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वाराणसी के छोटी शीतला घाट स्थित ऐतिहासिक शिव मंदिर से विवादित नाम ‘पाकिस्तानेश्वर महादेव’ का बोर्ड आखिरकार हटा दिया गया है. आजादी से पहले सिंधु समाज द्वारा स्थापित इस शिवलिंग पर कुछ अराजक तत्वों ने ‘पाकिस्तानेश्वर महादेव’ का बोर्ड लगा दिया था, जिसका जमकर विरोध हुआ. मीडिया द्वारा मामले को प्रमुखता से दिखाए जाने के बाद स्थानीय प्रशासन और समाज हरकत में आया. रातों-रात उस बोर्ड को हटाकर मंदिर का नाम ‘सिंधु गंगेश्वर महादेव’ कर दिया गया.
शीतला घाट पर विवादित महादेव मंदिर का नाम परिवर्तित हुआ. (फाइल फोटो)
वाराणसी: धर्म और आस्था की नगरी काशी के घाटों पर स्थित मंदिरों का अपना एक अलग इतिहास और धार्मिक महत्व है. इसी बीच वाराणसी के प्रसिद्ध छोटी शीतला घाट पर स्थित एक शिव मंदिर को लेकर छिड़ा विवाद अब शांत होता नजर आ रहा है. मंदिर पर लगाए गए विवादित नाम ‘पाकिस्तानेश्वर महादेव’ के बोर्ड को हटा दिया गया है और अब इस मंदिर को नए व गरिमामय नाम ‘सिंधु गंगेश्वर महादेव’ के रूप में नई पहचान मिल गई है.
पूरा मामला वाराणसी के छोटी शीतला घाट स्थित शिव मंदिर से जुड़ा हुआ है. बताया जा रहा है कि कुछ समय पहले कुछ असामाजिक व शरारती तत्वों ने माहौल खराब करने और बेवजह का विवाद खड़ा करने के उद्देश्य से इस मंदिर के ऊपर बाकायदा ‘पाकिस्तानेश्वर महादेव’ नाम का एक बोर्ड लगा दिया था. जैसे ही इस बात की जानकारी स्थानीय लोगों और सिंधु समाज को हुई, इलाके में गहरा रोष फैल गया. लोगों ने इसे धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला कृत्य करार दिया.
आजादी से पहले की है शिवलिंग की स्थापना
सिंधु समाज के पदाधिकारियों का कहना है कि इस मंदिर में स्थापित दिव्य शिवलिंग की स्थापना देश की आजादी से पहले ही सिंधु समाज के पूर्वजों द्वारा श्रद्धापूर्वक की गई थी. मंदिर परिसर में मौजूद प्राचीन साक्ष्य और शिलालेख भी इस ऐतिहासिक तथ्य की पुष्टि करते हैं. इसके बावजूद कुछ लोगों ने जानबूझकर विवाद पैदा करने के लिए इसका नाम बदलकर ‘पाकिस्तानेश्वर महादेव’ प्रचारित करना शुरू कर दिया था.
विरोध के बाद रातों-रात हटा बोर्ड
इस मामले के सामने आने के बाद वाराणसी के सिंधु समाज ने कड़ा रुख अपनाया और नगर निगम में लिखित आपत्ति दर्ज कराई. खबर को मीडिया द्वारा प्रमुखता से उठाए जाने के बाद प्रशासन और स्थानीय नागरिकों में हलचल तेज हो गई. जनदबाव के चलते रातों-रात मंदिर के ऊपर से विवादित बोर्ड को उतार दिया गया. इसके तुरंत बाद स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने मंदिर की दीवार पर सम्मानपूर्वक ‘सिंधु गंगेश्वर महादेव मंदिर’ का नाम अंकित कर दिया.
निगम के सरकारी दस्तावेजों में दर्ज होगा नाम
अब इस नाम को हमेशा के लिए वैधानिक और सरकारी मान्यता दिलाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. सिंधु समाज के पदाधिकारी शंकर बिजलानी ने बताया कि मंदिर का नाम ‘सिंधु गंगेश्वर महादेव’ सरकारी अभिलेखों में दर्ज कराने के लिए नगर निगम की कार्यकारिणी बैठक में विधिवत प्रस्ताव दिया गया है. इस संबंध में एक प्रार्थना पत्र भी सौंपा गया है, ताकि नगर निगम के आधिकारिक दस्तावेजों में इस ऐतिहासिक धरोहर का सही और सम्मानजनक नाम हमेशा के लिए दर्ज हो सके और भविष्य में कोई फिर से ऐसा विवाद न खड़ा कर सके.
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सिविल सर्विसेज की तैयारी करते-करते कब 4 साल पहले पत्रकारिता की ओर झुकाव हो गया पता ही नहीं चला. नाम दीप राज दीपक है. वर्तमान में News18 हिंदी के साथ जुड़े हुए हैं. पद सब-एडिटर …
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