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नवरात्रि में मां विंध्यवासिनी धाम दर्शन के लिए जा रहे हैं तो आसपास मौजूद इन 5 खास मंदिरों में दर्शन करना न भूलें. मां कालीखोह, मां अष्टभुजा, भैरव-भैरवी, मां तारा और रामेश्वरम महादेव मंदिर से जुड़ी मान्यताओं के बारे में जानें.
नवरात्रि में अगर आप भी मां विंध्यवासिनी धाम दर्शन पूजन करने के लिए आ रहे हैं तो यह खबर आपके लिए है. मां विंध्यवासिनी धाम में दर्शन पूजन करने के बाद आसपास मौजूद इन पांच मंदिरों में दर्शन करना बिल्कुल भी ना भूले, यहां पर दर्शन किए बगैर आपकी यात्रा अधूरी मानी जाती है.
मां विंध्यवासिनी धाम की त्रिकोण यात्रा में मां कालीखोह का मंदिर सबसे खास माना जाता है. मां काली खोह को महाकाली का अवतार माना जाता है. यहां पर दर्शन करने से भक्तों के संकट कट जाते हैं. जीवन की समस्याएं दूर होती हैं. यहां पर मां खेचरी मुद्रा में विराजमान है.
मां सरस्वती की रूप विराजमान मां अष्टभुजा मंदिर भी त्रिकोण परिक्रमा में आती है. ऐसे में अगर मां विंध्यवासिनी धाम में आ रहे हैं तो यहां पर भी दर्शन जरूर करें. यहां दर्शन करने से आपके ज्ञान में वृद्धि होगी. नौकरी और कार्य क्षेत्र में सफलता मिलेगी. मां अष्टभुजा भी बेहद ही प्रभावशाली देवी मानी जाती हैं.
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मां विंध्यवासिनी धाम के पास कोतवाली रोड पर स्थित भैरव व भैरवी मंदिर बेहद ही दिव्य है. ऐसी मान्यता है कि यहां पर दर्शन करने से जीवन में तंत्र और मंत्र जैसी बढ़ाएं दूर हो जाती हैं. भैरव और भैरवी का यह स्थान पूरे भारत में एकमात्र है, जहां दोनों एक साथ यहां पर विराजमान है.
देश की चुनिंदा स्थलों पर स्थित तारा शक्तिपीठ में मां विंध्यवासिनी धाम के पास मां तारा का मंदिर है. मां तारा के मंदिर में तंत्र पूजा की जाती है, यहां पर भी देश के अलग-अलग प्रांतो से भक्त आते हैं और सिद्धि की कामना को लेकर यहां पर तप करते हैं. इस मंदिर को भी त्रिकोण परिक्रमा में बेहद माना गया है.
प्रभु श्री राम के द्वारा स्थापित रामेश्वरम महादेव मंदिर में भी दर्शन पूजन कर सकते हैं. रामेश्वरम महादेव मंदिर राम गया घाट के पास स्थित है. शिवपुर में स्थित यह मंदिर बेहद ही खास है. मान्यता है कि प्रभु श्री राम जब विंध्याचल आए हुए थे, उनके द्वारा ही यह मंदिर स्थापित किया गया था.
यह कुछ खास और दिव्य मंदिर थे, जहां पर आपको तंत्र विद्या से लेकर मंत्रों की साधना तक का ज्ञान मिलेगा. इन मंदिरों में दर्शन किए बगैर मां विंध्यवासिनी की यात्रा अधूरी मानी जाती है. अगर आप यहां पर आ रहे हैं तो 4 से 5 किलोमीटर के क्षेत्र में स्थित इन पांच मंदिरों में दर्शन पूजन करना बिल्कुल भी ना भूले.
