आगरा: उत्तर प्रदेश के आगरा में इस बार जनकपुरी का आयोजन बेहद भव्य अंदाज में होने जा रहा है. जनकपुरी क्षेत्र में तैयार किया जा रहा जनक महल श्रद्धालुओं के साथ-साथ शहरवासियों के लिए भी आकर्षण का बड़ा केंद्र बनने वाला है. महल की बनावट ऐसी रखी गई है कि यहां पहुंचने पर लोगों को नेपाल के ऐतिहासिक महलों की झलक दिखाई देगी. इसके साथ ही राजस्थान की पारंपरिक वास्तुकला को भी डिजाइन का हिस्सा बनाया गया है.
महल में राजस्थानी झरोखे, नक्काशी और हवा महल जैसी संरचनाओं की झलक देखने को मिलेगी. जनकपुरी आयोजन समिति के अध्यक्ष राजू यादव के मुताबिक, इस बार जनक महल को सामान्य सजावट से अलग हटकर तैयार किया गया है. इसका उद्देश्य ऐसा वातावरण तैयार करना है, जिससे श्रद्धालुओं को भगवान श्रीराम और माता सीता के विवाह प्रसंग से जुड़ी जनकपुरी का धार्मिक और सांस्कृतिक स्वरूप महसूस हो सके. महल की डिजाइन में नेपाल और राजस्थान की स्थापत्य कला का मेल इसे खास बना रहा है.
स्पेशल 70 कारीगर दिन-रात कर रहे कार्य
महल को तैयार करने का काम करीब डेढ़ महीने पहले शुरू किया गया था. इसे आकार देने के लिए लगभग 70 कारीगर लगातार दिन-रात मेहनत कर रहे थे. खास बात यह है कि महल की सजावट और बारीक कारीगरी के लिए कोलकाता से विशेष कारीगर बुलाए गए. कारीगरों ने लकड़ी, कपड़े, फाइबर और अन्य सजावटी सामग्री की मदद से महल को भव्य रूप दिया है. अब जनक महल लगभग पूरी तरह तैयार हो चुका है और अंतिम सजावट का काम पूरा किया जा रहा है.
जनकपुरी का धार्मिक महत्व भी काफी बड़ा है. रामायण की कथा में मिथिला नरेश राजा जनक के महल में माता सीता का स्वयंवर हुआ था. भगवान श्रीराम ने इसी स्वयंवर में शिव धनुष तोड़कर माता सीता से विवाह किया था. आगरा की जनकपुरी इसी पौराणिक प्रसंग को जीवंत करने का प्रयास है. यहां भगवान श्रीराम और माता सीता के विवाह से जुड़े प्रसंगों को धार्मिक वातावरण में प्रस्तुत किया जाता है. यही वजह है कि जनकपुरी को देखने के लिए आगरा के अलावा आसपास के जिलों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं.
7 अक्टूबर की सुबह जनकपुरी पहुंचेगी रामबारात
आगरा की ऐतिहासिक रामलीला परंपरा में रामबारात का विशेष स्थान है. दशकों से चली आ रही इस परंपरा में भगवान श्रीराम की बारात शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए जनकपुरी पहुंचती है. इस वर्ष 7 अक्टूबर की सुबह उत्तर भारत की प्रसिद्ध रामबारात जनकमहल पहुंचेगी, जहां जनकपुरी आयोजन समिति की ओर से बारात का भव्य स्वागत किया जाएगा.
मान्यता है कि जनकपुरी में भगवान श्रीराम और माता सीता के विवाह का वातावरण जीवंत किया जाता है. रामबारात के पहुंचते ही पूरा क्षेत्र श्रद्धालुओं से भर जाता है और ऐसा प्रतीत होता है मानो त्रेता युग का विवाह समारोह सामने हो. इस बार जनकमहल को नेपाल के राजमहल की तर्ज पर सजाया गया है, जिससे रामबारात का स्वागत और भी खास होने वाला है.
सुरक्षा व्यवस्था का रहेगा पूरा इंतजाम
जनकपुरी आयोजन के दौरान बड़ी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था भी महत्वपूर्ण रहेगी. पुलिस और प्रशासन की ओर से भीड़ नियंत्रण, यातायात व्यवस्था, बैरिकेडिंग और प्रवेश-निकास मार्गों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. भीड़ वाले स्थानों पर पुलिसकर्मियों की तैनाती के साथ सीसीटीवी और निगरानी व्यवस्था को भी मजबूत रखा जाएगा, ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो.
जनकपुरी के दौरान हजारों लोगों के पहुंचने की संभावना है. शाम होते ही जनक महल रोशनी से जगमगा उठेगा और दूर से ही इसकी भव्यता लोगों को आकर्षित करेगी. धार्मिक आस्था, नेपाल की स्थापत्य शैली और राजस्थान की शाही वास्तुकला का यह संगम इस बार आगरा की जनकपुरी को खास बनाने वाला है.

