मुख्यालय संवाददाता@विशाल टंडन…

नवरात्र को लेकर शहर से लेकर गांव तक तैयारियां तेज हो गई हैं। कहीं पूजा पंडालों को अंतिम रूप दिया जा रहा है तो कहीं दुकानों पर पूजन सामग्री, फल-फूल और सजावटी सामान जुटाए जा रहे हैं। इन तैयारियों के बीच मूर्तिकारों की दुनिया भी दिन-रात मां दुर्गा के स्वरूप को आकार देने में जुटी है। बहुआर गांव के मूर्तिकार शंभू प्रसाद के लिए यह सिर्फ रोजी-रोटी का काम नहीं, बल्कि मां के स्वरूप को श्रद्धा और मेहनत से गढ़ने का अवसर भी है।

ग्राम पंचायत बहुआर निवासी शंभू प्रसाद पिछले कई वर्षों से दुर्गा प्रतिमाओं के निर्माण में लगे हैं। इस बार नवरात्र के लिए उनके पास करीब 40 प्रतिमाओं का ऑर्डर है। प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में उनका पूरा परिवार और कारीगर दिन-रात जुटे हुए हैं। शंभू बताते हैं कि एक प्रतिमा को तैयार करने में करीब 20 से 25 दिन का समय लग जाता है। नवरात्र नजदीक आते ही काम का दबाव और उत्साह दोनों बढ़ जाता है।

शंभू के यहां छह से लेकर 15 फीट तक ऊंची दुर्गा प्रतिमाएं तैयार की जा रही हैं। इनकी कीमत करीब 10 हजार से लेकर 40 हजार रुपये तक है। प्रतिमाओं को आकर्षक रूप देने के लिए अलग-अलग स्तर पर कारीगर काम करते हैं। बंगाल से आए कारीगर भी उनके साथ प्रतिमा निर्माण में हाथ बंटा रहे हैं। वहीं आसपास के युवा भी इस हुनर को सीखने के लिए उनके पास पहुंचते हैं।

शंभू बताते हैं कि इस बार उनके यहां तैयार हो रही प्रतिमाएं दुद्धी, रेणुकूट, ओबरा, घोरावल, रॉबर्ट्सगंज, रामगढ़, अहरौरा समेत कई स्थानों के पूजा पंडालों में स्थापित की जाएंगी। उनके लिए यह खास खुशी का अवसर होता है कि उनके हाथों से तैयार मां की प्रतिमाएं अलग-अलग क्षेत्रों में श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनती हैं।

उन्होंने बताया कि मूर्ति बनाने का काम केवल नवरात्र के दिनों तक सीमित नहीं रहता। इसकी तैयारी वर्षभर चलती रहती है। मिट्टी, ढांचा, रंग-रोगन, सजावट और प्रतिमा के स्वरूप को लेकर लंबे समय पहले से काम शुरू करना पड़ता है। नवरात्र करीब आते ही यही मेहनत उत्सव में बदलने लगती है।

शंभू प्रसाद ने बताया कि इस वर्ष 11 अक्टूबर से नवरात्र शुरू होंगे। पूजा समितियों को समय पर प्रतिमाएं उपलब्ध कराने के लिए 10 अक्टूबर से प्रतिमाओं की रवानगी शुरू हो जाएगी। उस दिन से उनके कार्यस्थल पर अलग ही चहल-पहल देखने को मिलेगी। तैयार प्रतिमाओं को पंडालों तक पहुंचाने के लिए समितियों के लोग पहुंचेंगे और पूरे माहौल में उत्सव की रौनक दिखाई देने लगेगी।

मूर्तिकारों की मेहनत के साथ शहर और गांवों में पूजा समितियों की तैयारियां भी अंतिम चरण में पहुंच रही हैं। पंडालों की सजावट, रोशनी और पूजन सामग्री की व्यवस्था की जा रही है। बाजार में भी फल-फूल और पूजा सामग्री की मांग बढ़ने लगी है। ऐसे में नवरात्र केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि कारीगरों, दुकानदारों और पूजा समितियों के लिए उत्साह और व्यस्तता का पर्व बन गया है।

शंभू जैसे मूर्तिकारों के हाथों से मिट्टी और रंगों के जरिए तैयार हो रही मां दुर्गा की प्रतिमाएं जल्द ही पंडालों में विराजमान होंगी। इसके साथ ही नवरात्र के नौ दिनों तक शहर से गांव तक भक्ति, आस्था और उत्सव का माहौल दिखाई देगा।