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Allahabad High Court News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्ति के बाद गलत वेतन का हवाला देकर कर्मचारियों के वेतन में कटौती या पेंशन-ग्रेच्युटी से वसूली पर उससे जुड़े विभाग को जमकर फटकार लगाई है. कोर्ट ने पीएसी के सेवानिवृत्त हेड कांस्टेबल की याचिका स्वीकार करते हुए विभाग द्वारा की गई 6.74 लाख रुपये से अधिक की कटौती को अवैध बताया है. अदालत ने विभाग को आदेश दिया है कि काटी गई पूरी रकम 8 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ आठ सप्ताह के भीतर कर्मचारी को वापस लौटाई जाए.
इलाहाबाद हाईकोर्ट.
Allahabad High Court: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए बड़ा आदेश जारी किया है. अदालत ने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद गलत वेतन निर्धारण (wrong pay fixation) का हवाला देकर न तो किसी कर्मचारी का वेतन घटाया जा सकता है और न ही उनकी पेंशन या ग्रेच्युटी जैसे सेवानिवृत्ति लाभों से किसी भी प्रकार की वसूली की जा सकती है. कोर्ट के इस ऐतिहासिक आदेश से सरकारी विभागों में मनमाने तरीके से रिकवरी करने वाले अधिकारियों को बड़ा झटका लगा है.
यह पूरा मामला उत्तर प्रदेश के प्रादेशिक आर्म्ड कांस्टेबुलरी (PAC) से जुड़ा है. एक सेवानिवृत्त हेड कांस्टेबल सूरज सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर विभाग की कार्रवाई को चुनौती दी थी. सूरज सिंह पुलिस में बतौर कांस्टेबल नियुक्त हुए थे. बाद में प्रोमोट होकर हेड कांस्टेबल के पद पर पहुंचे थे. वह 31 जुलाई 2021 को 9वीं वाहिनी पीएसी, मुरादाबाद से रिटायर हुए थे. रिटायरमेंट के समय उनके बकाये भुगतान के नाम पर विभाग द्वारा एक वचनपत्र भरवा लिया गया था, जिसके बाद विवादों का सिलसिला शुरू हुआ.
फिर शुरु हुआ पैसे काटने का खेल
मामले की सुनवाई जस्टिस अनीश कुमार गुप्ता की सिंगल बेंच में हुई. कोर्ट के सामने बताया गया कि 27 जुलाई 2022 को पुलिस मुख्यालय के वित्त नियंत्रक की एक चिट्ठी के आधार पर कमांडेंट 9वीं वाहिनी पीएसी ने सिंह का वेतन पुनर्निर्धारित कर दिया था. विभाग का तर्क था कि वर्ष 2016 से उनका वेतन गलत तरीके से तय हुआ था, जिसके चलते पूर्व तिथि यानी 24 फरवरी 2010 से वेतन संशोधित कर दिया गया. इसके बाद 24 फरवरी 2023 को आदेश जारी कर 6,74,404 रुपये का अधिक भुगतान बताते हुए कुल देय राशि में से कटौती कर ली गई थी.
गुस्से में हाईकोर्ट
ये मामला देखते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न शासनादेशों का साफ निर्देश हैं कि ग्रुप ‘सी’ और ‘डी’ के कर्मचारियों से सेवानिवृत्ति के बाद गलत वेतन निर्धारण के आधार पर कोई रिकवरी नहीं की जा सकती. अदालत ने पाया कि 16 जनवरी 2007 व 7 मई 2007 के शासनादेशों के अनुसार रिटायरमेंट के 34 महीने से पुराने मामलों में इस तरह का संशोधन नहीं किया जा सकता है. इसके अलावा, याची को बिना कोई कारण बताओ नोटिस दिए और बिना पक्ष रखने का अवसर दिए सीधे तौर पर उनके पैसे काटना पूरी तरह से नियम विरुद्ध और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ था.
वापस लौटाने के दिए आदेश
तमाम कानूनी पहलुओं और साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने वेतन पुनर्निर्धारण और कटौती से जुड़े सभी विवादित आदेशों को पूरी तरह से रद्द कर दिया है. अदालत ने विभाग को निर्देश दिया है कि याची के पेंशन राशिकरण से काटी गई 6,74,404 रुपये की पूरी राशि, इस आदेश की प्रमाणित प्रति प्रस्तुत करने के 8 सप्ताह के साथ 8 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ वापस की जाए. साथ ही, कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि याची की पेंशन और अन्य परिलाभों का निर्धारण उनकी सेवानिवृत्ति के समय प्राप्त अंतिम आहरित वेतन के आधार पर ही किया जाना चाहिए.
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सिविल सर्विसेज की तैयारी करते-करते कब 4 साल पहले पत्रकारिता की ओर झुकाव हो गया पता ही नहीं चला. नाम दीप राज दीपक है. वर्तमान में News18 हिंदी के साथ जुड़े हुए हैं. पद सब-एडिटर …
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