नई दिल्ली: एशियन गेम्स 2026 का आज समापन हो गया. जापान के आइची-नागोया में आयोजित इस मल्टी स्पोर्ट्स इवेंट में भारक ने कुल 85 मेडल जीते, जिसमें 21 गोल्ड, 27 सिल्वर और 37 ब्रॉन्ज शामिल रहा है. हालांकि, पिछले एशियन गेम्स के मुकाबले में इस बार भारत के खाते में 21 कम है. वहीं गोल्ड की बात करें तो इस सात मेडल आए हैं. यही कारण है कि भारत की खेल महत्वाकांक्षाओं को आइची-नागोया में कड़वी वास्तविकता का सामना करना पड़ा पिछले हांगझोउ खेलों में रिकॉर्ड प्रदर्शन के बाद एक और बड़ी छलांग की उम्मीद थी. नायोगा में भारतीय टीम मेडल टैली में चौथे स्थान पर रही.
मेडल टैली में चीन का दबदबा कायम रहा. उसने 169 स्वर्ण सहित कुल 341 पदक जीते. जापान 83 स्वर्ण और कुल 269 पदकों के साथ दूसरे तथा दक्षिण कोरिया 39 स्वर्ण और 150 पदकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा. भारत का चौथे स्थान पर रहना अब भी उसे एशिया के प्रमुख खेल राष्ट्रों में बनाए रखता है. यह उपलब्धि महत्वपूर्ण है लेकिन शीर्ष पर मौजूद देशों और भारत के बीच अंतर अब भी बहुत बड़ा है.
अंतिम के दो दिनों में भारत ने जीते कुले 11 स्वर्ण पदक
अगर अंतिम दो दिनों में भारत ने 11 स्वर्ण पदकों की शानदार झड़ी नहीं लगाई होती तो शीर्ष पांच में जगह बनाना भी मुश्किल होता. भारत के पदक अभियान में कमी का सबसे बड़ा कारण उसका दो पारंपरिक मजबूत खेलों निशानेबाजी और एथलेटिक्स का अपेक्षा के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाना रहा.
दोनों खेलों से काफी उम्मीदें थीं लेकिन हांगझोउ की तुलना में भारत को इस बार कम पदक मिले. इससे निरंतरता, दबाव से निपटने और तैयारी में मौजूद कमियां उजागर हुईं. निशानेबाजी में भारत का प्रदर्शन खास तौर पर गिरा. पिछली बार सात स्वर्ण, नौ रजत और छह कांस्य सहित 22 पदक जीतने वाली 30 सदस्यीय भारतीय टीम इस बार जापान से तीन स्वर्ण, आठ रजत और चार कांस्य सहित 15 पदक लेकर लौटी.
एशियन गेम्स में नहीं हुई थी भारत की अच्छी शुरुआत
अभियान की शुरुआत कई मौकों के हाथ से निकलने और दावेदारों के लड़खड़ाने से हुई. दो बार की ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर का अभियान निराशाजनक रहा और महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल में भारत पदक नहीं जीत सका. पुरुषों की 10 मीटर एयर पिस्टल में कमलजीत, आकाश भारद्वाज और केदारलिंग उचागांवने की टीम भी प्रभाव छोड़ने में नाकाम रही.
सुरूचि सिंह और कमलजीत ने 10 मीटर एयर पिस्टल मिश्रित टीम स्पर्धा में स्वर्ण जीतकर भारत का निशानेबाजी में सोने के तमगे का खाता खोला. हालांकि टीम का माहौल बदलने वाली खिलाड़ी नीरू ढांडा रहीं. 27 साल की नीरू ट्रैप निशानेबाजी में व्यक्तिगत एशियाई खेल स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं. उन्होंने महिला टीम स्पर्धा में रजत और काइनान चेनाई के साथ मिश्रित टीम स्पर्धा में एक और स्वर्ण पदक जीता. लेकिन नीरू की शानदार उपलब्धियां भारतीय निशानेबाजी की व्यापक चिंताओं को पूरी तरह नहीं छिपा सकीं.
