नई दिल्ली: भारतीय जिम्नास्टिक महासंघ (जीएफआई) ने चयन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की शिकायतों का जवाब देते हुए राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों के कांस्य पदक विजेता आशीष कुमार को अपने प्रतिभाशाली खिलाड़ियों (एसओएम) की सूची से हटा दिया है.
राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम के अनुसार एसओएम में शामिल होने वाले खिलाड़ियों का पद के लिए आवेदन करने से कम से कम एक वर्ष पहले संन्यास लेना आवश्यक है. आशीष और एक अन्य जिम्नास्ट आदित्य राणा ने अप्रैल-मई में भुवनेश्वर में एक घरेलू प्रतियोगिता में भाग लिया था. उन्हें जीएफआई की ‘अस्थायी’ एसओएम सूची में शामिल किया गया था.
मंत्रालय ने जीएफआई से उन शिकायतों पर जवाब मांगा था, जिनमें कहा गया था कि चयन मानदंड पूरा नहीं करने के बावजूद उन्हें सूची में शामिल किया गया था. संशोधित एसओएम रोस्टर में शामिल पूर्व राष्ट्रीय चैंपियन राकेश कुमार पात्रा भी शिकायतकर्ताओं में से एक थे.
जीएफआई ने स्वीकार किया कि आशीष और आदित्य को संन्यास लेने की उनकी स्वयं की घोषणा के आधार पर शामिल किया गया था, लेकिन कहा कि संन्यास सहित अन्य आवेदनों और दस्तावेजों की जांच के बाद जरूरी सुधार कर दिए गए.
इसमें यह भी दावा किया गया कि 30 जुलाई को पात्रा की शिकायत से पहले ही कार्रवाई शुरू कर दी गई थी. जीएफआई की आधिकारिक वेबसाइट पर छह अगस्त को संशोधित एसओएम सूची प्रकाशित की गई थी, इसमें आशीष और आदित्य दोनों का नाम शामिल नहीं है.
35 वर्षीय आशीष ने 2010 के राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों में फ्लोर एक्सरसाइज में कांस्य पदक जीता था, उन्होंने 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों में वॉल्ट में रजत पदक भी जीता था.
संशोधित एसओएम सूची में स्टार जिम्नास्ट दीपा कर्माकर भी शामिल हैं, जिन्होंने 2024 में संन्यास लिया था. विश्व कप की कांस्य पदक विजेता अरुणा रेड्डी और एशियाई चैंपियनशिप के रजत पदक विजेता रोहित जायसवाल भी सूची में शामिल हैं.
राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम के तहत पूर्व खिलाड़ियों की एक सूची तैयार करना अनिवार्य है, जो राष्ट्रीय खेल महासंघ (एनएसएफ) की आम सभा में भाग लेने के लिए जरूरी पूर्व खिलाड़ियों की संख्या से 10 गुना अधिक होनी चाहिए.
इस वर्ष जनवरी में लागू हुए अधिनियम के अनुसार एनएसएफ की कार्यकारी समिति में हर समय चार एसओएम का होना अनिवार्य हैं इसलिए एनएसएफ को 40 एसओएम (20 पुरुष और 20 महिला) की सूची रखना आवश्यक है.
पांच विश्व चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके पात्रा ने यह भी आरोप लगाया कि जीएफआई ने इच्छुक खिलाड़ियों से राज्य संघों से अनिवार्य सिफारिश लाने के लिए कहकर राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन किया है.
जीएफआई ने खेल मंत्रालय को दिए गए जवाब में कहा कि पूर्व जिम्नास्ट की शिकायतें प्रक्रिया की ‘गलतफहमी’ पर आधारित थीं. जीएफआई ने कहा कि सिफारिश लाना अनिवार्य नहीं था और इन्हें केवल वैकल्पिक सहायक दस्तावेजों के रूप में मांगा गया था.
जीएफआई ने कहा कि उसने उन आवेदनों को खारिज नहीं किया जिनमें सिफारिश शामिल नहीं थी, उसने कहा कि किसी भी आवेदक को ऐसा दस्तावेज जमा करने के लिए मजबूर नहीं किया गया. मंत्रालय के एक सूत्र ने कहा कि जीएफआई के स्थिति स्पष्ट करने के बाद इस मामले में किसी सक्रिय हस्तक्षेप की जरूरत नहीं पड़ेगी.









