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Sharad Navratri: शारदीय नवरात्र की शुरुआत इस बार 11 अक्टूबर से होने जा रही है, जिसे लेकर देश भर में उत्साह का माहौल है. ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस बार देवी मां का आगमन ‘हाथी’ की सवारी पर हो रहा है, जिसे शास्त्रों में उत्तम वर्षा, सुख-समृद्धि और भरपूर खुशहाली का बहुत बड़ा संकेत माना गया है. इस बार नवरात्र के दौरान कई दुर्लभ महायोग और त्रि-ग्रहीय योग भी बन रहे हैं, जिससे साधकों की पूजा का कई गुना अधिक फल प्राप्त होगा. संगम नगरी प्रयागराज के प्रसिद्ध मां अलोप शंकरी देवी शक्तिपीठ में भी नवरात्र को लेकर भव्य तैयारियां पूरी कर ली गई हैं.
शारदीय नवरात्र पर क्या है खास.
प्रयागराज: शारदीय नवरात्र की शुरूआत रविवार 11 अक्टूबर से होने जा रही है. ग्रहों और नक्षत्रों के खास संयोग के चलते इस बार की नवरात्रि बेहद खास मानी जा रही है. धर्म और ज्योतिष के जानकारों के मुताबिक इस बार की शारदीय नवरात्रि पर देवी मां हाथी पर सवार होकर दर्शन देने आ रही हैं. यह शास्त्रों में अत्यंत शुभ माना गया है. यह अच्छी बारिश, सुख समृद्धि और भरपूर खुशहाली का संकेत माना गया है. नवरात्र के दौरान विशेष ग्रहों की चाल से कई महायोग बन रहे हैं. ज्योतिषीय गणना के मुताबिक त्रि-ग्रहीय योग जैसा अद्भुत संयोग भी बन रहा है. जिससे साधकों की साधना और पूजा का कई गुना अधिक फल उन्हें प्राप्त होगा. शारदीय नवरात्रि को लेकर संगम नगरी के भी देवी मंदिरों में खास तैयारी की गई है. मंदिरों में साफ सफाई के साथ ही फूलों से भव्य रूप से सजाया संवारा गया है.
संगम नगरी प्रयागराज में 52 शक्तिपीठों में एक श्री मां अलोप शंकरी देवी शक्तिपीठ स्थित है. यह स्थान गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती की त्रिवेणी से लगभग 3 किलोमीटर दूर स्थित है. अलोप शंकरी देवी मंदिर का प्रबंध श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी द्वारा किया जाता है. मंदिर के मुख्य पुजारी महंत यमुना पुरी के मुताबिक यह श्री महाविद्या के मूल स्थानों में से एक प्रमुख स्थान है. उनके मुताबिक हर शक्तिपीठ के अपने भैरव होते हैं. अलोप शंकरी शक्तिपीठ के ‘भव’ नाम के भैरव हैं. भैरव ही शक्तिपीठ की रक्षा करते हैं. उनके मुताबिक जब मां पार्वती सती हुई थीं तो उनके दाहिने हाथ की उंगलियां यहीं पर गिरी थी. उनके मुताबिक धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थ देने वाली मां अलोप शंकरी हैं. महंत यमुना पुरी महाराज ने कहा है कि मां सब की मनोकामनाएं पूरी करती हैं. लेकिन जिसका जैसा भाव होता है. उसे वैसे ही फल की उसे प्राप्ति होती है. उनके मुताबिक मंदिर के गर्भगृह में बेदी है. बेदी के अंदर श्रीयंत्र है और बेदी के उपर पालना है. यहां पर मां के पालने के स्वरूप में पूजा होती है.
नव विवाहित जोड़े आते हैं आशीर्वाद लेने
पालना मां और पुत्र के बीच के संबंध को दर्शाता है. उन्होंने कहा कि यहां पर संपूर्ण जीव जगत मां के लिए पुत्र के समान है. उनके मुताबिक ऐसी मान्यता है कि जिनके संताने उत्पन्न होती हैं वह यहां आकर पालने का स्पर्श कराते हैं. 16 संस्कारों में एक मुंडन संस्कार भी इस मंदिर में होता है. इसके साथ ही नव-विवाहित जोड़े भी अलोप शंकरी शक्तिपीठ में मां का आशीर्वाद लेने के लिए आते हैं. मां अलोप शंकरी देवी सुख समृद्धि और ईश्वर की देवी मानी जाती हैं. इसके अलावा नवरात्रि के नौ दिनों में विभिन्न प्रकार के साधक भी यहां पर अपनी साधना के लिए पहुंचते हैं. यहां पर सोमवार और शुक्रवार को भक्त दूर-दूर से मां को कढ़ाई चढ़ाने भी आते हैं.
यहां सभी मुराद पूरी होती हैं
वहीं मंदिर में आने वाले भक्त भी यहां आने को लेकर उत्साहित रहते हैं. भक्तों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से यहां पर आ रहे हैं. भक्तों का मां अलोप शंकरी देवी पर अटूट विश्वास है. भक्तों का कहना है कि सच्चे मन से जो भी मां से मांगते हैं वह मुरादें पूरी होती हैं. यहां आने वाले भक्त मां को नारियल और चुनरी चढ़ाते हैं. वहीं मंदिर के पुजारी उन्हें कुंड का जल प्रसाद के रूप में देते हैं. यहां आने वाले कई भक्त मां के सामने कान पड़कर उठक बैठक भी लगाते हैं. भक्तों को यहां पर कोई सजा नहीं दी जाती बल्कि स्वयं से भक्त जाने अनजाने हुई अपनी गलतियों के प्रायश्चित के लिए मां के सामने उठक-बैठक लगाते हैं.
भक्तों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से यहां पर आ रहे हैं
शक्ति पीठ मां अलोप शंकरी देवी मंदिर में भी
शारदीय नवरात्रि को लेकर व्यापक तौर पर तैयारियां की गई हैं. इस मंदिर में पूरे नवरात्रि में दूर-दूर से श्रद्धालु अपनी मनोकामना को लेकर पहुंचते हैं. न केवल उत्तर भारत बल्कि बड़ी संख्या में दक्षिण भारत के भी श्रद्धालु इस मंदिर में आते हैं. मंदिरों में श्रद्धालुओं की उमड़ने वाली भीड़ को लेकर बैरीकेटिंग की गई है. पूरे मंदिर परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं. इसके साथ ही सुरक्षा के पर्याप्त संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है. मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए महिला पुलिसकर्मी और सिविल ड्रेस में भी महिला और पुरुष दोनों पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है.
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सिविल सर्विसेज की तैयारी करते-करते कब 4 साल पहले पत्रकारिता की ओर झुकाव हो गया पता ही नहीं चला. नाम दीप राज दीपक है. वर्तमान में News18 हिंदी के साथ जुड़े हुए हैं. पद सब-एडिटर …
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