लखीमपुर खीरी: जिले में किसान खेती के साथ-साथ पशुपालन पर भी विशेष जोर देते हैं. जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में किसान गाय और भैंस पालकर अपनी आजीविका चलाते हैं.पशुपालन में अच्छा मुनाफा कमाने के लिए पशुओं को संतुलित आहार देना बेहद जरूरी होता है. खासकर दुधारू पशुओं के लिए हरे चारे की पर्याप्त उपलब्धता महत्वपूर्ण है. हरा चारा और पोषक तत्वों की कमी होने पर पशुओं के स्वास्थ्य के साथ-साथ दूध उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है. ऐसे में किसानों के लिए अजोला एक उपयोगी विकल्प बन सकता है. इसकी खास बात यह है कि इसे उगाने के लिए बड़े खेत या ज्यादा जमीन की जरूरत नहीं होती है. किसान घर के आसपास थोड़ी सी जगह में भी इसे तैयार कर सकते हैं.
पशुओं के लिए क्यों उपयोगी है अजोला?
पशुओं को स्वस्थ रखने और उनकी उत्पादन क्षमता बनाए रखने के लिए संतुलित आहार आवश्यक है. अजोला में प्रोटीन, अमीनो एसिड, विटामिन और कई खनिज तत्व पाए जाते हैं. इसमें कैल्शियम, फास्फोरस और आयरन जैसे खनिज भी मौजूद होते हैं. इसकी पौष्टिकता के कारण इसे गाय और भैंस के आहार में पूरक के रूप में शामिल किया जाता है. पशुपालक इसे हरे चारे और अन्य संतुलित पशु आहार के साथ मिलाकर खिलाते हैं. इससे पशुओं के आहार में पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलती है. हालांकि, अजोला किसी भी पशु के संपूर्ण आहार का विकल्प नहीं है. पशुओं को पर्याप्त सूखा चारा, हरा चारा, स्वच्छ पानी और जरूरत के अनुसार अन्य पोषक आहार देना भी जरूरी है.
अजोला उगाने का एक फायदा यह भी है कि पशुपालकों को पूरक हरे आहार के लिए पूरी तरह बाजार पर निर्भर नहीं रहना पड़ता. उचित देखभाल के साथ इसका उत्पादन घर पर किया जा सकता है. इससे छोटे स्तर पर पशुपालन करने वाले किसानों को भी लाभ मिल सकता है.
सीधी धूप से अजोला को बचाएं
अजोला की अच्छी बढ़वार के लिए पानी और अनुकूल वातावरण की आवश्यकता होती है इसे ऐसी जगह उगाना चाहिए, जहां बहुत तेज सीधी धूप न पड़ती हो. अत्यधिक गर्मी और पानी की खराब गुणवत्ता इसकी बढ़वार को प्रभावित कर सकती है. इसलिए इसकी नियमित देखभाल करना जरूरी है. अजोला उगाने के लिए किसान उपयुक्त बर्तन या गड्ढे में पानी भरकर इसकी शुरुआती मात्रा डाल सकते हैं. इसके बाद जरूरत के अनुसार पानी और पोषक तत्वों का प्रबंधन करना चाहिए. उत्पादन के दौरान साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना जरूरी है, ताकि इसमें गंदगी या अन्य अवांछित तत्व न मिलें। पशुओं को खिलाने से पहले अजोला को साफ पानी से धोना चाहिए. खराब गंध, सड़न या संदूषण होने पर इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.
दूध उत्पादन बढ़ाने में हो सकता है सहायक
दुधारू पशुओं में दूध उत्पादन कई कारकों पर निर्भर करता है। इनमें पशु की नस्ल, उम्र, स्वास्थ्य, ब्याने की अवस्था और आहार की गुणवत्ता प्रमुख हैं. संतुलित आहार में अजोला जैसे पोषक पूरक को शामिल करने से पशुओं की पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलती. किसानों को पशु के नियमित आहार में धीरे-धीरे शामिल करना चाहिए और पशु की प्रतिक्रिया पर नजर रखनी चाहिए. जरूरत पड़ने पर पशु चिकित्सक या पशु पोषण विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित रहेगा। इससे पशुओं को उनकी जरूरत के अनुसार सही मात्रा में आहार दिया जा सकेगा.
पशु चिकित्सक ने बताए अजोला के फायदे
बातचीत करते हुए पशु चिकित्सक डॉ. हनी सक्सेना ने बताया कि अजोला एक जलीय फर्न है, जो पानी की सतह पर तैरती है। इसमें प्रोटीन के साथ कई पोषक तत्व पाए जाते हैं. इसे कम जगह और कम खर्च में उगाया जा सकता है। ऐसे में छोटे पशुपालक भी इसका उत्पादन करके पशुओं के पूरक आहार के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं. डॉ. हनी सक्सेना के अनुसार, अजोला में प्रोटीन, आवश्यक अमीनो एसिड, विटामिन ए, विटामिन बी-12 और कैल्शियम, फास्फोरस व आयरन जैसे खनिज तत्व पाए जाते हैं. उन्होंने बताया कि संतुलित आहार के हिस्से के रूप में अजोला खिलाने से पशुओं के पोषण में सुधार लाने और दूध उत्पादन में मदद मिल सकती है. उन्होंने पशुपालकों को सलाह दी कि अजोला को साफ पानी में उगाएं और पशुओं को खिलाने से पहले उसकी गुणवत्ता सुनिश्चित करें. साथ ही, पशुओं को केवल एक ही प्रकार के आहार पर निर्भर न रखें. हरे चारे, सूखे चारे और अन्य जरूरी पोषक तत्वों का संतुलन बनाए रखना चाहिए.