नीरज चोपड़ा जैसे स्टार एथलीट ने नहीं लिया एशियन गेम्स में हिस्सा
एथलेटिक्स में भी भारत को बड़ा झटका लगा. प्रतियोगिता शुरू होने से पहले ही भाला फेंक के स्टार खिलाड़ी नीरज चोपड़ा चोट के कारण हट गए और भारत का एक बड़ा स्वर्ण पदक दावेदार बाहर हो गया. मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुईं. तेजिंदरपाल सिंह तूर एशियाई खेलों में स्वर्ण पदकों की हैट्रिक पूरी नहीं कर सके, जबकि लंबी कूद के मुरली श्रीशंकर और ऊंची कूद के सर्वेश कुशारे को रजत से संतोष करना पड़ा.
इन खिलाड़ियों का प्रदर्शन दिखाता है कि भारत मुकाबले में तो है, लेकिन पदक के रंग को स्वर्ण में बदलने में अभी अंतर बाकी है. चोटों ने भी परेशानी बढ़ाई. ज्योति याराजी ने अभ्यास के दौरान घुटने में दर्द और परेशानी महसूस होने के बाद महिलाओं की 100 मीटर बाधा दौड़ की शुरुआती हीट से पहले नाम वापस ले लिया.
एथलेटिक्स में इस बार भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन संतोषजनक
घुटने की गंभीर चोट से वापसी कर रहे अविनाश साबले पुरुषों की 3000 मीटर स्टीपलचेज में चौथे स्थान पर रहे. किरण पाहल, एम पूवम्मा, प्राची चौधरी और विथ्या रामराज की महिला चार गुणा 400 मीटर रिले टीम ने एथलेटिक्स का एकमात्र स्वर्ण दिलाया. हालांकि हांगझोउ में छह स्वर्ण जीतने वाले इस खेल का प्रदर्शन इस बार काफी नीचे रहा.
निराशाजनक प्रदर्शन को असमान तैयारियों ने और मुश्किल बना दिया. खिलाड़ियों के आवास से जुड़ी समस्याएं, समर्पित खेल गांव का अभाव और लगातार परिवहन संबंधी दिक्कतों ने उनकी दिनचर्या प्रभावित की. प्रतियोगिता स्थलों तक लंबी यात्राएं, बसों में देरी और उबरने के लिए कम समय ने खिलाड़ियों पर अतिरिक्त दबाव डाला. ये समस्याएं हालांकि हम पदकों का बहाना नहीं हैं क्योंकि सुविधांए सभी के लिए समान थीं.
तीरंदाजी में भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन रहा दमदार
इसके बावजूद आइची-नागोया खेलों ने भारत के लिए एक महत्वपूर्ण सकारात्मक पहलू भी दिखाया और वह यह है कि देश का खेल आधार लगातार व्यापक हो रहा है. तीरंदाजी में कुमकुम मोहोद ने व्यक्तिगत रिकर्व स्वर्ण जीतकर इतिहास रच दिया. वह व्यक्तिगत रिकर्व में एशियाई खेलों का स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय बनीं.
भारत ने तीरंदाजी में पांच स्वर्ण, दो रजत और दो कांस्य पदक जीते जिससे उसका कुल पदक प्रदर्शन हांगझोउ के बराबर रहा. सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि रिकर्व तीरंदाजों ने सभी पांच स्पर्धाओं में पदक जीते जिसमें दो स्वर्ण, दो रजत और एक कांस्य शामिल रहा. यह दक्षिण कोरिया के लंबे समय से चले आ रहे दबदबे को चुनौती देने की भारत की गंभीर क्षमता का संकेत है.
