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Congress Politics News : कांग्रेस पार्टी में इस समय सियासी भूचाल आ रखा है. पहले जूते-चप्पल चले और अब पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के पार्टी छोड़ने की बात सामने आने लगी है. हालांकि, सवाल यह है कि अगर अजय राय पार्टी छोड़ते हैं तो क्या वो घर वापसी करने वाले हैं या फिर कोई और ही पार्टी ज्वॉइन कर लेंगे?
अजय राय छोड़ देगे राहुल का साथ?
लखनऊ : भला उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होना है. मगर, सियासी गलियारों में उठा-पटक, अदला-बदली और बयानबाजी अभी से शुरू हो गई है. कभी किसी पार्टी को झटका लगता है तो कभी को. अब क्या कांग्रेस को झटका लगने वाला है. कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय की नाराजगी के बारे में राजनीतिक गलियारों में काफी बात हो रही है. सवाल उठ रहा कि जूता-चप्पल कांड क्या सबसे पुरानी पार्टी पर भारी पड़ जाएगा. क्या अजय राय फिर घर वापसी कर लेंगे या फिर बसपा-सपा का दामन थाम लेंगे. अब ये सारी चर्चाएं क्यों हो रही हैं आइए समझने की कोशिश करते हैं.
वाराणसी गए अजय राय
प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए गए अजय राय और महिला कांग्रेस नेता ममता चौधरी के बीच विवाद के बाद यूपी कांग्रेस में गुटबाजी चरम पर पहुंच चुकी है. अजय राय नाराज होकर वाराणसी चले गए. इतना ही नहीं, उनके दिल्ली चलो मार्च और राहुल गांधी द्वारा बुलाए गए विरोध प्रदर्शन में उनकी अनुपस्थिति के बाद से ही पार्टी छोड़ने की अटकलें जोर पकड़ रही हैं. राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा गर्म है कि क्या अजय राय कांग्रेस को अलविदा कहकर एक बार फिर अपने पुराने घर यानी भारतीय जनता पार्टी में वापसी करेंगे.
यह है मामला
दरअसल, 11 अक्टूबर को नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ के पदभार ग्रहण समारोह के दौरान कांग्रेस मुख्यालय में अजय राय और ममता चौधरी के बीच विवाद हो गया था. देखते ही देखते दोनों पक्षों के समर्थक आमने-सामने आ गए थे. मामला कहासुनी से बढ़कर हाथापाई तक पहुंच गया था. दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर अभद्रता और दुर्व्यवहार के आरोप लगाए. ममता चौधरी ने भी अजय राय के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. उन्होंने ऐलान कर दिया है कि राहुल गांधी और राजेंद्र पाल गौतम से वह अजय राय की शिकायत करेंगी कि अजय राय पहले से दलित विरोधी रहे हैं और पहले से मीटिंग में दलितों के लिए सीट नहीं रखते थे. यह कुछ ऐसे आरोप है जो कांग्रेस के भीतर भूचाल ला सकते हैं.
डंके की चोट पर राजनीति करने वाले नेता
इन सबके बाद अजय राय के कांग्रेस छोड़ने की अटकलें लगाई जाने लगी. हालांकि, अजय राय डंके की चोट पर अपनी ठसक पर राजनीति करने के लिए जाने जाते हैं. तीन बार बीजेपी से विधायक रहने के बावजूद भाजपा छोड़ने में उन्हें वक्त नहीं लगा तो कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष पद से बेआबरू होकर हटने के बाद कांग्रेस का मोह त्यागने में भी उन्हें वक्त नहीं लगेगा, ऐसा उन्हें जानने वाले कह रहे हैं.
क्या अजय राय की दी गई है बलि?
इधर ये बात भी उठ रही है कि अजय राय को इसलिए पद से हटाया गया क्योंकि अखिलेश से ठनी हुई थी. जबकि प्रमोद तिवारी और आराधना मिश्रा सपा-कांग्रेस गठबंधन के लिए समाजवादी पार्टी के पसंदीदा चेहरे भी हैं. ऐसे में अजय राय को यह मालूम है कि गठबंधन की राह को आसान बनाने के लिए उनकी बलि दी गई है और इससे वह बेहद नाराज भी हैं.
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