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Wushu Player Divyanshi Success Story: राजस्थान की वुशु खिलाड़ी दिव्यांशी ने एशियन गेम्स 2026 के लिए भारतीय टीम में जगह बनाकर इतिहास रच दिया है. वह एशियन गेम्स के 36 साल के इतिहास में वुशु में राजस्थान से चयनित होने वाली पहली खिलाड़ी हैं. जापान में 22 सितंबर से 4 अक्टूबर तक होने वाले खेलों में दिव्यांशी देश का प्रतिनिधित्व करेंगी. वह रोजाना करीब 8 घंटे अभ्यास कर रही हैं और उनकी नजर गोल्ड मेडल पर है. दिव्यांशी ने नेशनल चैंपियनशिप में 12 गोल्ड मेडल जीते हैं. इसके अलावा बॉक्सिंग में दो नेशनल सिल्वर, वर्ल्ड चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज और चीन में सिल्वर मेडल भी हासिल किया है.
राजस्थान की वुशु खिलाड़ी दिव्यांशी ने एशियन गेम्स 2026 के लिए भारतीय टीम में जगह बनाकर इतिहास रच दिया
कोटा. राजस्थान की खेल प्रतिभा अब एशिया के सबसे बड़े खेल मंच पर अपनी पहचान बनाने की तैयारी में है. कोटा की वुशु खिलाड़ी दिव्यांशी ने आगामी एशियन गेम्स 2026 के लिए भारतीय टीम में जगह बनाकर इतिहास रच दिया है. एशियन गेम्स के 36 साल के इतिहास में वुशु के लिए राजस्थान से चयनित होने वाली दिव्यांशी पहली खिलाड़ी हैं. जापान में 22 सितंबर से 4 अक्टूबर तक होने वाले एशियन गेम्स में वह देश का प्रतिनिधित्व करेंगी. फिलहाल दिव्यांशी इस बड़े मुकाबले के लिए रोजाना करीब 8 घंटे कड़ी ट्रेनिंग कर रही हैं. उनकी नजर सिर्फ पदक जीतने पर नहीं, बल्कि गोल्ड मेडल हासिल कर तिरंगा ऊंचा करने पर है.
36 साल में राजस्थान की पहली वुशु खिलाड़ी बनी दिव्यांशी
दिव्यांशी का एशियन गेम्स के लिए चयन राजस्थान के खेल जगत के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है. प्रदेश से वुशु में एशियन गेम्स के लिए चयनित होने वाली वह पहली खिलाड़ी हैं. इस उपलब्धि के बाद दिव्यांशी का उत्साह बढ़ा है और वह जापान में देश के लिए शानदार प्रदर्शन करने के लक्ष्य के साथ तैयारी कर रही हैं. एशियन गेम्स की तैयारी के लिए दिव्यांशी रोजाना करीब 8 घंटे अभ्यास करती है. सुबह चार घंटे और शाम चार घंटे वह ग्राउंड पर पसीना बहाती है. वह अपनी सफलता का श्रेय अपने कोच अशोक कुमार गौतम को देती है. दिव्यांशी के मुताबिक कोच खेल की बारीकियों पर लगातार नजर रखते हैं और उन्हें बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करते हैं. खिलाड़ी के लिए अपनी कैटेगरी के अनुसार वजन बनाए रखना भी बड़ी चुनौती होती है. इसके साथ ही चोट से बचना और प्रतियोगिता के दौरान पूरी तरह फिट रहना बेहद जरूरी है. दिव्यांशी अपनी ट्रेनिंग में इन सभी पहलुओं पर विशेष ध्यान दे रही हैं.
माता-पिता की एक बात ने बनाया गोल्ड का लक्ष्य
दिव्यांशी ने नेशनल चैंपियनशिप में 12 गोल्ड मेडल अपने नाम किए हैं. इसके अलावा बॉक्सिंग में दो नेशनल सिल्वर, वर्ल्ड चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज और चीन में सिल्वर मेडल जीत चुकी हैं. इन उपलब्धियों के बाद अब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती एशियन गेम्स में देश के लिए पदक जीतना है. दिव्यांशी बताती हैं कि उनके माता-पिता ने चयन के बाद उनसे कहा कि सिल्वर और ब्रॉन्ज कई खिलाड़ी जीतते हैं, लेकिन असली पहचान गोल्ड से बनती है.
माता-पिता की यही बात उनके मन में बस गई है. वह अब एशियन गेम्स में सिर्फ गोल्ड मेडल जीतने के लक्ष्य के साथ उतरना चाहती हैं. दिव्यांशी ने देशवासियों से उनके लिए प्रार्थना और समर्थन की अपील की है. उन्होंने अभिभावकों से अपनी बेटियों को वुशु जैसे मार्शल आर्ट्स और अन्य खेलों में आगे बढ़ाने की भी अपील की. उनके मुताबिक खेल बेटियों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ उन्हें आत्मरक्षा के लिए भी मजबूत बनाता है.
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दीपरंजन सिंह लगभग एक दशक से पत्रकारिता के फिल्ड से जुड़े हुए हैं. वह अभी न्यूज18 हिंदी के राजस्थान डिजिटल डेस्क से जुड़े हैं, जहां वे बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले लगभग एक दशक से सक्रिय पत…
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