कुश्ती में भारतीय पहलवानों ने जीते कुल 2 स्वर्ण पदक
कुश्ती में भारत ने छह पदक जीते जिसमें दो स्वर्ण शामिल रहे. सुजीत कलकल और अमन सहरावत ने स्वर्ण पदक की राह में ओलंपिक और विश्व चैंपियनों को हराया. ग्रीको रोमन वर्ग में नितेश सिवाच और सुनील कुमार ने भी शानदार प्रदर्शन किया जिससे कुश्ती का कुल प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली रहा. टेनिस में भारत को बड़ा झटका लगा और भारतीय खिलाड़ी 40 साल में पहली बार बिना किसी पदक के लौटे. इसके विपरीत गोल्फ ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की.
प्रणवी उर्स एशियाई खेलों में व्यक्तिगत स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं. प्रणवी, अदिति अशोक और दीक्षा डागर की महिला टीम ने रजत पदक जीता जिससे भारत ने एशियाई खेलों में पहली बार महिला टीम गोल्फ पदक हासिल किया.
मुक्केबाजी में भी भारतीय बॉक्सरों ने किया प्रभावित
मुक्केबाजी ने भी भविष्य के लिए उम्मीद जगाई. परवीन हुड्डा ने 22 महीने के निलंबन के बाद शानदार वापसी करते हुए महिलाओं के 65 किग्रा वर्ग में स्वर्ण जीता. हांगझोउ में जीता उनका कांस्य पदक निलंबन के कारण उनसे छिन गया था. लवलीना बोरगोहेन ने हांगझोउ के रजत पदक को इस बार स्वर्ण में बदला जबकि अंकुश पंघाल ने पुरुषों के 80 किग्रा वर्ग में एक और स्वर्ण भारत की झोली में डाला.
महिला हॉकी में 44 साल बाद भारत को मिला स्वर्ण
हॉकी में भारतीय महिला टीम ने 44 साल का इंतजार खत्म करते हुए एशियाई खेलों का स्वर्ण पदक जीता. उसने फाइनल में गत चैंपियन चीन को 1-0 से हराया. लालरेमसियामी ने निर्णायक गोल किया जबकि गोलकीपर बिचु देवी ने शानदार प्रदर्शन किया और अनुभवी सविता पूनिया ने पूरे अभियान में अहम भूमिका निभाई.
लेकिन इस स्वर्ण से भी बड़ी उपलब्धि थी 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक के लिए सीधे क्वालीफाई करना रही. इससे क्वालीफिकेशन की अनिश्चितता खत्म हुई और भारतीय टीम को तैयारी के लिए महत्वपूर्ण बढ़त मिली. पिछले 10 महीनों में नए कोचिंग ढांचे के तहत टीम में आया बदलाव यह दिखाता है कि लगातार और योजनाबद्ध तैयारी से क्या हासिल किया जा सकता है. पुरुष टीम ने भी एशियाई खेलों का खिताब बरकरार रखा और लॉस एंजिलिस का टिकट हासिल किया. पाकिस्तान के खिलाफ रोमांचक सेमीफाइनल में 4-3 की जीत के बाद भारतीय पुरुष टीम ने फाइनल में मलेशिया को हराया.
महिला और पुरुष दोनों टीमों ने जीता गोल्ड मेडल
क्रिकेट ने भारत के अभियान को शानदार अंदाज में समाप्त किया. भारत ने पुरुष फाइनल में चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को 19 रन से हराकर स्वर्ण पदक बरकरार रखा. श्रेयस अय्यर की टीम ने दबाव भरे मुकाबले में अपना धैर्य बनाए रखा. इससे पहले भारतीय महिला टीम ने भी स्वर्ण पदक जीता था. इस तरह भारत ने दोनों क्रिकेट प्रतियोगिताओं में अपने खिताब का सफलतापूर्वक बचाव किया.
आइची-नागोया खेलों में ऐतिहासिक स्वर्ण पदक, नए क्षेत्रों में सफलता और भारत के पदक आधार के विस्तार के कई संकेत मिले. लेकिन निशानेबाजी और एथलेटिक्स की नाकामी ने उन कमियों को भी उजागर किया जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
