकती है. दूसरी घासों की बुवाई के बीच जब हरे चारे की कमी होने लगती है, तब नेपियर घास पशुपालकों के काम आ सकती है.
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Seema Nath is a digital journalist and content creator with 6 years of experience in journalism, including ground reporting, regional news coverage and feature writing. She currently works as a Content Producer…

